प्रदेश में इन दिनों अपने स्कूलों को सुधारने के लिए जेन-अल्फा सड़कों पर है। अब तक 8 जिलों में स्कूली बच्चे प्रदर्शन कर चुके हैं। ये प्रदर्शन ऐसे ही नहीं किये जा रहे हैं; बल्कि केंद्र की रिपोर्ट खुद भी बताती है कि जिन 8 जिले भोपाल, इंदौर, सागर, बड़वानी, विदिशा, अशोकनगर, उज्जैन और धार में बच्चे सड़क पर उतरे, उनमें कोई भी जिला 55% स्कोर तक नहीं पहुंच पाया। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग की परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फॉर डिस्ट्रिक्ट्स (PGI-D) रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र की इस परीक्षा में मध्यप्रदेश का एक भी जिला फर्स्ट डिवीजन पास नहीं हो सका। शिक्षक, पढ़ाई, सुविधाएं, सुरक्षा, डिजिटल शिक्षा और प्रबंधन के 6 पैमानों पर परखी गई स्कूल शिक्षा व्यवस्था के इस आकलन में 784 जिलों के स्कोर में देश के टॉप-200 में मप्र का एक भी जिला शामिल नहीं है। प्रदेश में सबसे ज्यादा स्कोर करने वाला सीधी जिला 600 में 333 अंक के साथ देश में 224वें स्थान पर रहा। पढ़ाई, सुविधाएं, सुरक्षा, प्रबंधन जैसे 6 पैमानों पर खुलासा उमरिया| बड़ागांव के स्कूली छात्र और छात्राएं को कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और स्कूल जाने वाले रास्ते पर कीचड़ की समस्या बताकर सड़क बनाने की मांग की। स्कोर में ये हैं प्रदेश के सबसे फिसड्डी जिले
बच्चों के सीखने के परिणाम में 290 में खरगोन को 91 अंक (31.38%) मिले। कक्षा में पढ़ाई की व्यवस्था में 90 में रीवा को 42 अंक (46.67%) मिले। स्कूल सुविधाओं में 51 में टीकमगढ़ को 18 अंक (35.29%) मिले। सुरक्षा व बाल संरक्षण में 35 में निवाड़ी, बड़वानी, अलीराजपुर और झाबुआ को 9-9 अंक (25.71%) मिले। डिजिटल शिक्षा में 50 में निवाड़ी को 6 अंक (12%), जबकि स्कूल प्रबंधन में श्योपुर को 42% अंक मिले। इन बिंदुओं पर हुई जिले की ग्रेडिंग 1. बच्चे कितना सीख रहे हैं: कक्षा 3, 6 और 9 के बच्चों की भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में न्यूनतम दक्षता देखी गई।
2. शिक्षक और कक्षा की व्यवस्था: प्री-प्राइमरी व्यवस्था, प्रोजेक्ट-वर्क, मूल्यांकन, शिक्षण सामग्री और बच्चों को पढ़ाने की प्रक्रियाएं देखी ।
3. स्कूल की सुविधाएं: समय पर किताबें और यूनिफॉर्म, लाइब्रेरी, रैंप, विज्ञान प्रयोगशाला और किचन गार्डन जैसी सुविधाएं देखी गईं।
4. बच्चों की सुरक्षा: सुरक्षा ऑडिट, आपदा से बचाव की ट्रेनिंग, छात्राओं की सेल्फ-डिफेंस ट्रेनिंग और डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान देखा गया।
5. डिजिटल पढ़ाई: इंटरनेट, कंप्यूटर और लैपटॉप, स्मार्ट क्लास और शिक्षकों की कंप्यूटर से पढ़ाने की ट्रेनिंग देखी गई। आंदोलन वाले 8 जिलों का रिपोर्ट कार्ड
