मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। अजय सिंह बोले- चुनौती वाला होगा 2028 का चुनाव
एक तरफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी दावा कर रहे हैं कि 2028 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनेगी, तो दूसरी तरफ पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने आगामी विधानसभा चुनाव को कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बताया है। अजय सिंह ने कहा कि 2028 में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनाने के लिए हम लोगों के पास अंतिम मौका है। दरअसल, कांग्रेस विधायक अजय सिंह हरदा में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने खुलकर कहा कि हम भाजपा से नहीं हारते, बल्कि अपनों से ही हारते हैं। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर मौजूद गुटबाजी की स्वीकारोक्ति के तौर पर देखा जा रहा है। अजय सिंह ने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर संगठन को मजबूत करने और आपसी मतभेद भुलाने की अपील भी की। बता दें कि अजय सिंह इन दिनों प्रदेशभर का दौरा कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय करने, संगठन को मजबूत बनाने और बिखरे हुए कार्यकर्ताओं को जोड़ने के उद्देश्य से लगातार संवाद कर रहे हैं। खरी बात यह है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी मान रहे हैं कि पार्टी की सबसे बड़ी चुनौती भाजपा नहीं, बल्कि अंदरूनी खींचतान है। ऐसे में यदि गुटबाजी पर लगाम नहीं लगी, तो 2028 की राह कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगी। ट्रैफिक सिस्टम सुधारने सड़क पर उतरे भाजपा पार्षद
इंदौर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए भाजपा पार्षद मनीष मामा खुद सड़कों पर उतर गए। हालांकि उनका तरीका डांट-फटकार वाला नजर आया। वे यहां-वहां वाहन खड़े करने वालों को टायर पंचर करने की चेतावनी देते दिखाई दिए। पार्षद शहर के तीन इमली चौराहे पर यातायात व्यवस्था संभालते नजर आए। उन्होंने इसका वीडियो भी शेयर किया। उन्होंने लिखा- आमजन की सुविधा सर्वोपरि है। सड़क पर अव्यवस्थित खड़े वाहनों को हटाकर जाम की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में पहल जारी है। हालांकि, उनकी इस मुहिम को लेकर लोग चुटकी लेते नजर आए। कुछ लोगों ने कहा कि भाजपा पार्षद यह साबित करने में जुटे हैं कि या तो ट्रैफिक पुलिस नाकारा है, या फिर वह सत्ताधारी दल के नेताओं की भी नहीं सुन रही। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि यह अभियान कम और अभिनय ज्यादा लग रहा है। उनके मुताबिक, नेताजी ट्रैफिक सुधार से ज्यादा कैमरे के लिए सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। खरी बात यह है कि सड़क पर उतरकर व्यवस्था सुधारने की कोशिश सराहनीय हो सकती है, लेकिन जब जनप्रतिनिधि ट्रैफिक पुलिस की भूमिका निभाने लगें, तो सवाल व्यवस्था पर भी उठते हैं। ऐसे में चर्चा ट्रैफिक सुधार से ज्यादा इस बात की हो रही है कि यह प्रशासनिक पहल थी या फिर राजनीतिक प्रस्तुति। पेट्रोल और डीजल की बर्बादी, अधिकारी नहीं मान रहे
एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील कर रहे हैं, वहीं कुछ अधिकारी उनकी अपील की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। छतरपुर में ऐसा ही एक नजारा देखने को मिला। यहां एक नहीं, बल्कि तीन-तीन अधिकारियों की सरकारी गाड़ियां पार्किंग में घंटों तक स्टार्ट खड़ी रहीं और उनमें एसी चलता रहा। जिला नगरीय विकास अभिकरण के परियोजना अधिकारी, जल निगम के अधिकारी और एसडीएम की गाड़ियों में एसी चल रहा था, जबकि अंदर उनके ड्राइवर आराम फरमाते दिखाई दिए। जब उनसे पूछा गया कि इस तरह पेट्रोल-डीजल की बर्बादी क्यों की जा रही है, तो उनका जवाब था कि अधिकारी जब मीटिंग से लौटेंगे, तब तक गाड़ी ठंडी रहनी चाहिए। अब लोग इस पर तंज कस रहे हैं। कह रहे हैं कि अधिकारियों से अच्छे तो नेता हैं, जो कम से कम फोटो-वीडियो के लिए ही सही, प्रधानमंत्री की अपील का पालन करते दिखाई देते हैं। लेकिन अधिकारियों को कौन समझाए? कुछ लोग यह भी चुटकी ले रहे हैं कि क्या ईंधन बचाने की अपील सिर्फ आम जनता के लिए है? वीआईपी सुविधा और आराम में कोई कटौती नहीं होनी चाहिए क्या? बेटे की बैकडोर से एंट्री कराने की जुगाड़ में नेता जी
बात ऐसी है कि विरोधी दल के बोल-वचन विभाग में नई टीम बननी है। पार्टी ने दिल्ली से परीक्षक नियुक्त करके सरकारी भर्ती की तरह इंटरव्यू कॉल किए। लेकिन, यहां तो विंग के मुखिया ने बेटे की एंट्री के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। हुआ यूं कि पुराने प्रवक्ताओं के लिए इंटरव्यू में अलग से व्यवस्था बनाई गई थी। मुखिया जी ने अपने बेटे को पुराना प्रवक्ता बताकर इंटरव्यू प्रोसेस में शामिल करा दिया। मुखिया जी एक और प्रवक्ता को हाईलाइट करने के लिए कई पुराने और प्रतिभावान वर्कर्स को दबाने में जुटे हैं। जैसे ही लिस्ट जारी होगी, बवाल मचना तय है। इनपुट सहयोग – संदेश पारे (हरदा), राजेश चौरसिया (छतरपुर), विजय सिंह बघेल (भोपाल) ये भी पढ़ें –
मोदी-मोहन की तारीफ, विधायक बोले- बाकी सीएम नपुंसक थे: जीतू पटवारी का नया पंगा, ‘राधा-कृष्ण’ वाले दुपट्टे फेंके एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी नए विवाद में घिर गए हैं। दरअसल, उज्जैन में कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत राधा-कृष्ण की फोटो और ‘जय श्री राधे’ लिखे दुपट्टों से किया। पटवारी ने इन दुपट्टों को उतारकर साइड में फेंक दिया। यादव समाज ने इसे भगवान श्रीकृष्ण और सनातन परंपरा के प्रति अनादर बताते हुए आपत्ति जताई है। पूरी खबर पढ़ें
