आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से बुधवार, 15 जुलाई से गुप्त नवरात्र की शुरुआत हो गई। इस बार गुप्त नवरात्र पुष्य नक्षत्र, हर्षल योग और कर्क राशि के चंद्रमा की साक्षी में बन रहे गजकेसरी योग में प्रारंभ हो रहे हैं, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। मध्यप्रदेश के उज्जैन, नलखेड़ा और दतिया में 9 दिनों तक तांत्रिक साधकों का विशेष जमावड़ा रहेगा। उज्जैन के चक्रतीर्थ और ओखलेश्वर श्मशान, विक्रांत भैरव मंदिर, भैरवगढ़, नलखेड़ा के मां बगलामुखी मंदिर तथा दतिया के मां पीतांबरा पीठ में देशभर से साधक तंत्र साधना के लिए पहुंचेंगे। वहीं, 51 शक्तिपीठों में शामिल उज्जैन के हरसिद्धि मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए आएंगे। साल में चार नवरात्र, दो गुप्त और दो प्रकट ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में वर्ष भर में चार नवरात्र बताए गए हैं। इनमें आषाढ़ और माघ मास के नवरात्र गुप्त, जबकि चैत्र और अश्विन मास के नवरात्र प्रकट नवरात्र कहलाते हैं। गुप्त नवरात्र विशेष रूप से साधना, उपासना और गुप्त विद्याओं की सिद्धि के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। साधक अपने संकल्प के अनुसार विभिन्न प्रकार की साधनाएं करते हैं। दो सर्वार्थ सिद्धि और तीन रवि योग का संयोग गुप्त नवरात्र के दौरान दो सर्वार्थ सिद्धि योग और तीन रवि योग बनेंगे। शास्त्रों के अनुसार इन योगों में नए कार्यों की शुरुआत, बैंकिंग, टेक्नोलॉजी, ऑफिस शिफ्टिंग, व्यवसाय विस्तार और अन्य शुभ कार्य करना लाभकारी माना जाता है। 22 जुलाई को गुप्त नवरात्र का समापन होगा। इसी दिन भड्डली नवमी भी रहेगी, जिसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है। हालांकि गुरु तारा अस्त होने के कारण विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे। वैदिक और अघोर तंत्र की अलग-अलग परंपरा पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार तंत्र साधना मुख्य रूप से दो प्रकार की वैदिक तंत्र और अघोर तंत्र होती है। वैदिक तंत्र के साधक गुरु एवं कुल परंपरा के अनुसार साधना करते हैं, जबकि अघोर पंथ के साधक श्मशान में साधना करते हैं। रात 12 से सुबह 4 बजे तक होती है तंत्र साधना गुप्त नवरात्र में श्मशानों में तंत्र साधना मध्यरात्रि 12 बजे से सुबह 4 बजे तक की जाती है। इसे निशांत वेला और ब्रह्म मुहूर्त की साधना माना जाता है। पंडित डिब्बेवाला के अनुसार तंत्र क्रियाएं राष्ट्र कल्याण, प्रकृति संतुलन, आत्मकल्याण, संकटों से मुक्ति और मानव कल्याण के उद्देश्य से की जाती हैं। किसी के अहित के लिए की गई साधना सफल नहीं मानी जाती। सामान्य भक्त भी कर सकते हैं विशेष उपासना जो लोग तंत्र साधना नहीं करते, वे भी गुप्त नवरात्र में माता दुर्गा की उपासना कर सकते हैं। दुर्गा सप्तशती, दुर्गा कवच, रात्रि सूक्त तथा देवी मंत्रों का पाठ कर सामान्य श्रद्धालु भी माता की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। उज्जैन में होती है दस महाविद्याओं की साधना तांत्रिक भय्यू महाराज के अनुसार गुप्त नवरात्र विशेष रूप से तांत्रिक साधना के लिए होती है। उज्जैन के चक्रतीर्थ और ओखलेश्वर श्मशान, गढ़कालिका, हरसिद्धि और महाकाल क्षेत्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। शिव और शक्ति की संयुक्त उपस्थिति के कारण उज्जैन को सिद्धि प्राप्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां साधक व्यापार वृद्धि, बाधा निवारण और विभिन्न प्रकार की सिद्धियों के लिए नौ दिनों तक साधना करते हैं। तंत्र साधना में इन सामग्रियों का होता है उपयोग तंत्र साधना में आम की लकड़ी, काले तिल, लौंग, गुग्गुल, लोबान, कपूर, शुद्ध देसी घी, रुद्राक्ष, स्फटिक, हकीक या काले मूंगे की माला, काली हल्दी की माला, अष्टगंध, भोजपत्र, चौमुखा दीपक, कलश, नारियल, लाल चुनरी, गंगाजल, देवी यंत्र एवं महाविद्या की प्रतिमा, लाल या काले रंग का आसन सहित अन्य पूजन सामग्री का उपयोग किया जाता है। साधना का क्रम प्रतिदिन रात 12 बजे से सुबह 4 बजे तक चलता है। यह खबर भी पढ़ें… गुप्त नवरात्र में 12 साल बाद दुर्लभ संयोग 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में शयन करने चले जाते हैं। इसी वजह से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत और अन्य मांगलिक कार्य अगले चार माह तक नहीं किए जाएंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
