भोपाल के रहवासी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी करने पर मंगलवार सुबह 9 बजे से फिर से कार्रवाई शुरू हो गई। कोहेफिजा स्थित चाय लीला कैफे समेत होटल, बुक शॉप और बैकरी पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। संचालकों ने स्वैच्छा से प्रतिष्ठान बंद कर दिए। इधर, भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के बैनरतले व्यापारी फिर से सड़क पर उतर गए हैं। सुबह 11 बजे वे न्यू मार्केट स्थित नानके पेट्रोल पंप पर इकट्ठा हुए और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने सीएम हाउस की ओर बढ़े। हालांकि, रोशनपुरा चौराहे से पहले ही पुलिस ने बेरिकेडिंग करके उन्हें रोक दिया है। आज इन इलाकों में कार्रवाई
मंगलवार को नगर निगम की टीमें अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई करेगी। उत्तर विधानसभा के कोहेफिजा, सिंधी कॉलोनी और कबाड़खाना, नरेला विधानसभा के करोंद, सुभाष नगर, दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के न्यू एमपी एमएलए कॉलोनी, मध्य विधानसभा के जहांगीराबाद शादी हॉल, करबला रोड, गोविंदपुरा में बाग मुगालिया, अमराई, सहयोग विहार, रघुनाथ नगर, रोहित नगर, ज्योतिनगर, हुजूर विधानसभा के चंचल नगर, सीहोर नाका, गांधी नगर और सीटीओ क्षेत्र में कार्रवाई शुरू की गई है। सुबह से इन इलाकों में कार्रवाई
नगर निगम ने बैरागढ़ के चंचल चौराहे पर होटल प्रेस्टिसाइड, शैक बार, इकबाल मैदान में स्वीट बुक, करोंद में फ्रेश बैक, कोहेफिजा में चाय लीला को बंद कराया। यहां संचालकों ने बंद के पोस्टर लगा लिए थे। इससे पहले सोमवार को पुलिस की मौजूदगी में 7 प्रतिष्ठान सील कर दिए गए, जबकि 109 दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान स्वैच्छा से बंद किए। सुप्रीम कोर्ट में पेश करेंगे रिपोर्ट
इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले रहवासी विवेक त्रिपाठी ने कहा कि निगम सिर्फ दिखावे की कार्रवाई कर रहा है। बड़े और रसूखदारों को छोड़ रहा है। सिर्फ छोटे कारोबारियों पर ही कार्रवाई की जा रही है। इसे लेकर नाराजगी है। पूरी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में देंगे। इन प्रतिष्ठानों को बंद किया गया, देखिए तस्वीरें.. यह है मामला- सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका देते हुए राज्य सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले सभी राहत आदेश (स्टे ऑर्डर) निरस्त कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। इस दौरान नगर निगम को कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करना है। इसके चलते ही नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, पिछले चार दिन से व्यापारियों को नोटिस नहीं दिए गए हैं। अफसरों का कहना है कि नोटिस देने के बाद परीक्षण किया जा रहा है। रहवासियों की यह मांग मुख्य मार्गों से सर्वे, नदी-तालाब किनारे भी जांच निगम ने मुख्य मार्गों के दोनों ओर और उनसे जुड़ी गलियों में सर्वे शुरू किया है। नदी-तालाब किनारे, ग्रीन बेल्ट, बफर जोन और कैचमेंट एरिया में बने भवन प्राथमिकता से जांचे जाएंगे। अवैध मैरिज गार्डन को भी नोटिस दिए जाएंगे। आज सीएम को ज्ञापन… राहत नहीं तो भोपाल बंद की चेतावनी भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष गोविंद गोयल ने कहा कि शहर में 50 से 60 साल पुरानी दुकानें हैं। सरकार ने इन्हें जीएसटी नंबर, गुमाश्ता लाइसेंस और कमर्शियल बिजली कनेक्शन दिए हैं। अब सीलिंग से कारोबार, बैंक लोन और कर्मचारियों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी। व्यापारियों ने मिक्स्ड लैंड यूज और जोन-वाइज प्लानिंग के जरिए समाधान की मांग की है। मंगलवार सुबह 11 बजे नानके पेट्रोल पंप पर जुटकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन देंगे। राहत नहीं मिलने पर ‘भोपाल बंद’ और आंदोलन की चेतावनी दी है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने भी बड़े रसूखदारों को छोड़कर छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाई जाएगी।
