उज्जैन की पंवासा थाना पुलिस ने नाबालिग छात्रा की फोटो का दुरुपयोग कर उसे अश्लील वीडियो में जोड़कर सोशल मीडिया पर वायरल करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। मामले में एक महिला बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक आरोपी अब भी फरार है। पुलिस के अनुसार पूरी साजिश नाबालिग को बदनाम करने के मकसद से रची गई थी। पीड़िता के पिता ने 21 जून 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी के नाम से तीन अश्लील वीडियो गांव और समाज के व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल किए गए, जिससे गांव में अफवाह फैल गई कि वीडियो में दिखाई दे रही युवती उनकी बेटी है। इससे नाबालिग की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची और उसे बदनाम करने की कोशिश की गई। फोटो एडिट करके लगाई पुलिस जांच में सामने आया कि वीडियो में दिखाई दे रही युवती पीड़िता नहीं थी। किसी दूसरी लड़की के अश्लील वीडियो का स्क्रीनशॉट लेकर उसमें पीड़िता की फोटो एडिट कर लगाई गई थी। साइबर सेल की जांच में पता चला कि पीड़िता की पासपोर्ट साइज फोटो नवंबर 2025 में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान जमा किए गए फॉर्म से निकाली गई थी। आरोप है कि संबंधित बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए यह फोटो आरोपी एहसान पटेल को व्हाट्सएप पर भेज दी। इसके बाद एहसान पटेल, आबिद पटेल और मुजफ्फर पटेल ने फोटो आपस में साझा की। पुलिस के मुताबिक मुजफ्फर पटेल ने तकनीक का गलत इस्तेमाल कर फोटो को एडिट किया और आपत्तिजनक वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। पूछताछ में उसका नाम वीडियो एडिट करने वाले मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि मूल अश्लील वीडियो किसने उपलब्ध कराया था। चार गिरफ्तार, एक आरोपी फरार पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 79, 49 और आईटी एक्ट की धारा 67(ए) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। घटना में इस्तेमाल किए गए चार मोबाइल फोन और एसआईआर से जुड़े सरकारी दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में आबिद पटेल (देवास), मुजफ्फर पटेल (उज्जैन), एहसान पटेल (उज्जैन) और बीएलओ फखरुनिशा शामिल हैं। फरार आरोपी यूसुफ पटेल की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। पुलिस का कहना है कि पीड़िता नाबालिग है और उसका आरोपियों से कोई विशेष संबंध नहीं है। सभी एक ही गांव के रहने वाले हैं और खेती-बाड़ी का काम करते हैं। प्रारंभिक जांच में यह मामला किसी को सामाजिक रूप से नीचा दिखाने और बदनाम करने की सोची-समझी साजिश प्रतीत हो रहा है।
