‘इंडिविजुअल गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले एथलीट्स को ₹2 लाख, सिल्वर जीतने वालों को ₹1.5 लाख और ब्रांज जीतने वालों को ₹1 लाख मिलेंगे। टीम इवेंट्स में गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज विजेताओं को ₹1 लाख, ₹75 हजार और ₹50 हजार रुपए दिए जाएंगे।’ ये घोषणा 3 अप्रैल को खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के क्लोजिंग सेरेमनी में सीएम विष्णुदेव साय ने की थी, जिसे बीते 60 दिन हो गए, लेकिन खिलाड़ियों के खाते में पैसे नहीं आए। न ही इस मामले में खिलाड़ियों से कोई बातचीत की गई है। बता दें कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन छत्तीसगढ़ में 25 मार्च से 3 अप्रैल तक हुआ था। ग्रुप और इंडिविजुअल गेम्स मिलाकर प्रदेश के लगभग 81 खिलाड़ियों ने मेडल जीता है। भास्कर ने पड़ताल की तो पता चला, खिलाड़ियों के पैसे नियमों के जाल में फंस गए हैं। विभाग की ओर से फाइल चलाई तो गई, लेकिन नियमों का हवाला देकर वित्त मंत्रालय ने लौटा दी। अब नियमों में संधोशन कर वापस फाइल वित्त मंत्रालय को भेजी जाएगी। इसके बाद ही खिलाड़ियों का भला हो पाएगा। हालांकि इसमें कितना वक्त लगेगा, ये लिख पाना मुश्किल है। पढ़िए रिपोर्ट… पहले समझिए, इस मामले आगे क्या होगा ? खेल-युवा कल्याण विभाग की संचालक तनुजा सलाम ने भास्कर को बताया कि नियम संशोधन प्रक्रिया लभगग पूरी हो चुकी है। फाइलों का दोबारा ट्रांसफर जल्द किया जाएगा। उम्मीद है कि मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को जल्द ही उनकी राशि मिल जाएगी। वित्त विभाग ने पूछा- किस नियम या योजना के तहत दिया जाए पैसा? CM साय के अनाउंसमेंट के बाद खेल विभाग ने एथलीट्स को अवॉर्ड मनी देने के लिए प्रस्ताव तैयार किया। इसे खेल मंत्रालय भेजा गया। खेल मंत्रालय ने प्रस्ताव की ये फाइल उठाकर वित्त को फॉरवर्ड कर दी। वित्त ने खेल मंत्रालय को फाइल लौटा दी। कारण बताया – CM साय की घोषणा और वर्तमान नियमों में टकराव फिलहाल छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना (प्रतिभा खोज) के तहत राष्ट्रीय स्तर की मान्यता प्राप्त प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को हर वित्तीय वर्ष में एकमुश्त खेलवृत्ति दी जाती है। वर्तमान योजना और CM साय की घोषणा में हो रहे टकराव को तीन पॉइंट्स में समझिए… 1. सीएम की अनाउंसमेंट राशि दी जाने वाली राशि से ज्यादा वर्तमान स्कीम के तहत सीनियर कैटेगरी में गोल्ड जीतने पर ₹75,000, सिल्वर जीतने पर ₹50,000 और ब्रांज जीतने पर ₹40,000 प्रोत्साहन राशि देने का नियम है, जबिक सीएम साय ने कहा है कि गोल्ड जीतने पर ₹2 लाख, सिल्वर पर ₹1.5 लाख और ब्रांज पर ₹1 लाख मिलेंगे। 2. ट्राइबल गेम्स ओपन कैटेगरी में हुए, वर्तमान नियम कैटेगरी आधारित वर्तमान नियम कहता है कि जूनियर कैटेगरी में गोल्ड जीतने पर ₹60,000, सिल्वर जीतने पर ₹40,000 और ब्रांज जीतने पर ₹30,000 प्रोत्साहन राशि देने का नियम है। जबकि लेकिन खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में अधिकांश स्पर्धाएं ओपन कैटेगरी में आयोजित हुई थीं। वहां खिलाड़ी की पात्रता उम्र के आधार पर नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय और खेल योग्यता के आधार पर तय हुई थी। 3. अभी टीम नहीं खिलाड़ी बड़ा जबकि साय की घोषणा टीम आधारित करेंट स्कीम कहती है कि हॉकी, फुटबॉल, कबड्डी, क्रिकेट, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल जैसे ग्रुप गेम में खेलने वाले केवल उन्हीं खिलाड़ियों को राशि दी जाएगी जिन्होंने वास्तव में मैच खेला हो, सिर्फ टीम में नाम होने से काम नहीं चलेगा। यानी मौजूदा नियम में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि राशि पूरी टीम में बांटी जाएगी। योजना की भाषा खिलाड़ी आधारित है, टीम आधारित नहीं। जबकि ट्राइबल गेम्स के लिए घोषित मॉडल कहता है कि गोल्ड जीतने पर ₹1 लाख प्रति खिलाड़ी।टीम सिल्वर पर ₹75 हजार प्रति खिलाड़ी और ब्रॉन्ज पर ₹50 हजार प्रति खिलाड़ी मिलेंगे। हर खिलाड़ी को प्रोत्साहन राशि देने की योजना है। यानी सीएम की घोषणा मौजूदा नियमों से अलग और अधिक उदार है। खिलाड़ी बोले- देर से मिली मदद न मिलने जैसे ही होती है ट्राइबल गेम्स के स्विमिंग इवेंट में चार रजत जीतने वाली अनुष्का भगत कहती हैं कि उनसे पैसों को लेकर डिपार्टमेंट की ओर से कोई संवाद नहीं किया गया है। हमने उम्मीद भी छोड़ ही दी है। गेम जीतने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। कोचिंग और डाइट महंगी हो गई है। पैसे मिलते तो मदद हो जाती। इसी ट्राइबल गेम्स में स्विमिंग इवेट्स में दो कांस्य जीतने वाले निखिल कहते हैं कि अगले महीने नेशनल एक्वाटिक चैंपियनशिप है। मुझे इसमें पार्टिशिपेट करना है। सरकार पैसे दे देती तो तैयारी बेहतर होती। बाद में पैसे मिलेंगे लेकिन इस चैंपियनशिप की तैयारी का वक्त तो निकल गया होगा। वेटलिफ्टिंग में कांस्य जीतने वाले लक्की बाबू मरकाम ने बताया कि अगर पुरस्कार राशि समय पर मिल जाती तो मेरे सप्लीमेंट और प्रोटीन का खर्च काफी हद तक मैनेज हो जाता। अभी स्थिति यह है कि एक महीने का सप्लीमेंट खरीदने के बाद एक-दो महीने का गैप करना पड़ता है, फिर पैसे जुटाकर दोबारा खरीद पाते हैं …………………. इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… बाइचुंग भूटिया बोले-भारत को स्पोर्टिंग नेशन बनाना,हर घर की जिम्मेदारी:खेलो-इंडिया ट्राइबल गेम्स के समापन समारोह में हुए शामिल,ट्रोलिंग पर मैरीकॉम बोलीं-मुझे फर्क नहीं पड़ता छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का समापन समारोह 3 अप्रैल को राजधानी रायपुर में हुआ। समारोह में पूर्व भारतीय फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया ने भारत में खेलों को बढ़ावा देने को लेकर मीडिया से बातचीत की। बाइचुंग भूटिया ने दैनिक भास्कर के रिपोर्टर शिवांकर द्विवेदी के सवाल कहा कि भारत को स्पोर्ट्स में आगे बढ़ाना सिर्फ सरकार का काम नहीं है, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। पढ़ें पूरी खबर…
