मध्य प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद डॉ. संदीप कुमार पाठक के सवाल के जवाब में श्रम और रोजगार मंत्रालय ने चौंकाने वाली जानकारी दी है। राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक एमपी में बीते तीन सालों (2022-2024) में प्रदेश के कारखानों में कुल 104 मजदूरों की जान गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां 2023 में मौतों का आंकड़ा 33 था, वहीं 2024 में यह बढ़कर 35 हो गया। एक साल में लगाया 60 लाख जुर्माना सरकार ने इन हादसों के पीछे आग, विस्फोट और ऊंचाई से गिरने जैसे कारणों को मुख्य माना है । नियमों की अनदेखी करने वाली इकाइयों पर सरकार ने सख्ती दिखाते हुए अकेले वर्ष 2023 में ही 60.45 लाख रुपये का जुर्माना ठोका है। प्रशासन ने सुरक्षा में चूक के लिए तीन सालों में कुल 1 करोड़ 28 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला है। एमपी में 698 श्रमिक हुए गंभीर रूप से घायल मध्य प्रदेश में केवल मौतें ही नहीं, बल्कि घायल होने वाले श्रमिकों की संख्या भी डराने वाली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में कुल 698 श्रमिक गैर-घातक चोटों (नॉन फैटल इंज्युरीस) का शिकार हुए । साल 2022 में 269 श्रमिक घायल हुए, जबकि 2023 में 205 और 2024 में 224 श्रमिक हादसों की चपेट में आए। अन्य राज्यों से तुलना करें तो गुजरात (1,724 घायल) और महाराष्ट्र (2,518 घायल) के मुकाबले एमपी की स्थिति बेहतर दिखती है। निरीक्षण और जुर्माना: कागजों पर सख्ती, जमीन पर सुस्ती? प्रदेश में सुरक्षा मानकों को जांचने के लिए निरीक्षणों का सिलसिला तो चला, लेकिन हादसों पर लगाम नहीं लग सकी। साल 2022 में 1,437 निरीक्षण हुए जो 2023 में घटकर 1,038 रह गए, हालांकि 2024 में फिर सक्रियता बढ़ी और 1,282 फैक्ट्रियों की जांच की गई। जुर्माने की बात करें तो मध्य प्रदेश प्रशासन ने 2022 में 30.69 लाख, 2023 में रिकॉर्ड 60.45 लाख और 2024 में 37.74 लाख रुपए का जुर्माना वसूला है। तुलनात्मक रूप से देखें तो तमिलनाडु ने 2023 में 3.59 करोड़ रुपए का भारी-भरकम जुर्माना लगाया था। अदालतों में पेंडेंसी: 2,420 मामले अब भी लंबित एमपी में सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कार्यवाही की रफ्तार धीमी है। साल 2024 की रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में पिछले वर्षों के 2,420 मामले अदालतों में लंबित पड़े हैं । साल 2024 के दौरान 145 नए अभियोग लॉन्च किए गए। दिलचस्प बात यह है कि जहां कर्नाटक जैसे राज्यों में 2023 में 5 लोगों को कारावास की सजा हुई, वहीं मध्य प्रदेश में कारावास के कॉलम में शून्य दर्ज है, जो लचर पैरवी की ओर इशारा करता है। वर्ष 2022 से 2024 के दौरान पंजीकृत कारखानों में सबसे ज्यादा मौतों वाले पांच राज्य 1. गुजरात: इन तीन वर्षों में कुल 649 श्रमिकों की मौत हुई। वर्षवार विवरण देखें तो 2022 में 240, 2023 में 221 और 2024 में 188 मौतें दर्ज की गईं। 2. महाराष्ट्र: इस सूची में दूसरे स्थान पर है, जहां कुल 525 मौतें हुईं। यहां 2022 में 178, 2023 में 190 और 2024 में 157 श्रमिकों ने अपनी जान गंवाई। 3. तमिलनाडु: कुल 454 श्रमिकों की मृत्यु हुई। वर्ष 2022 में 117, 2023 में 184 और 2024 में 153 घातक चोटें दर्ज की गईं। 4. छत्तीसगढ़: तीन वर्षों के दौरान कुल 271 मौतें दर्ज की गईं। वर्ष 2022 में 78, 2023 में 74 और 2024 में यह संख्या बढ़कर 119 हो गई। 5. आंध्र प्रदेश: कुल 206 श्रमिकों की मौत हुईं। यहां 2022 में 76, 2023 में 71 और 2024 में 59 मौतें हुईं। ढाई हजार केस पेंडिंग, किसी को सजा जेल नहीं मध्य प्रदेश में पिछले तीन वर्षों के दौरान कारखाना अधिनियम के तहत अदालतों में लंबित मामलों और दोषसिद्धि (सजा) के मामले में कमजोर पैरवी एक बड़ा कारण समझ आती है। फैसले और दोषसिद्धि (सजा) का विवरण तीन सालों में जुर्माने
