Homeमध्यप्रदेशखजराना मंदिर पुजारी विवाद- पीड़िता बोलीं-केस वापस लेने का दबाव:पुजारी पर घरेलू...

खजराना मंदिर पुजारी विवाद- पीड़िता बोलीं-केस वापस लेने का दबाव:पुजारी पर घरेलू हिंसा के आरोप लगाए, कहा- न्याय की लड़ाई में मौत भी आ जाए तो मंजूर

इंदौर के खजराना गणेश मंदिर से जुड़े पुजारियों और उनके परिवार पर दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा, मानसिक उत्पीड़न और मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोप लगाने वाली डॉ. इंद्रा भट्ट (शर्मा) ने कहा है कि उन पर केस वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। पीड़िता का कहना है कि कई राजनीतिक और प्रभावशाली लोग, जिनमें कुछ पार्षद और आरएसएस से जुड़े लोग भी शामिल हैं, उनके घर आकर लगातार समझाइश और दबाव बना रहे हैं। महिला के अनुसार उनसे कहा जा रहा है कि सामने वाला परिवार काफी प्रतिष्ठित और रसूखदार है, इसलिए उन्हें यह लड़ाई छोड़ देनी चाहिए। महिला ने कहा, “लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या मुझे डर नहीं लगता, लेकिन अब डरने के लिए बचा ही क्या है। अगर न्याय की लड़ाई लड़ते हुए मौत भी आ जाए तो मुझे मंजूर है, लेकिन मैं पीछे नहीं हटूंगी।” एफआईआर दर्ज होने के करीब दो महीने बाद मंगलवार को महिला कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में भी पहुंची। उन्होंने अधिकारियों को आवेदन देकर मांग की कि मंदिर के पुजारी और उनके पति पुनीत भट्ट के गर्भगृह में प्रवेश पर रोक लगाई जाए। अब पढ़िए पीड़िता ने दैनिक भास्कर से बातचीत में क्या कहा… डॉ इंद्रा भट्ट ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा, मेरे द्वारा पति और उनके परिवार पर केस दर्ज कराने के बाद कई पार्षद और आरएएस से जुड़े लोग घर आकर केस खत्म करने का दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन लोगों ने मुझे समझाने या डराने की कोशिश की कि सामने वाले लोग बहुत रसूखदार हैं और उनके बड़े लोगों से संबंध हैं। मुझसे पूछा जाता है कि क्या मुझे डर नहीं लगता। लेकिन अब डरने के लिए बचा ही क्या है? अगर अपने न्याय के लिए लड़ते हुए मौत भी आ जाए तो मुझे स्वीकार है, लेकिन मैं अपने अधिकार और न्याय की लड़ाई से पीछे नहीं हटूंगी। महिला का कहना है कि मंदिर में रहकर पति और उनका परिवर वहां आने वाले अधिकारियों, नेताओं और प्रभावशाली लोगों के माध्यम से मामले को इंफ्यूलेंस करने का प्रयास कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश के केस का जिक्र कर कार्रवाई की मांग डॉ. इंद्रा का कहना है कि चूंकि पति पुनीत पर धारा 498 के तहत एफआईआर दर्ज हो चुकी है और घरेलू हिंसा का केस भी अभी लंबित है। इसके बावजूद उनके द्वारा गर्भगृह में प्रवेश कर मंदिर में पूजा-अर्चना की जा रही है। पीड़िता ने शिकायत में कहा कि खजराना गणेश मंदिर का संचालन मध्य प्रदेश श्री गणपति मंदिर खजराना (इंदौर) अधिनियम, 2003 के तहत होता है। ऐसे में जिन पुजारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, उन्हें जांच लंबित रहने तक पूजा कार्य और गर्भगृह से दूर रखा जाना चाहिए। महिला ने आंध्र प्रदेश के भद्रादी कोठागुडेम मंदिर में इसी प्रकार के एक मामले में का उल्लेख करते हुए कहा कि एक बहू द्वारा एफआईआर दर्ज कराने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए मुख्य पुजारी और उनके दत्तक पुत्र को सेवा से निलंबित कर दिया था। यह कार्रवाई ताडेपल्लीगुडेम टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर और बंदोबस्ती आयुक्त के निर्देशों के आधार पर की गई थी। इसी आधार पर महिला ने पुजारी पुनीत भट्ट को तत्काल प्रभाव से मंदिर व्यवस्था से उनके सभी अधिकार वापस लिए जाने और गर्भगृह में प्रवेश पर रोक लगए जाने की बात कही। सीता माता से लेकर आज तक महिलाओं के संघर्ष का दौर महिला ने कहा कि मेरे लिए सिर्फ एफआईआर या घरेलू हिंसा का केस दर्ज हो जाना न्याय नहीं है। न्याय तब होगा जब मुझे मेरे घर में वापस रहने का अधिकार मिलेगा। एक शादीशुदा महिला अगर अपने मायके में रहने को मजबूर हो जाए, तो वह किसी भी रूप में न्याय नहीं कहलाता। चाहे वह मैं हूं या फिर सीता माता, महिलाओं को हर दौर में संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन मैं अपने ऊपर लगाए गए झूठे आरोपों को स्वीकार करके पीछे हटने वाली नहीं हूं। मुझ पर लगाए गए सभी आरोप गलत हैं और मैं अंत तक अपने आपको निर्दोष साबित करने के लिए लड़ती रहूंगी। उन्होंने आगे कहा कि मैं सिर्फ इतना चाहती हूं कि मुझे तुरंत मेरे घर में वापस रहने दिया जाए, क्योंकि वह मेरा ससुराल है और मुझे वहां से निकालने से पहले कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। एक साजिश के तहत मुझे घर से बाहर कर दिया गया, ताले लगा दिए गए और अब स्थिति यह है कि मुझे अपने ही घर में वापस जाने के लिए कोर्ट ऑर्डर की जरूरत पड़ रही है। न्याय में देरी भी एक अन्याय महिला का कहना है कि न्याय में देरी भी एक प्रकार का अन्याय है। न्यायिक प्रक्रिया के अपने नियम और प्रोटोकॉल हैं, हजारों-लाखों मामले लंबित हैं, यह मैं समझती हूं। लेकिन जो पीड़िता होती है, वह हर दिन किस मानसिक स्थिति में जीती है, यह वही समझ सकती है। अगर पांच या दस साल बाद न्याय मिलता है, तब तक जिंदगी के कई महत्वपूर्ण साल संघर्ष में निकल जाते हैं। दक्षिणा के उपयोग में अनियमितताओं का आरोप महिला का आरोप है कि मंदिर परिसर में पुजारियों द्वारा अमर्यादित आचरण किया गया और श्रद्धालुओं द्वारा दी गई दक्षिणा के उपयोग को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इन आरोपों के समर्थन में वीडियो और अन्य दस्तावेज होने का दावा भी किया गया है। पीड़िता ने कहा कि यदि प्रशासन द्वारा उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वह समाज के लोगों के साथ मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग करेंगी। महिला थाने में भी दर्ज है प्रकरण महिला थाना इंदौर ने अप्रैल 2026 में पुनित भट्ट, प्रतिमा नागर, नवीन नागर, उदित भट्ट, कुमकुम भट्ट, सुमित भट्ट और विनित भट्ट के खिलाफ विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया था। इसके साथ ही घरेलू हिंसा से संबंधित प्रकरण भी कोर्ट में लंबित बताया है। 2025 में हुआ था विवाह डॉ. इंद्रा भट्ट का विवाह मई 2025 में पुजारी पुनित भट्ट से हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा दहेज की मांग, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की गई। मामले में महिला थाना इंदौर में पुनित भट्ट सहित परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना, मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी। समझौते के नाम पर मांगों का आरोप उधर, पुनीत भट्ट और उनके परिवार ने डॉ. इंद्रा द्वारा लगाए आरोपों को निराधार बताया। उनके एडवोकेट श्रवण बागोरा ने बताया कि सभी आरोप निराघार हैं। पुनीत का पहला विवाह ममता भट्ट से हुआ था, जिनका कोरोना काल के दौरान किडनी संबंधी बीमारी के उपचार के बीच निधन हो गया था। इसके बाद 2025 में पुनीत भट्ट ने इंद्रा शर्मा से दूसरा विवाह किया। विवाह के शुरुआती दिनों में संबंध सामान्य रहे, लेकिन बाद में पारिवारिक विवाद बढ़ने लगे। पुनीत पर अपने परिवार से अलग रहने का दबाव बनाया जाता था। ऐसा नहीं करने पर आत्महत्या जैसी धमकियां दी जाती थीं। परिवार ने यह भी दावा किया कि सितंबर 2025 में घर में हुए एक विवाद के बाद खजराना थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुजारी परिवार के मुताबिक उस घटनाक्रम के बाद वैवाहिक संबंधों में तनाव बढ़ने पर तलाक की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद महिला ने दहेज प्रताड़ना सहित अन्य आरोप लगाते हुए महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। परिवार का आरोप है कि समझौते और आपसी सहमति से तलाक के लिए बड़ी धनराशि तथा फ्लैट की मांग की जा रही है। मांगें पूरी नहीं होने पर विभिन्न मामलों में फंसाने और सामाजिक रूप से बदनाम करने की चेतावनी दिए जाने का भी दावा किया है। जांच के बाद कार्रवाई करेंगे अपर कलेक्टर रोशन राय ने कहा कि महिला ने एक शिकायती आवेदन डिप्टी कलेक्टर को सौंपा है। आवेदन में लगाए गए आरोपों और तथ्यों की जांच की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यह खबर भी पढ़ें… खजराना मंदिर के पुजारी की बहू के गंभीर आरोप:दहेज के लिए घर में किया कैद इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर के पुजारी परिवार का पारिवारिक विवाद अब सार्वजनिक हो गया है। मंदिर के पुजारी पुनीत भट्ट की दूसरी पत्नी इंदिरा भट्ट (शर्मा) ने अपने पति और ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना, मानसिक-शारीरिक उत्पीड़न, साजिश रचकर घर से निकालने और तलाक के लिए धमकाने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इंदिरा का कहना है कि घर से बाहर निकालने के लिए उनके पति पुनीत ने बकायदा ऑपरेशन एग्जिट चलाया। वहीं इंदिरा के इन आरोपों को पति पुनीत भट्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है। भास्कर ने इस हाई प्रोफाइल मामले में दोनों से बात कर पक्ष जानने की कोशिश की। पढ़ें पूरी खबर…

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here