धार की भोजशाला में मां वाग्देवी के दर्शन नाजिया इलाही खान ने शुक्रवार को पहुंचीं। उन्होंने कहा भोजशाला मां सरस्वती का मंदिर था, है और रहेगा। उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ किया, मां की स्तुति की और आरती के बाद यज्ञ कुंड में आहुति दी। नाजिया ने कहा कि दिल्ली पहुंचने के बाद वह राष्ट्रपति को पत्र लिखकर लंदन के संग्रहालय में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को धार लाने की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध करेंगी। उन्होंने भोजशाला से जुड़े विषयों पर काम करने और भारतीय संस्कृति व धार्मिक स्थलों के संरक्षण की जरूरत भी बताई। ‘दर्शन के बाद विशेष अनुभूति हुई’
भोजशाला में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए नाजिया इलाही खान ने कहा कि यहां दर्शन करने के बाद उन्हें विशेष अनुभूति हुई। उनके अनुसार, ज्ञान की देवी मां सरस्वती के सामने शीश झुकाकर उन्हें लगा कि उनका जीवन धन्य हो गया है। उन्होंने कहा, “जो भी सत्य है, वह सनातन धर्म है।” नाजिया ने कहा कि भोजशाला से जुड़े विषयों पर अभी बहुत काम किया जाना बाकी है। उन्होंने परिसर के बाहर फैली गंदगी को साफ करने की आवश्यकता भी बताई। भोजशाला मुक्ति यज्ञ समिति ने किया स्वागत
भोजशाला मुक्ति यज्ञ समिति की ओर से नाजिया इलाही खान का स्वागत किया गया। समिति के संयोजक गोपाल शर्मा ने उन्हें तिलक लगाया और भगवा दुपट्टा पहनाया। इसके बाद समिति की ओर से उन्हें भोजशाला के इतिहास, यहां चल रहे सत्याग्रह और मंदिर से जुड़े विषयों की जानकारी दी गई। ‘महिलाएं आस्था और संस्कृति के लिए खड़ी हो सकती हैं’
नाजिया ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की महिलाएं अपनी आस्था और संस्कृति के लिए खड़ी हो सकती हैं। उन्होंने स्वयं को हिंदू समाज के साथ बताते हुए कहा कि पेशे से वकील होने के नाते जहां भी उनकी जरूरत होगी, वह अपनी सहभागिता देंगी। उन्होंने मंदिरों, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा से जुड़े मुद्दे उठाते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों और संस्कृति के संरक्षण के लिए समाज को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। लंदन में रखी वाग्देवी की प्रतिमा को धार लाने की बात
नाजिया इलाही खान ने कहा कि वह दिल्ली पहुंचकर राष्ट्रपति को पत्र लिखेंगी। पत्र के जरिए लंदन के संग्रहालय में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को धार लाने की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध करेंगी। उन्होंने भोजशाला से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा करने की बात भी कही।
