इंदौर की टेकरियों को हराभरा बनाकर माइनिंग पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा अभियान शुरू किया गया है। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 9 अगस्त को रेवती रेंज में एक लाख पौधों का वृक्षारोपण किया जाएगा। इस अभियान में हजारों लोग शामिल होंगे। उनका कहना है कि टेकरियों पर घना जंगल विकसित होने के बाद भविष्य में वहां खनन करना आसान नहीं होगा। विजयवर्गीय ने कहा कि दो वर्ष पहले जिस रेवती रेंज की पथरीली पहाड़ी पर वृक्षारोपण शुरू किया गया था, वहां आज 12 लाख 40 हजार से अधिक पौधे जीवित हैं। यह किसी सरकारी विभाग का नहीं, बल्कि इंदौर की जनता द्वारा तैयार किया गया “मानव निर्मित जंगल” है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि के कारण गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज हो चुका है और अब एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम भी 9 अगस्त को पौधों की गणना के लिए पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि इंदौर को देश में स्वच्छ शहर के साथ-साथ ग्रीन सिटी के रूप में भी नई पहचान दिलाने का लक्ष्य है। विजयवर्गीय ने कहा कि देवगुराड़िया और रेवती रेंज सहित शहर की कई टेकरियां लंबे समय से माइनिंग के खतरे का सामना कर रही हैं। रेवती रेंज के पीछे भी खनन शुरू हो गया था, जिसे रोका गया। उनका कहना था कि यदि टेकरियां खाली रहेंगी तो उन पर खनन की आशंका बनी रहेगी, लेकिन घने वृक्षारोपण से उन्हें संरक्षित किया जा सकेगा। उन्होंने देवास की पहाड़ी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आधी से अधिक टेकरी खनन की भेंट चढ़ चुकी है, इसलिए इंदौर की पहाड़ियों को बचाना जरूरी है। मंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य शहर में 21 लाख पौधे लगाने का है। इस अभियान में वन विभाग, इंदौर विकास प्राधिकरण, जिला पंचायत, मेट्रो रेल, कृषि विभाग, उच्च शिक्षा विभाग सहित कई सरकारी एजेंसियां और सामाजिक संस्थाएं भागीदारी कर रही हैं। सीबीएसई स्कूलों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने कैबिनेट में प्रस्ताव पारित किया है कि कॉलोनियों के गार्डन और शहर के सार्वजनिक उद्यानों की 25 प्रतिशत भूमि पर देसी प्रजातियों के पौधों का घना वन विकसित किया जाएगा। इससे हर कॉलोनी में प्राकृतिक ऑक्सीजन जोन तैयार होंगे। विजयवर्गीय ने बताया कि रेवती रेंज में आशा एनजीओ के सहयोग से एक हॉल भी तैयार किया गया है, जहां लोग पिकनिक, जन्मदिन जैसे कार्यक्रम आयोजित कर सकेंगे। यहां किचन बनाया जा रहा है और भविष्य में एक मेडिटेशन हॉल भी विकसित करने की योजना है, ताकि लोग प्राकृतिक वातावरण में समय बिता सकें।
