ग्वालियर में सीनियर चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय से यूएसडीटी (USDT) में निवेश के नाम पर 21.06 करोड़ रुपए की ठगी के मामले में साइबर पुलिस की नजर अब उन दो हजार बैंक खातों पर है, जिनमें ट्रांजेक्शन हुए हैं। ये सभी म्यूल अकाउंट हैं, जिन्हें किराए पर लिया गया था। हर ट्रांजेक्शन पर ठगी गई रकम का 8 प्रतिशत कमीशन एजेंट को देने के बाद राशि दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी। यह म्यूल अकाउंट्स की ऐसी चेन है, जिसके एक सिरे तक तो पुलिस पहुंच जाती है, लेकिन दूसरे छोर तक नहीं पहुंच पा रही है। राज्य साइबर सेल, ग्वालियर जोन की टीम देश के 10 से अधिक राज्यों में डेरा डाले हुए है। साइबर पुलिस इस मामले में जल्द बड़ा खुलासा कर सकती है। जिन खातों में लाखों रुपए ट्रांसफर हुए हैं, फिलहाल टीम की नजर उन्हीं पर है। शहर के प्रतिष्ठित 70 वर्षीय सीनियर चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) अशोक विजयवर्गीय से हुई 21 करोड़ 6 लाख रुपए की ठगी ने देश के साइबर इन्वेस्टिगेशन सिस्टम को झकझोर दिया है। राज्य साइबर सेल, ग्वालियर जोन की शुरुआती तकनीकी जांच में सामने आया है कि ठगों ने इस वारदात में दो हजार से अधिक म्यूल खातों में रकम का ट्रांजेक्शन किया। यही खाते अब साइबर सेल के रडार पर हैं। हालांकि, ट्रांजेक्शन देश के लगभग हर राज्य में हुए हैं। ऐसे में आरोपियों तक पहुंचना किसी समुद्र में सुई खोजने जैसा है। फिलहाल दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, हरियाणा, मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश समेत 10 राज्यों में साइबर पुलिस की टीमें आरोपियों की घेराबंदी में जुटी हैं। देश के हर कोने में हुआ ट्रांजेक्शन साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ठगों ने 21 करोड़ रुपए की रकम को खपाने के लिए देशभर के बैंकों का इस्तेमाल किया। चेन्नई से लेकर कश्मीर तक और गुजरात से लेकर कोलकाता तक हजारों बैंक खातों में हजारों ट्रांजेक्शन किए गए। फिलहाल साइबर टीम की नजर उन बड़े बैंक खातों पर है, जिनमें सबसे अधिक रकम ट्रांसफर की गई। ठगों का ‘फोर-लेयर’ चक्रव्यूह: ऐसे खपाई गई ठगी की रकम सायबर एक्सपर्ट्स और जांच अधिकारियों के अनुसार, ठगों ने इस पूरी राशि को पुलिस की पकड़ से दूर रखने के लिए एक जटिल ‘फोर-लेयर’ (चार स्तरीय) बैंकिंग नेटवर्क का इस्तेमाल किया। इंटरनेशनल रैकेट के सुराग, विदेशी नंबरों की जांच शिकायत के मुताबिक, रोशनी घर रोड निवासी पीड़ित सीनियर सीए अशोक विजयवर्गीय से ठगी के लिए भारतीय नंबरों (+91-8151931249 व +91-7092164831) के अलावा एक विदेशी नंबर +1 (516) 713-7291 का भी उपयोग किया गया है, जो किसी अमेरिकी या कनाडाई वर्चुअल नंबर प्लेटफॉर्म से संचालित हो रहा था। ठगों ने फेडरल बैंक, आईसीआईसीआई, केनरा बैंक और यस बैंक जैसी प्रमुख संस्थाओं के कॉपोरेट व करंट खातों का इस्तेमाल लेयरिंग के लिए किया है। ऐसे समझिए पूरा मामला राज्य साइबर सेल को दी गई आधिकारिक शिकायत के अनुसार, रोशनी घर रोड निवासी सीनियर सीए व चेंबर चुनाव के मुख्य निर्वाचन अधिकारी 70 वर्षीय अशोक विजयवर्गीय के साथ ठगी की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई थी। अशोक के मोबाइल पर एक अनजान भारतीय नंबर (+91-8151931249) से मैसेज आया। मैसेज करने वाली महिला ने खुद का नाम ‘दिव्या सिंह’ बताया और खुद को एक बड़ी निवेश सलाहकार के रूप में परिचय दिया। दिव्या ने दावा किया कि यदि वे यूएसडीटी (USDT) क्रिप्टो ट्रेडिंग में पैसा लगाते हैं, तो उन्हें उम्मीद से कई गुना ज्यादा मुनाफा होगा। इसके बाद बातचीत दूसरे नंबरों और फिर एक विदेशी नंबर (+1 (516) 713-7291) के जरिए होने लगी। ठगों ने अशोक को झांसा देकर एक फर्जी ट्रेडिंग पोर्टल के लिंक पर उनका रजिस्ट्रेशन करवा दिया। पहले कुछ लाख रुपए लगाए और मुनाफा हुआ। कैश निकाला भी गया। इसके बाद वह और उनके क्लाइंट पैसा लगाते चले गए। जुलाई 2026 में जब पोर्टल पर पीड़ित का कुल मुनाफा 33.25 करोड़ रुपए दिखाई देने लगा। जब निकालना चाहा तो ठगों ने 10 करोड़ रुपए की मांग की। इसके बाद सीए को ठगी का अहसास हो गया था। मामले की शिकायत साइबर सेल पहुंची और मामला दर्ज किया गया। इंस्पेक्टर मुकेश नारौलिया राज्य साइबर सेल ने बताया- “क्रिप्टो करेंसी (USDT) ट्रेडिंग के नाम पर वरिष्ठ सीए अशोक विजयवर्गीय से 21 करोड़ 6 लाख रुपए की देश की बड़ी ठगियों में से एक वारदात हुई है। इस राशि को देश भर के हजारों खातों में 4 लेयर के तहत ट्रांसफर किया गया है। हमारी तकनीकी टीम इन अकाउंट की डिटेल जुटाकर रैकेट के सदस्यों के पीछे लगी हुई है।
