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जगन्नाथ पुरी के राजा दिब्यसिंह की ISKCON से अपील:गलत समय पर रथयात्रा न निकालें; मंदिर प्रशासन का दावा- भारत से बाहर 70 शहरों में मनमर्जी चलाई

पुरी के गजपति महाराज और श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJTMC) के अध्यक्ष दिब्यसिंह देब ने ISKCON से अपील की है कि वह गलत समय पर रथयात्रा न निकाले। इस्कॉन यात्रा का आयोजन ऐसी तारीखों पर कर रहा है, जो शास्त्रों के अनुसार नहीं हैं। इससे भक्तों की भावनाएं आहत हो रही हैं। उन्होंने मायापुर में ISKCON की गवर्निंग बॉडी कमीशन (GBC) के चेयरमैन श्री मधुसेविता दास प्रभु के नाम लिखे पत्र में अक्टूबर 2025 में लिए उस फैसले पर दोबारा विचार करने कहा है, जिसके तहत विदेशों में अलग-अलग समय पर रथ यात्रा निकाली जा रही है। एक दिन पहले ही केन्या की राजधानी नैरोबी में ISKCON ने रथयात्रा निकाली। 21 जून को लंदन में, 14 जून को न्यूयॉर्क सिटी में और 5 जुलाई को सिडनी में रथयात्रा निकाली गई। गौरतलब है कि इस साल, स्नान पूर्णिमा 29 जून को थी और मुख्य रथयात्रा 16 जुलाई को होगी। रथयात्रा हिंदू कैंलेंडर के मुताबिक हमेशा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि पर होती है। इधर, पुरी में तीनों रथों के निर्माण का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। यहां बढ़ई, सहायक और पेंटर समेत करीब 220 कारीगर दिन-रात रथ तैयार करने में जुटे हैं। गजपति ने गलत तिथि पर स्नान यात्रा की लिस्ट भेजी ISKCON ने पहले पुरी मंदिर को भरोसा दिलाया था कि स्नान यात्रा ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि पर मनाई जाएगी, लेकिन वे दुनिया भर के कई शहरों में अलग-अलग तारीखों पर इस त्योहार का आयोजन कर रहे हैं। इस साल, स्नान पूर्णिमा 29 जून को थी। अपनी बात के समर्थन में, देब ने 1 मई के बाद की गई स्नान यात्राओं की एक लिस्ट भी भेजी है। दिब्यसिंह ने यह भी लिखा है कि ISKCON से अनुरोध है कि वह यह सुनिश्चित करें कि दुनिया भर के सभी ISKCON मंदिर स्नान यात्रा केवल ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि पर ही मनाए। मध्य प्रदेश में प्रस्तावित रथयात्राओं पर भी जताई आपत्ति गजपति महाराज ने उज्जैन स्थित ISKCON मंदिर की ओर से 16 से 25 जुलाई के बीच मध्य प्रदेश के 66 स्थानों पर रथयात्रा आयोजित करने की योजना पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार रथ यात्रा केवल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होने वाला 9 दिवसीय उत्सव है। उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास रचित स्कंद पुराण में भी भगवान जगन्नाथ ने स्वयं स्नान यात्रा और रथयात्रा की निर्धारित तिथि बताई हैं। ऐसे में मनमानी तिथियों पर आयोजित करना प्राचीन परंपराओं और शास्त्रों के विपरीत है। ISKCON का तर्क- विदेशों में हर जगह एक ही दिन आयोजन संभव नहीं पुरी मंदिर की पिछली आपत्तियों का जवाब देते हुए ISKCON ने कहा था कि हर देश में जलवायु परिस्थितियों, सरकारी नियमों और स्थानीय सांस्कृतिक कारकों बड़ा असर डालते हैं। इसके कारण शास्त्रों में बताई गई तारीख पर रथयात्रा आयोजित करना हमेशा संभव नहीं होता है। इस्कॉन ने पुरी मंदिर को बताया था- “रूस में वहां का मौसम, सरकार और स्थानीय संस्कृति अक्सर शास्त्रों में बताई गई तारीखों पर रथयात्रा निकालने के अनुकूल नहीं होती है।” भास्कर नॉलेज… रथयात्रा को लेकर विवाद नया नहीं है। 2024 और 2025 में भी पुरी के गजपति महाराजा ने ISKCON से अनुरोध किया था कि विदेशों में भी पुरी के धार्मिक पंचांग के अनुसार रथयात्रा आयोजित की जाए। 2026 में यह विवाद इसलिए ज्यादा चर्चा में आया क्योंकि कई देशों में रथयात्रा पुरी की तिथि से कई हफ्ते पहले आयोजित की गई, जिसके बाद औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई गई। ————————– ये खबर भी पढ़ें… पुरी रथयात्रा: 200 से ज्यादा लोग 58 दिनों में तैयार करते हैं रथ, जानिए यात्रा के बाद क्या होता है इन रथों का हर साल भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के 45 फीट ऊंचे तीनों रथ 200 से ज्यादा लोग सिर्फ 58 दिनों में तैयार करते हैं। ये रथ 5 तरह की खास लकड़ियों से पूरी तरह हाथों से बनाए जाते हैं। शुरुआत अक्षय तृतीया से हो जाती है और गुंडिचा यात्रा के दो दिन पहले रथ बन कर तैयार हो जाते हैं। यात्रा खत्म होने के बाद रथों को तोड़ दिया जाता है। पढ़ें पूरी खबर…

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