गुना के कैंट थाना इलाके में नाबालिग लड़के से कुकर्म के आरोपी को कोर्ट ने सजा सुनाई है। आरोपी नाबालिग को सरसों के खेत में ले गया और वहां उसके साथ अप्राकृतिक कृत्य किया। आरोपी को 20 वर्ष की सजा सुनाई गई है। सजा सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि सिर्फ बेटियां ही नहीं, बेटा भी असुरक्षित हैं। घर के बाहर से बच्चे को ले गया था आरोपी
मामला वर्ष 2025 का है। 1 मार्च को दस वर्षीय बच्चे की मां ने जिला अस्पताल में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि वह 1 मार्च की दोपहर में घर में खाना बना रही थी। उसका बेटा घर के बाहर खेल रहा था। महिला ने आधे घंटे बाद देखा तो पीड़ित बालक घर के बाहर नहीं था। महिला मौहल्ले में बच्चे को देखने गई, लेकिन वह नहीं मिला। दोपहर 12 बजे बच्चा घर आया। महिला ने उससे पूछा तो वह रोने लगा। महिला ने देखा कि बच्चे को मुंह और गले पर चोट के निशान थे। तब बच्चे ने बताया कि घर के पास के मकान में रहने वाला व्यक्ति उसके पास आया था। उससे कहा था कि चल कुत्ता छोड़ने चल रहे हैं और यह कहकर वह उसे काली माता मंदिर के पास सरसों के खेत में ले गया। मारपीट के बाद कुकर्म किया
वह बच्चे के साथ कुकर्म करने की कोशिश करने लगा, तो बच्चे ने मना किया। आरोपी ने उसे कई चांटे मारे। इससे बच्चा चुप हो गया। आरोपी ने उसके साथ कुकर्म किया। इसके बाद वह वहां से चला गया। बच्चा अपने घर वापस आ गया। बच्चे की मां की शिकायत पर कैंट थाने में आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य मामलों में FIR दर्ज की गई। विवेचना के दौरान आरोपी को 4 मार्च को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया। कोर्ट ने सुनवाई शुरू हुई। इस दौरान DNA रिपोर्ट भी नेगेटिव आई थी। हालांकि, बच्चे के प्राइवेट पार्ट्स से खून बहा था और यह बात मेडिकल रिपोर्ट में आई थी। 20 साल कैद और 35 सौ का जुर्माना लगाया
इसी आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी माना। कोर्ट ने आरोपी नंदकिशोर उर्फ नंदू (30) पुत्र शोभाराम अहिरवार निवासी अशोकनगर को 20 वर्ष की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 3500 का जर्मन भी लगाया। इसके अलावा पीड़ित को 4 लाख रुपए मुआवजा देने के भी आदेश दिए। मामले में फैसला पॉक्सो मामलों की विशेष न्यायाधीश सोनाली शर्मा ने सुनाया। कोर्ट ने कहा- बेटे भी सुरक्षित नहीं, सबक सिखाना जरूरी
मामले में पैरवीकर्ता ADPO ममता दीक्षित ने बताया कि कोर्ट ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की है। कोर्ट ने कहा कि “बच्चों के साथ हो रहे अपराधों का असर अब साफ दिख रहा है। सिर्फ बेटी ही नहीं, बेटा भी असुरक्षित महसूस कर रहा है। सुरक्षा हर बच्चे का अधिकार है। बच्चों के साथ बढ़ रहे अपराधों के प्रति हर स्तर पर सक्रिय जागरूकता फैलाना है तथा हम सभी को मिलकर ऐसे अपराधों पर रोक लगाना है ऐसे प्रत्येक अपराधी को कानूनी सबक सिखाना है।”
