मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि कैसे एक सुरक्षित जेल कॉलोनी में सहायक जेलर की बेटी का शव सेप्टिक टैंक में मिला था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला था कि रेप के बाद उसकी हत्या की गई थी। सबसे बड़ा सवाल था कि टीना के साथ यह वारदात किसने की। अब पढ़िए उस जांच की कहानी, जिसने कातिलों का पर्दाफाश किया। 21 फरवरी 1996 की सुबह जांच शुरू होते ही पुलिस ने पड़ोसियों से पूछताछ की। यहीं से पहला सुराग मिला। पड़ोस में रहने वाली प्राची (नाम परिवर्तित) और उसकी मां ने बताया कि 20 फरवरी की सुबह करीब 11 बजे उन्होंने तेज चीख सुनी थी। बाहर निकलने पर सब सामान्य दिखा। संतोष और मोलाई बगीचे में काम कर रहे थे और पास के मैदान में लड़के क्रिकेट खेल रहे थे। क्राइम फाइल्स पार्ट-2 में पढ़िए आगे के कहानी… सेप्टिक टैंक से निकली साइकिल, टूट गया झूठ पुलिस को जांच की ठोस दिशा मिल चुकी थी। आरोपियों के बयानों में विरोधाभास था। हिरासत में कड़ी पूछताछ के दौरान संतोष ने जुर्म कबूल कर लिया और पुलिस को उस जगह ले गया जहां उसने सबूत छिपाया था। उसकी निशानदेही पर सेप्टिक टैंक से टीना की साइकिल बरामद हुई। इससे प्राची की गवाही की पुष्टि हुई और साफ हो गया कि आरोपी झूठ बोल रहे थे। दरिंदगी के वैज्ञानिक साक्ष्य पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच ने हत्याकांड की वीभत्सता उजागर कर दी। टीना के कपड़ों और बिस्तर की चादर पर मानव रक्त और स्पर्म के निशान मिले, जिससे बलात्कार की पुष्टि हुई। टीना ने जान बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था। उसके गालों पर दांतों से काटने के निशान और शरीर पर हाथापाई के स्पष्ट संकेत थे। बलात्कार के बाद उसका गला घोंटा गया और फिर चाकू से पेट पर वार किए गए। सबूत मिटाने की नाकाम कोशिश जांच में सामने आया कि मोलाई और संतोष ने अपराध के बाद सबूत मिटाने की कोशिश की थी। उन्होंने टीना का शव सेप्टिक टैंक में फेंका, कमरे में फैला खून साफ किया और खून से सने कपड़े व चादर को घर के एक कमरे में रखे भूसे के ढेर में छिपा दिया। वह एक ‘अंडरवियर’ जिसने फांसी के फंदे तक पहुंचाया इस केस में सबसे बड़ा वैज्ञानिक सबूत एक फटा हुआ कपड़ा बना। टीना का गला जिस कपड़े से घोंटा गया था, वह अंडरवियर का हिस्सा था। फॉरेंसिक लैब (FSL) की जांच में साबित हुआ कि मोलाई की निशानदेही पर बरामद कपड़े का टुकड़ा और टीना के गले में लिपटा कपड़ा एक ही अंडरवियर के दो हिस्से थे। इस अकाट्य सबूत ने आरोपियों के बचने के रास्ते बंद कर दिए। अदालत का फैसला: ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ केस मामला अदालत पहुंचा। अभियोजन पक्ष ने गवाहों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और बरामदगी के आधार पर मजबूत केस पेश किया। अदालत ने माना कि आरोपियों ने न केवल एक नाबालिग की हत्या की, बल्कि परिवार के भरोसे को भी तोड़ा। 18 फरवरी 1997 को सत्र न्यायालय ने दोनों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। बाद में हाईकोर्ट ने भी फैसला बरकरार रखा और इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ अपराध माना। क्राइम फाइल्स का पार्ट-1 भी पढ़िए… रेप कर सेप्टिक टैंक में डाला था शव:सहायक जेलर की बेटी से पुलिस कॉलोनी में वारदात मध्य प्रदेश की एक सुरक्षित मानी जाने वाली सेंट्रल जेल कॉलोनी, एक जिम्मेदार जेल अधिकारी का घर और उनकी 16 साल की मासूम बेटी। किसी ने सोचा भी नहीं था कि जिस जगह पर कानून के रखवाले रहते हैं, वहीं एक ऐसा जघन्य अपराध होगा जो पूरे प्रदेश की रूह कंपा देगा। पढ़ें पूरी खबर…
