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गैंगस्टर लॉरेंस को अमेरिका ले जाएगी FBI:गोल्डी बराड़ पर ₹50 हजार डॉलर इनाम; पहली बार दावा- इन्होंने कनाडा में निज्जर की हत्या कराई

अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने भारत की जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया को अमेरिका ले जाएगी। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों को वहां ट्रायल के लिए लाने हेतु प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके लिए जल्द भारत सरकार से इनकी मांग की जाएगी। अधिकारियों ने ये बातें अमेरिका, कनाडा और यूरोप में भारत से जुड़े इंटरनेशनल क्राइम नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई के बाद कहीं। जिसमें 24 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कुल 37 लोगों के खिलाफ अमेरिकी फेडरल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। चार्जशीट में लॉरेंस, गोल्डी बराड़, रोहित गोदारा समेत अन्य आरोपियों पर 2023 में कनाडा में हुई हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। पहली बार लॉरेंस का नाम इस हत्याकांड से जोड़ा गया है। चार्जशीट में दावा किया गया है कि लॉरेंस भारत की जेल में रहते हुए भी अपने नेटवर्क का संचालन करता था और उसके सहयोगी अमेरिका, कनाडा तथा यूरोप में ड्रग तस्करी, रंगदारी और टारगेट किलिंग जैसी वारदातों को अंजाम देते थे। इसके अलावा इसमें पंजाब पुलिस के एक अफसर हुंदलप्रीत सिंह का भी नाम इसमें आया है। उसे भी अमेरिकी अधिकारियों ने प्रत्यर्पित कर ले जाने की बात कही है। वहीं FBI ने गोल्डी बराड़ पर 50 हजार डॉलर का इनाम घोषित किया है। इन पर लगाए आरोप सही साबित हुए तो अलग-अलग आरोपों में इन्हें 10 साल से भी अधिक सजा हो सकती है। FBI के कार्रवाई के बाद 8 खुलासे…. 1. कई साल की जांच के बाद 50 से ज्यादा ठिकानों पर रेड
अमेरिकी फेडरल एजेंसियों ने बताया कि इंडिया बेस्ड ट्रांसनेशनल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम नेटवर्क की कई वर्षों से इंटरकॉन्टिनेंटल जांच चल रही थी। इसके तहत अमेरिका, कनाडा और यूरोप में 50 से ज्यादा ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। पूरे मामले में 37 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। इनमें 24 आरोपी गिरफ्तार या पहले से हिरासत में हैं, जबकि बाकी की तलाश जारी है। कार्रवाई में करीब एक टन (1000 किलोग्राम) कोकीन, दर्जनों हथियार, नकदी और डिजिटल सबूत भी जब्त किए गए। 2. तीन गैंग, एक इंटरनेशनल क्राइम नेटवर्क
अमेरिकी जांच एजेंसियों के मुताबिक कार्रवाई सिर्फ एक गैंग के खिलाफ नहीं, बल्कि तीन इंडिया बेस्ड संगठित अपराध नेटवर्क पर हुई। भारत की जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस को नेटवर्क का हेड बताया गया है। नॉर्थ अमेरिका में ऑपरेशन गोल्डी बराड़ संभाल रहा था, जबकि यूरोप में रोहित गोदारा सक्रिय था। आरोप पत्र में जग्गू भगवानपुरिया और अमृतपाल बाठ के नेटवर्क का भी जिक्र किया गया है। एजेंसियों का दावा है कि ये गिरोह अलग-अलग देशों में समन्वय के साथ काम करते रहे। 3. भारत समेत 7 देशों तक फैला नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार इस नेटवर्क के तार भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, पुर्तगाल, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक फैले थे। गिरोह ड्रग्स की तस्करी, रंगदारी, टारगेट किलिंग, हथियारों की सप्लाई और अन्य संगठित अपराधों को कई देशों में अंजाम देता था। 4. मैक्सिकन कार्टेल से कोकीन, हवाला-क्रिप्टो से पैसों का खेल
अमेरिका के न्याय विभाग (DOJ) के मुताबिक नेटवर्क मैक्सिकन ड्रग कार्टेल से कोकीन खरीदकर अमेरिका और कनाडा तक पहुंचाता था। कारोबारी और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों से धमकी देकर रंगदारी वसूली जाती थी। इसके बाद रकम हवाला, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य वित्तीय नेटवर्क के जरिए अलग-अलग देशों में ट्रांसफर की जाती थी। 5. पंजाब के पुलिस अधिकारी का भी नाम, 4 लाख डॉलर की रंगदारी का आरोप
अमेरिकी चार्जशीट में दावा किया गया है कि नेटवर्क ने भारत में मौजूद कुछ भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों का भी इस्तेमाल किया। इसमें पंजाब पुलिस से जुड़े हुंदलप्रीत सिंह नाम के अधिकारी का जिक्र करते हुए आरोप लगाया गया कि कैलिफोर्निया में रहने वाले एक व्यक्ति से 4 लाख अमेरिकी डॉलर की फिरौती मांगने के लिए उसका इस्तेमाल किया गया। पीड़ित को धमकी दी गई थी कि रकम नहीं देने पर पंजाब में रह रहे उसके परिवार को नुकसान पहुंचाया जाएगा। हालांकि यह अमेरिकी जांच एजेंसियों का आरोप है। इस पर पंजाब पुलिस का अभी कोई रिएक्शन नहीं है। 6. निज्जर हत्याकांड भी चार्जशीट का हिस्सा
अमेरिकी एजेंसियों ने ने आरोप लगाया है कि 2023 में कनाडा में खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की साजिश में लॉरेंस और गोल्डी बराड़ की भूमिका थी। यह पहली बार है, जब लॉरेंस का नाम निज्जर हत्याकांड में जोड़ा गया हो। इससे पहले सिख कट्‌टरपंथी संगठन उस पर शक जरूर जताते आए हैं। हालांकि अमेरिकी आरोप पत्र में भारत सरकार की किसी भूमिका का आरोप नहीं लगाया गया है। 7. RICO समेत सख्त कानूनों में केस दर्ज
अमेरिकी एजेंसियों ने आरोपियों पर हत्या, हत्या की साजिश, ड्रग तस्करी, हथियारों की तस्करी, रंगदारी, मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध से जुड़े आरोप लगाए हैं। इनके खिलाफ अमेरिका के सबसे सख्त संगठित अपराध कानून रैकेटियर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गेनाइजेशंस एक्ट (RICO) समेत कई धाराओं में कार्रवाई की गई है। 8. FBI, DEA, RCMP समेत कई एजेंसियों का संयुक्त ऑपरेशन
इस कार्रवाई में सिर्फ FBI ही नहीं, बल्कि अमेरिका की ड्रग्स और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने वाली फेडरल एजेंसी (DEA), होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की आपराधिक जांच एजेंसी (HSI), हथियार, विस्फोटक और संबंधित संगठित अपराधों की जांच करने वाली फेडरल एजेंसी (ATF), मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स फ्रॉड और वित्तीय अपराधों की जांच करने वाली कर विभाग (IRS) की आपराधिक जांच शाखा (IRS-CI) समेत कई फेडरल एजेंसियां शामिल थीं। इनके अलावा देशभर में संघीय स्तर के अपराधों की जांच कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) भी शामिल रहीं। कनाडा ने इस अभियान को ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ नाम दिया। अधिकारियों के मुताबिक, हाल के वर्षों में इंडिया बेस्ड संगठित अपराध नेटवर्क के खिलाफ यह सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय अभियानों में से एक है। अब नजर इस बात पर है कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद भारत सरकार और भारतीय जांच एजेंसियां आगे क्या कदम उठाती हैं। लॉरेंस को अमेरिका ले जाने में आगे क्या होगा? क्या कभी किसी को भारत से प्रत्यर्पित किया गया?
इसका जवाब है हां, गणेश शेनॉय नाम के व्यक्ति को साल 2025 में लगभग 20 साल पुराने सड़क हादसे में मौत के मामले में भारत ने उसे अमेरिका प्रत्यर्पित किया। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद भारतीय अदालतों और सरकार ने प्रत्यर्पण मंजूर किया। गणेश शेनॉय 2005 में अमेरिका में सड़क हादसे के बाद भारत भाग आया था। वह करीब 20 साल तक भारत में रहा और अमेरिकी प्रत्यर्पण अनुरोध के खिलाफ भारतीय अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ता रहा। सभी कानूनी विकल्प खत्म होने के बाद भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दी। इसके बाद सितंबर 2025 में उसे भारत से अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया, जहां उस पर मुकदमा चला। जिन गैंगस्टरों का नाम, उनके बारे में जानिए

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