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खेत बेचकर 50 लाख में बनाया घर टूटा:PM आवास भी ढहा, एग्जाम के दिन मलबे में दबीं किताबें, उजड़े परिवारों की 5 कहानियां

विरोध के बीच नकटी गांव के 80 से अधिक घरों पर प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया। इन्हें नवा रायपुर के सेक्टर 30 में अस्थायी तौर पर ईडब्ल्यूएस आवास अलॉट किए गए, लेकिन कहानी यहीं पर खत्म नहीं होती। इस कार्रवाई ने कई परिवारों के सपने और उम्मीदों को भी दफन कर दिया है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल से गांव वालों को आश्वासन मिला था कि बरसात तक कोई कार्रवाई नहीं होगी। ऐसे में उन्हें उम्मीद थी कि कुछ वक्त और मिल जाएगा, जिससे वे अपने लिए कोई बेहतर विकल्प तलाश सकें। हालांकि वक्त मिला नहीं। तोड़े गए घरों में प्रधानमंत्री आवास भी शामिल हैं। कई परिवारों ने खेत बेचकर घर बनवाए थे। घर चला गया लेकिन कर्ज अब तक चुका नहीं है। कुछ बच्चों के आज एग्जाम हैं लेकिन किताबें मकान के मलबे में दब चुकी हैं। बच्चे गांव से सटे कुछ दूरी पर सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। लेकिन सरकार ने उन्हें 20 किलोमीटर दूर घर दिया है। उनकी चिंता यह है कि वे अब स्कूल कैसे पहुंचेंगे। पढ़िए इस ग्राउंड रिपोर्ट में कि कैसे गांव के युवा बागी बनने की बात कर रहे हैं, और कैसे गोद में बच्चों को लिए माताएं सरकार और उसके अफसरों को कोस रही हैं। पहले देखिए ये तस्वीरें… 1. खेत बेचकर 50 लाख में बनवाया था घर प्रशासन की कार्रवाई के बीच जब भास्कर की टीम ग्राउंड पर पहुंची तो लोगों के सामान को मवेशी वाहनों में लादा जा रहा था। लाउडस्पीकर पर लगातार अनाउंसमेंट हो रहा था कि लोग जगह खाली कर दें और अपने-अपने सामान की शिनाख्त करें। लेकिन अपने सामान की फिक्र छोड़ लोग बस एक टक अपने तोड़े जा रहे घरों की ओर देख रहे थे। जैसे ही बुलडोजर का वार घरों पर होता, उनकी आंखों से आंसू और मुंह से सरकार के लिए गालियां निकलने लगतीं। ऐसे ही एक टूट रहे मकान के सामने लाल साड़ी में एक महिला बैठी हुई थी। दोनों हाथ सिर पर थे। ये महिला लगातार कुछ बड़बड़ा रही थी। हमने बात की तो महिला ने अपना नाम सती साहू बताया। सालों की जमा-पूंजी गई, घर भी गया सती साहू ने पहले बात करने से इनकार किया, लेकिन फिर उन्होंने दबी आवाज में कहा जिस मकान को प्रशासन ने तोड़ा है, वह मेरे ससुर के पिता के नाम पर था। हमने अपनी खेती की जमीन बेचकर 50 लाख रुपए की लागत से दो मकान बनवाए थे। मेरे पति मिस्त्री का काम करते हैं और पूरे परिवार ने सालों की जमा-पूंजी लगाकर यह घर खड़ा किया था। हमारे परिवार में करीब 20 सदस्य हैं। घर बनाने के लिए हमने अपनी खेती की जमीन तक बेच दी। अब न खेती बची है, न जमा-पूंजी। जीवनभर की कमाई और मेहनत से बनाया गया घर टूट गया, जिससे पूरा परिवार बेघर हो गया है। 2. एग्जाम से पहले मलबे में दबी किताबें यहीं से थोड़ी दूर हमें रोने और चीखने की आवाज आई। आवाज को फॉलो करते हुए हम मौके पर पहुंचे तो देखा कि एक 18-19 साल की लड़की बेतहाशा रो रही है। आसपास के लोग उसे संभालने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उस पर लोगों की बातों का कोई असर नहीं हो रहा। अचानक रोते हुए वह जमीन पर गिर गई। ऐसा लगता है लड़की को किसी बात का गहरा सदमा लगा हो। हम लड़की के नजदीक गए, उससे बात करने की कोशिश की लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। बगल में बैठे भाई ने कहा अभी उससे बात मत करिए, वह ठीक नहीं है। भाई ने आगे बताया लड़की, यानी उसकी बहन का नाम हीरा साहू है। वह बीएससी की छात्रा है। उसके सेमेस्टर एग्जाम चल रहे हैं। किताबें घर के मलबे में दब गई हैं। मलबे में दब गए सपने हीरा साहू का घर पूरी तरह ढह चुका है और उसके साथ ही उसके सपने भी मानो मलबे में दब गए हैं। बुलडोजर की कार्रवाई के बाद वह लगातार रोती रही। सदमे में उसकी हालत ऐसी थी कि ठीक से बात तक नहीं कर पा रही थी। वहीं बगल में बैठी हीरा की रिश्तेदार कहती हैं, ‘सरकार कहती है, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, लेकिन घर तो बर्बाद हो गया है। अब ऐसी स्थिति में बेटी कहां से पढ़ेगी? बच्चे कहते थे कि पढ़-लिखकर कुछ अच्छा काम करेंगे, डॉक्टर और पुलिस बनेंगे। लेकिन अब बच्चों का भविष्य बिगड़ गया है। सब बर्बाद हो गया। अब बोलने से भी कोई मतलब नहीं है। कुछ नहीं हो सकता। 3. प्रधानमंत्री आवास को भी तोड़ा गया टूट रहे मकान के सामने खड़ी होकर एक महिला कर्कश आवाज में सरकार और प्रशासन को जोरों से गालियां दे रही थीं। महिला के साथ खड़े लोगों ने बताया कि इनका नाम धनेश्वरी यादव है। मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बना था। अपना मकान बचाने के लिए वे प्रशासन के लोगों से भिड़ गईं, लेकिन घर को टूटने से नहीं रोक पाई। धनेश्वरी यादव ने कहा 30 साल से हमारा परिवार यहां रह रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए स्वीकृति मिली थी। यह आवास मेरे ससुर किशन यादव के नाम पर स्वीकृत हुआ था, जिसके लिए 1 लाख 20 हजार रुपए की सहायता राशि मिली। लेकिन इतनी राशि में घर बनना संभव नहीं था, इसलिए मैंने 3 लाख रुपए कर्ज लेकर मकान बनवाया था। उसकी किस्तें आज तक पूरी तरह नहीं चुका पाई हूं। सरकार कह रही है कि यह जमीन अवैध कब्जे वाली थी, तो फिर इसी जमीन पर प्रधानमंत्री आवास कैसे स्वीकृत कर दिया गया? यदि यह भूमि पहले से ही गांव की चारागाह थी, तो अब इसे शासकीय भूमि बताकर हमें नोटिस क्यों दिया गया? बिजली, पानी , नल सारी सुविधा दी गई तो ये कैसे अवैध हो गया। किशन यादव की पत्नी धनेश्वरी यादव की सास कहती हैं, हम गरीब कर्जा लेकर घर बनाए हैं। पहले खप्पर वाला घर था। हम उसी में रह लेते। प्रधानमंत्री आवास देने के बाद हमारा घर क्यों तोड़ा गया? अब हमारा परिवार कहां जाएगा? 4. 20 किलोमीटर दूर स्कूल कैसें जाएंगे इस तोड़फोड़ में नेहा साहू का भी घर टूट चुका है। अब उसे अपने भविष्य की चिंता है। घर का सामान बाहर है और उसे अपने भविष्य की चिंता है। नेहा साहू ने बताया, मैं कक्षा 11वीं की छात्रा हूं। मेरा स्कूल फुंडहर में है और मैं रोज गांव से स्कूल आना-जाना करती हूं। हमें जानकारी मिली है कि घर तोड़ने के बाद अब हमें नया रायपुर के सेक्टर-30 में शिफ्ट किया जा रहा है। ऐसे में मेरी पढ़ाई कैसे होगी? मैं रोज स्कूल कैसे आ-जा पाऊंगी? मेरे परिवार में पांच सदस्य हैं। प्रशासन ने घर का सारा सामान बाहर निकालकर घर पर बुलडोजर चला दिया है। किताबें और हमारा सामान कहां है, हमें इसकी भी जानकारी नहीं है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब नई जगह से स्कूल कैसे जाऊंगी और पढ़ाई कैसे जारी रख पाऊंगी। यहां से दूरी 20 किलोमीटर आना-जाना कैसे करेंगे। सारा मामला शांत होने के बाद एक बार फिर लोगों में आक्रोश देखने को मिला। जब उन्हें शिफ्ट किया जा रहा था उसी दौरान एक परिवार की महिलाएं प्रशासन को कोसते हुए दिखाई दीं और वहां बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद था। यहां मौजूद महिलाओं ने क्या कहा जानिए। 5. घर में 23 सदस्य, मिला सिर्फ 1 EWS मकान पुष्पा साहू ने बताया, ‘हमारे परिवार में करीब 23 सदस्य हैं और हम पिछले लगभग 40 साल से यहां रह रहे हैं। मेरे ससुर पंचू साहू के परिवार को सिर्फ एक ही मकान आवंटित किया गया है। प्रशासन का कहना है कि जिस घर पर नोटिस चस्पा किया गया था, उसी परिवार को मकान मिलेगा। लेकिन एक ही घर में 23 लोग कैसे रह सकते हैं? पुष्पा ने बताया कि जो EWS मकान मिला है, उसमें फिलहाल परिवार के पुरुष सदस्य रुके हुए हैं, जबकि परिवार की महिलाएं अभी भी गांव की बस्ती में अपने रिश्तेदारों के घरों में रहने को मजबूर हैं। पहले परिवार के लोग अलग-अलग कमरों में रह रहे थे, लेकिन अब प्रशासन कह रहा है कि अलग-अलग मकान नहीं दिए जाएंगे। ………………… इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… नकटी गांव के विस्थापितों की खुले आसमान में कटी रात: लोग बोले- सुबह 4 बजे बिजली काटकर बुलडोजर चलाया, सांसद ने भी झूठ बोला नकटी गांव में तोड़े गए 80 घर: बच्ची बोली- सुबह से कुछ नहीं खाया, महिलाएं रोईं, पुलिस से धक्का-मुक्की, नया रायपुर में मिलेंगे मकान

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