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डेली कॉलेज चुनाव: नए संविधान पर लगी मुहर:अब सिर्फ दो श्रेणियों में होगा मुकाबला; ओडीए में विरोध के स्वर तेज

डेली कॉलेज के आगामी चुनाव को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है। फर्म एंड सोसायटी ने कॉलेज के नए संविधान संशोधन को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है, जिसकी आधिकारिक प्रति मुख्य चुनाव अधिकारी और हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस सुशील गुप्ता के पास पहुंच गई है। शासन की इस हरी झंडी के साथ ही अब यह तय हो गया है कि इस बार चुनाव प्रक्रिया नए नियमों के तहत ही संपन्न कराई जाएगी। नए बदलावों के बाद अब निर्वाचन का दायरा सीमित हो गया है और केवल दो श्रेणियों के लिए ही वोट डाले जाएंगे। संशोधित संविधान के प्रावधानों के अनुसार, अब चुनाव मुख्य रूप से ‘न्यू डोनर कैटेगरी (2B2)’ और ‘पुराने डोनर कैटेगरी (2B1)’ के लिए आयोजित किए जाएंगे। जहां पुराने डोनर्स की श्रेणी से दो सदस्यों का चयन मतदान के जरिए होगा, वहीं न्यू डोनर कैटेगरी के लिए भी चुनावी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सबसे बड़ा बदलाव ‘ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन’ (ओडीए) यानी कैटेगरी 2C में देखने को मिला है। पहले इस श्रेणी से दो सदस्यों का चुनाव होकर बोर्ड में जाने का प्रावधान था, जिसे अब पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। नए नियमों के तहत अब ओडीए के अध्यक्ष और सचिव सीधे बोर्ड का हिस्सा बनेंगे। इसके अलावा, एक प्रतिष्ठित छात्र को भी बोर्ड में शामिल किया जाएगा, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया चयन (Selection) पर आधारित होगी, न कि निर्वाचन पर। प्रबंधन और बोर्ड इस बदलाव को कॉलेज के हित में बता रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे बार-बार चुनाव कराने की जटिलता खत्म होगी। साथ ही, ओडीए के निर्वाचित पदाधिकारी जब सीधे बोर्ड में बैठेंगे, तो वे पूर्व छात्रों की समस्याओं और सुझावों को अधिक प्रभावी ढंग से शासन के सामने रख सकेंगे। हालांकि, इस फैसले ने ओडीए के भीतर एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। एसोसिएशन का एक गुट इस संशोधन का पुरजोर विरोध कर रहा है। विरोधियों का कहना है कि मतदान का अधिकार छीनने से ओडीए के लोकतांत्रिक अस्तित्व पर संकट खड़ा हो जाएगा। विरोधी गुट का मुख्य तकनीकी ऐतराज चुनाव के शेड्यूल और संविधान लागू होने की तारीख को लेकर है। उनका तर्क है कि जब 21 अप्रैल को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हुई थी, तब पुराना संविधान ही प्रभावी था। फर्म एंड सोसायटी से नए संविधान की सत्यापित प्रति 23 अप्रैल को प्राप्त हुई है, ऐसे में प्रक्रिया के बीच में नए नियमों को थोपना नियम विरुद्ध है। माना जा रहा है कि यह मामला जल्द ही कानूनी मोड़ ले सकता है और विरोधी गुट इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी में है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, चुनाव की नामांकन प्रक्रिया 28 और 29 अप्रैल को संपन्न होगी। इसके बाद 4 मई से 19 मई के बीच डाक मतपत्र (पोस्टल बैलेट) जारी किए जाएंगे, जिन्हें 20 मई तक वापस जमा करना होगा। चुनाव का मुख्य चरण 21 मई को होगा, जिसमें स्थानीय मतदाता वोट डालेंगे। मतदान संपन्न होने के तुरंत बाद उसी दिन मतगणना की जाएगी और देर शाम तक चुनाव परिणामों की घोषणा कर दी जाएगी। फिलहाल, नए संविधान की मंजूरी ने कॉलेज की राजनीति में हलचल तेज कर दी है और सबकी नजरें अब हाईकोर्ट के संभावित रुख पर टिकी हैं।

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