मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। अस्पताल में भर्ती मरीज ने खुलेआम पी शराब
सागर के जिला अस्पताल में गजब ही हो गया। यहां भर्ती एक मरीज ने वार्ड के अंदर ही खुलेआम शराब पी डाली। इसका वीडियो सामने आने के बाद सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था फिर सवालों के घेरे में है। वीडियो में मरीज जमीन पर बैठा है और हाथ में शराब की बोतल लिए दिखाई देता है। परिजन उसे रोकने की कोशिश करते हैं। अस्पताल का स्टाफ भी मना करता है, लेकिन मरीज किसी की नहीं सुनता। वह परिजन के हाथ से बोतल छीनता है, पैग बनाता है और सबके सामने आराम से गटक जाता है। मामला देखकर यही शेर याद आता है-
दर्द-ए-दिल की दवा तो सिर्फ मयखाने में है..
अब तो हर मर्ज का इलाज इसी पैमाने में है.. अब लोग कह रहे हैं कि लगता है मरीज ने इस शेर को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया। फर्क बस इतना था कि मयखाने की जगह उसने अस्पताल के वार्ड को ही चुन लिया। अब शराब पीने के बाद मरीज सुरूर में आ गया और अस्पताल प्रबंधन मुश्किल में आ गया। इस घटना ने सिर्फ लापरवाही ही उजागर नहीं की, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की भी पोल खोल दी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अस्पताल के वार्ड तक शराब की बोतल पहुंची कैसे? भाजपा सांसद बोले- देश 1952 में आजाद हुआ
हमारे देश को आजादी कब मिली? 15 अगस्त 1947 को। लेकिन रीवा से भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा के हिसाब से भारत 1952 में आजाद हुआ। भले ही उनकी जुबान फिसली हो, लेकिन उनका यह बयान चर्चा का विषय बन गया है। लोग हैरानी भी जता रहे हैं और चुटकी भी ले रहे हैं। वैसे भाजपा के कई नेता यह कह चुके हैं कि देश को वास्तविक आजादी 2014 में मिली, जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। ऐसे में रीवा सांसद कम से कम 2014 से थोड़ा पीछे तो गए, लेकिन 1947 तक फिर भी नहीं पहुंच पाए। दरअसल, मीडिया ने उनसे पूछा कि रीवा-मिर्जापुर रेल लाइन कब तक शुरू होगी। जवाब में सांसद ने कहा कि यह मांग तो आजादी के समय से चली आ रही है और फिर जोड़ दिया कि 1952 में देश आजाद हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके प्रयासों से इस रेल लाइन का सर्वे पूरा हो चुका है। हालांकि, वर्षों से मांग और सर्वे की बातें हो रही हैं, लेकिन ट्रेन अब तक पटरी पर नहीं दौड़ी। जब मीडिया ने इसी देरी पर सवाल पूछे तो सांसद महोदय नाराज हो गए और पत्रकारों से कह बैठे- आप फालतू बात करते हो। कुल मिलाकर, ट्रेन अभी भी पटरी पर नहीं आई, लेकिन सांसद का ‘इतिहास ज्ञान’ जरूर सोशल मीडिया की पटरी पर तेजी से दौड़ने लगा। 8 पद पर भर्ती, एक अभ्यर्थी आया, 7 पद खाली
आपने वो चुटकुला तो सुना ही होगा- ‘मैं रेस में फर्स्ट आया। सवाल- रेस में कितने लोग थे? जवाब- मैं तो अकेला ही दौड़ रहा था। सीधी जिले में वन रक्षक भर्ती का मामला भी कुछ ऐसा ही रहा। यहां बैगा, भारिया और सहरिया जनजाति के लिए निकाली गई विशेष भर्ती में 8 पद थे। प्रदेशभर के पात्र अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया के लिए बुलाया गया, लेकिन हैरानी की बात ये रही कि सिर्फ एक अभ्यर्थी ही पहुंची। वह भी सीधी की नहीं, बल्कि उमरिया जिले की थी। अब जब मैदान में खिलाड़ी एक ही था, तो मुकाबला किससे होता। फिर भी अधिकारियों ने सारी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कीं और उसकी नियुक्ति कर दी। यानी 8 में से एक पद भर गया, बाकी 7 पद खाली रह गए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बाकी उम्मीदवार कहां रह गए? क्या उन्हें सूचना नहीं मिली, या फिर कोई और वजह थी? क्योंकि सरकारी नौकरी का मौका तो आमतौर पर लोग छोड़ते नहीं, बल्कि उसके लिए लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं। और अब अंदर की बात…
सचिव स्तर के एक अधिकारी को एक विभाग का प्रमुख बनाया गया। जबकि यहां इस पद पर पदस्थ महिला अधिकारी को उनकी जगह भेज दिया गया। लेकिन नए साहब ने कुर्सी संभालते ही सबसे पहले पिछली व्यवस्था की फाइलों का हिसाब-किताब शुरू कर दिया। सुना है कि महिला अधिकारी के कार्यकाल के टेंडरों से जुड़ी कई फाइलें फिलहाल रोक दी गई हैं। नतीजा यह हुआ कि इन फाइलों से जुड़े लोग मंत्रालय के चक्कर काट रहे हैं। अब वे ऐसे लोगों की तलाश में हैं, जिनकी नए साहब तक सीधी पहुंच हो और उनका काम आगे बढ़ सके। दिलचस्प बात यह है कि नए विभाग प्रमुख इससे पहले एक संवैधानिक संस्था में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उधर, जिस विभाग में महिला अधिकारी की नई पदस्थापना हुई है, वहां भी कर्मचारी कुछ कम परेशान नहीं बताए जा रहे। चर्चा है कि मैडम नियम-कायदों की किताब खोलकर बैठ गई हैं। नियम कायदे का हवाला देकर फाइलों में अड़ंगा लगा रही है। इनपुट सहयोग – जितेंद्र तिवारी (सागर), मनोज शुक्ला (सीधी), नसीम खान (मऊगंज) ये भी पढ़ें –
जुबान फिसली, सीएम मोहन यादव को कह दिया ‘प्रधानमंत्री’: भाजपा विधायक की ‘सोशल वर्क’ की परीक्षा भोपाल में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में संबोधन के दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की जुबान फिसल गई। उन्होंने कहा- हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री मोहन यादव जी…। हालांकि अगले ही पल अपनी गलती सुधारते हुए बोले- हमारे मुख्यमंत्री मोहन यादव जी। पूरी खबर पढ़ें
