Homeदेशट्विशा अकेली नहीं, एमपी में रोज एक महिला की मौत:दहेज हत्या में...

ट्विशा अकेली नहीं, एमपी में रोज एक महिला की मौत:दहेज हत्या में एमपी तीसरे नंबर पर; आत्महत्या के लिए भी उकसा रहे ससुराल वाले

ट्विशा को न्याय दिलाने लोग इंस्टाग्राम पर स्टोरी लगा रहे हैं। आर्मी से रिटायर्ड लोग रैली निकाल रहे हैं। ट्विशा की मौत क्यों हुई, कैसे हुई, यह अभी किसी को नहीं पता। ससुराल पक्ष उसे नशा करने वाला बता रहा है, जबकि मायके पक्ष का कहना है कि हमने स्कॉर्पियो दी थी, लेकिन उन्हें फॉर्च्यूनर चाहिए थी। मामला अभी कोर्ट में है। ट्विशा के पिता जबलपुर कोर्ट में न्याय की मांग करने पहुंचे हैं। परिजनों ने न्याय मिलने तक शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह पहला मामला है, जिसमें किसी महिला ने आत्महत्या की हो? तो सच्चाई इस सवाल से कहीं ज्यादा डरावनी है। एमपी में हर रोज एक महिला दहेज के कारण अपनी जान गंवा रही है। एनसीआरबी की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि 2024 में प्रदेश की 450 महिलाओं की जान दहेज न देने या कम दहेज देने के कारण गई। पढ़िए…हाल ही के 3 मामले केस-1 : छिंदवाड़ा की युवती की संदिग्ध मौत छिंदवाड़ा की रहने वाली एक युवती ने 22 फरवरी 2022 को प्रेम विवाह किया था। परिवार को उम्मीद थी कि बेटी अपनी पसंद से शादी कर खुश रहेगी, लेकिन कुछ समय बाद ही उसने अपने पिता को बताया कि ससुराल वाले उसे मारते-पीटते हैं और प्रताड़ित करते हैं। 2023 में वह आखिरी बार अपने पिता से मिली थी। इसके बाद परिवार का उससे संपर्क कम हो गया। 6 अप्रैल 2024 को सुबह करीब 11 बजे परिवार को अस्पताल से फोन आया कि उनकी बेटी का इलाज चल रहा है। जब पिता दोपहर करीब 4 बजे अस्पताल पहुंचे तो बेटी मृत अवस्था में मिली। परिजनों का आरोप है कि उन्हें बेटी को नागपुर ले जाने की भी जानकारी नहीं दी गई। पिता का कहना है कि जब उन्होंने ससुराल पक्ष को फोन किया तो किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया। परिवार को शक है कि युवती को जहर देकर मार दिया गया। केस-2 : शादी के कुछ महीने बाद ही टूटने लगी थी पलक ग्वालियर के सुरैयापुरा निवासी 21 वर्षीय पलक रजक की 12 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके वालों ने हत्या का आरोप लगाया है। पलक की शादी करीब एक साल पहले हुई थी। परिवार का आरोप है कि शादी के बाद से ही वह मानसिक तनाव में रहने लगी थी। मौत से करीब 30 मिनट पहले पलक ने अपने भाई प्रिंस को फोन किया था। उसने रोते हुए कहा था—
“मुझे यहां से ले जाओ… वरना ये लोग मुझे मार डालेंगे।” जब तक भाई पहुंचा, तब तक अस्पताल में स्ट्रेचर पर उसकी बहन का शव रखा था। सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली पलक के इंस्टाग्राम पर 10 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स थे। पुलिस जांच में उसकी कई पोस्ट और रील्स सामने आई हैं, जिनमें वह घुटन, अकेलेपन और मानसिक टूटन की ओर इशारा करती नजर आई। जांच में यह भी सामने आया कि मौत से पहले उसने तीन दिन तक खाना नहीं खाया था। केस-3: ढाई साल पहले हुई थी शादी, अब अस्पताल से लौटा शव गुना जिले के नसीरा गांव में 24 वर्षीय भावना यादव की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है। भावना की शादी करीब ढाई साल पहले अशोकनगर जिले के कदवाया गांव से नसीरा निवासी गिर्राज यादव के साथ हुई थी। मायके पक्ष का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही दहेज को लेकर भावना को प्रताड़ित किया जाने लगा। उसके साथ मारपीट भी होती थी। परिवार ने दहेज प्रताड़ना से जुड़ा एक ऑडियो भी पुलिस को सौंपा है। परिजनों के मुताबिक, बुधवार को भावना की तबीयत बिगड़ी। ससुराल वालों ने कहा कि उसने पारिवारिक विवाद के चलते जहरीला पदार्थ खा लिया था। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। गुरुवार सुबह जिला अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिवार को सौंप दिया गया। बेटी की मौत के बाद अस्पताल के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। केस-4: दहेज प्रताड़ना से परेशान होकर खाया जहर राजगढ़ जिले के खिलचीपुर थाना क्षेत्र के ब्यावरा कलां गांव में 22 वर्षीय भावना उर्फ भूराबाई ने दहेज प्रताड़ना से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खा लिया। उसकी शादी करीब दो साल पहले ब्यावरा कलां निवासी सुनील दांगी से हुई थी। परिवार के मुताबिक, 9 मई को ससुराल में उसकी हालत बिगड़ गई। पहले उसे खिलचीपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत में भोपाल रेफर कर दिया गया। भोपाल के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान शनिवार देर रात उसकी मौत हो गई। मृतका के पिता रमेश चंद दांगी ने आरोप लगाया कि पति सुनील दांगी और ससुर सियाराम दांगी लंबे समय से दहेज के लिए बेटी को प्रताड़ित कर रहे थे। आए दिन उसके साथ मारपीट और मानसिक उत्पीड़न किया जाता था। इसी से परेशान होकर उसने यह कदम उठाया। गांव में उसका अंतिम संस्कार किया गया। वहीं, माता-पिता दोबारा थाने पहुंचे और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने पति और ससुर के खिलाफ दहेज प्रताड़ना समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। SWC कमेटी बनाकर काम करेगा राज्य महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर ने कहा कि दहेज हत्या और पति या ससुराल पक्ष की प्रताड़ना से जुड़े मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक हैं। आयोग के पास भी ऐसे कई प्रकरण पहुंचे हैं, जिनमें महिलाओं को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है। कई मामलों में पुलिस एफआईआर दर्ज करने में देरी करती है या रिपोर्ट अधूरी बनाई जाती है, जिससे जांच और न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है। आयोग अब ऐसे मामलों में पुलिस की संवेदनशीलता बढ़ाने और जांच में हो रही कमियों का विश्लेषण करने की तैयारी कर रहा है। जरूरत पड़ने पर आयोग कमेटी बनाकर यह भी तय करेगा कि लापरवाही करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई हो। साथ ही आयोग ऐसी योजनाओं पर भी काम करना चाहता है, जिससे दहेज और घरेलू हिंसा जैसे मामलों को पहले ही रोका जा सके। दहेज हत्या में एमपी का तीसरा स्थान एनसीआरबी की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में दहेज हत्या के 450 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 232 केस IPC और 218 केस नए BNS कानून के तहत दर्ज हुए। यह आंकड़ा बताता है कि शादी के बाद दहेज प्रताड़ना अब भी महिलाओं की जान ले रही है। दहेज हत्या के मामलों में एमपी का स्थान देश में तीसरा है। राज्य से ज्यादा मामले सिर्फ उत्तर प्रदेश में 2038 और बिहार में 1078 दर्ज किए गए हैं। प्रदेश में अब प्रेम विवाह में भी दहेज प्रताड़ना के मामले सामने आने लगे है। एडवोकेट अभिषेक सिंह बताते है कि लव मैरिज में जो डिवोर्स केस फाइल होते है इसमें 35 % केस में दहेज प्रताड़ना की धाराएं लगी होती है। पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता और घरेलू हिंसा रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में पति या ससुराल पक्ष द्वारा क्रूरता के 7514 मामले सामने आए। इनमें 4626 केस IPC और 2888 केस BNS के तहत दर्ज हुए। यह आंकड़ा बताता है कि घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना, मारपीट और दहेज के लिए दबाव जैसे अपराध राज्य में बड़ी संख्या में हो रहे हैं। पति या रिश्तेदारों की क्रूरता के मामलों में एमपी का सातवां स्थान है। आत्महत्या के लिए उकसाना मध्य प्रदेश में आत्महत्या के लिए उकसाने के 210 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 139 केस IPC और 71 केस नए BNS कानून के तहत दर्ज हुए। यह आंकड़ा बताता है कि मानसिक प्रताड़ना, घरेलू तनाव और सामाजिक दबाव जैसी परिस्थितियां महिलाओं को आत्महत्या की ओर धकेल रही हैं। आत्महत्या के लिए उकसाने के मामलों में मध्यप्रदेश देश में सातवें स्थान पर है। राज्य से ज्यादा मामले पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, केरल, बिहार, राजस्थान और हरियाणा में दर्ज किए गए हैं। गर्भपात से जुड़े अपराध मध्य प्रदेश में गर्भपात से जुड़े 6 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 5 IPC और 1 BNS के तहत दर्ज हुआ। ये मामले जबरन गर्भपात, गर्भ को नुकसान पहुंचाने या महिला की इच्छा के विरुद्ध गर्भ समाप्त कराने जैसे अपराधों से जुड़े हैं। संख्या कम जरूर है, लेकिन ऐसे अपराध महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकारों पर गंभीर असर डालते हैं। महिला अपराध में एमपी पांचवे स्थान पर रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश महिला अपराध के मामलों में लगातार चौथे साल पांचवें स्थान पर रहा। यहां महिलाओं के खिलाफ 32,832 मामले दर्ज हुए। 2022 में 32,765 केस दर्ज किए गए थे, जो 2023 में घटकर 32,342 हुए। 2024 में राज्य में हर दिन औसतन 90 से ज्यादा महिलाओं से जुड़े अपराध दर्ज हुए। आबादी के लिहाज से महिला अपराध में एमपी दूसरे नंबर पर रिपोर्ट के मुताबिक एमपी में महिला अपराध के आंकड़े 4 राज्यों से कम हैं, लेकिन अगर इन्हें प्रदेश में महिलाओं की संख्या के आधार पर देखा जाए तो आंकड़े बताते हैं कि एमपी महिला अपराध में दूसरे नंबर पर है।

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here