कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के बेटे देवांश को ट्रोल किए जाने पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि डॉक्टर का बेटा डॉक्टर, किसान का बेटा किसान, पुलिसकर्मी का बेटा पुलिसकर्मी, नेता का बेटा नेता और अभिनेता का बेटा अभिनेता बन सकता है, तो कथावाचक का बेटा कथावाचक बने, इसमें आपत्ति क्यों है? बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर की दक्षिण भारत के तिरुपति बालाजी में तीन दिवसीय कथा चल रही है। शनिवार देर शाम उन्होंने कथा में हिंदू समाज से आपसी मतभेद छोड़कर एकजुट रहने का आव्हान भी किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती है कि हिंदू ही हिंदुओं का विरोध कर रहे हैं। पहले जानिए, देवकीनंदन ठाकुर के बेटे को लेकर क्या चल रहा… सार्वजनिक मंच से भागवत पाठ किया कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के तीन बेटियां और एक बेटा है। बेटे का नाम देवांश है। देवांश वर्तमान में 10वीं में पढ़ रहे हैं। देवांश ठाकुर ने बहुत कम उम्र में ही वैदिक ग्रंथों, भागवत कथा और संस्कृत श्लोकों का अध्ययन शुरू कर दिया था। देवांश ने कुछ समय पहले गुजरात के सोमनाथ में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में पहली बार सार्वजनिक मंच से भागवत पाठ किया था। इसका वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में मंच में देवकीनंदन ठाकुर ऊंचे मंच पर बैठे दिख रहे हैं। वहीं, थोड़ी दूर पर मौजूद एक सफेद रंग के सोफे पर देवांश ठाकुर भजन करते नजर आए। इस बीच, पिता देवकीनंदन ध्यान से बेटे की तरफ देखते दिखे। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे सनातन परंपरा और पारिवारिक संस्कारों की विरासत बताने लगे, तो कुछ इसे धार्मिक क्षेत्र में बढ़ते परिवारवाद से जोड़ने लगे। धीरेंद्र शास्त्री बोले- कथा पसंद नहीं, तो मत जाइए बागेश्वर सरकार ने कहा कि यदि किसी को किसी की कथा पसंद नहीं है, तो उसे सुनने मत जाइए, लेकिन सनातन परंपरा, संतों और कथावाचकों का सार्वजनिक उपहास नहीं होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि मुस्लिम अपने धर्मगुरुओं का उपहास नहीं उड़ाते, तो हिंदुओं को भी संतों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि अपने ही संतों, मंदिरों और मठों पर लगातार आक्षेप करना अंततः सनातन समाज को ही कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि हिंदू आपसी खींचतान छोड़कर एक-दूसरे का सम्मान करें। सनातन के सम्मान के लिए एकजुट रहें। देवकीनंदन ठाकुर बोले – कुछ कह देना सही नहीं इससे पहले, देवकी नंदन ठाकुर ने कहा था कि ट्रोल किस बात पर किया जा रहा है? क्या धर्म कोई धंधा है, जो लोग ऐसी बातें कर रहे हैं। क्या उन्हें धर्म की समझ है? हर माता-पिता अपने बच्चों को अपने संस्कार देते हैं। हम भी वही कर रहे हैं। क्या सिर्फ कुछ व्यूज पाने के लिए किसी को भी कुछ भी कह देना सही है? उन्होंने कहा कि मेरा बेटा अभी 14 साल का है। आज तक उसके पास मोबाइल नहीं है। हमने उसे वही संस्कार दिए हैं, जो हर माता-पिता को अपने बच्चों को देने चाहिए। अगर बचपन से बच्चे का हाथ पकड़कर मंदिर ले जाएंगे, सत्संग में बैठाएंगे तो वह दूसरों का सम्मान करना सीखेगा। अच्छे संस्कार ही बच्चे को हर तरह से समृद्ध बनाते हैं।
