इंदौर के परदेशीपुरा स्थित आस्था वृद्धाश्रम में शनिवार को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बुजुर्गों और दृष्टिहीन बच्चों के साथ दिवाली मनाई। इस दौरान अंताक्षरी में दृष्टिहीन बच्चियों ने अपनी सुरीली आवाज से सबका दिल जीत लिया। उनकी गायकी सुनकर विजयवर्गीय ने मजाकिया अंदाज में कहा- ‘ये बच्चियां हमें पटक-पटक मारेगी।’ उन्होंने बच्चियों की जमकर तारीफ की और उनका उत्साह बढ़ाया। अंताक्षरी में मंत्री भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने ‘रमैया वस्ता वैया…’ और ‘हमें तुमसे प्यार कितना…’ जैसे गाने गाए। हालांकि, अंताक्षरी में उनकी टीम हार गई। अनुभूति विद्यालय की गीताजी के नेतृत्व वाली टीम ने जीत दर्ज की। विजयवर्गीय ने कहा कि इस आयोजन में हार-जीत मायने नहीं रखती, बल्कि सबके साथ मिलकर खुशियां बांटना ज्यादा महत्वपूर्ण है। विजयवर्गीय बोले- इनके चेहरों की खुशी ही हमारे पटाखे-मिठाइयां हैं विजयवर्गीय ने कहा कि जब तक हम इन लोगों के साथ दिवाली नहीं मनाते, तब तक त्योहार का असली आनंद नहीं आता। इनके चेहरों की खुशी में ही हमारे लिए पटाखे, मिठाइयां और दिवाली का उत्साह है। उन्होंने बताया कि पिछले 35-40 साल से लगातार यहां आ रहे हैं। बुजुर्गों और बच्चों के साथ भोजन करना, भजन गाना और अंताक्षरी खेलना उनके लिए खास अनुभव होता है। इनके चेहरों पर खुशी देखकर लगता है कि हमारी दिवाली सफल हो गई। मंत्री ने कहा- मिट्टी के दीये खरीदें, तभी कुम्हारों के घर भी मनेगी दिवाली मंत्री ने लोगों से स्वदेशी उत्पाद अपनाने और ‘लोकल फॉर वोकल’ को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि कुम्हार सालभर मेहनत कर मिट्टी के दीये बनाते हैं। उनकी भी उम्मीदें दिवाली से जुड़ी होती हैं। जब उनके दीये बिकते हैं, तभी उनके घर में भी त्योहार की खुशियां आती हैं। आज लोग प्लास्टिक और मोम के दीये खरीदने लगे हैं, जबकि हमें पारंपरिक मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता देनी चाहिए। हमारी छोटी-सी खरीदारी किसी कुम्हार, छोटे व्यापारी और स्थानीय कारीगर के घर में भी खुशियों का दीप जला सकती है।
