ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी मंगलवार को भोपाल पहुंचे। उन्होंने सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के विरोध में जनसभा को संबोधित किया। सभा AIMIM के UCC विरोधी अभियान का हिस्सा थी। ओवैसी ने कहा कि मध्यप्रदेश में करीब 21% आदिवासियों को UCC से बाहर रखा गया है, जबकि मुसलमानों को इसमें शामिल किया गया है। उन्होंने सवाल किया कि जब आदिवासियों की अलग संस्कृति, परंपरा और धर्म के कारण उन्हें UCC से बाहर रखा गया है तो मुसलमानों को इसमें क्यों शामिल किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि UCC के जरिए RSS का एजेंडा चलाया जा रहा है। अधिकारों को खत्म कर कानून लागू नहीं हो सकता ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों के भी अपने धार्मिक कानून और पहचान हैं। उन्होंने UCC के जरिए हिंदू मैरिज एक्ट, हिंदू सक्सेशन एक्ट और अडॉप्शन एंड कस्टडी एक्ट जैसे कानून गैर-हिंदुओं पर लागू करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 का हवाला देते हुए कहा कि धर्म की स्वतंत्रता और अधिकारों को खत्म करके कानून लागू नहीं किया जा सकता। देखिए तस्वीरें एनडीए के सहयोगी दलों को भी करना चाहिए विरोध ओवैसी ने NDA के सहयोगी दलों से भी UCC का विरोध करने की अपील की। TDP, JDU, चिराग पासवान, एचडी कुमारस्वामी और जयंत चौधरी का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि अगर भाजपा से उनका वैचारिक अंतर अभी बाकी है तो उन्हें UCC का विरोध करना चाहिए। भाजपा विधायक रामेश्वर को दी चुनौती सभा में ओवैसी ने भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा पर भी निशाना साधा। शर्मा के काजी कैंप में मिसाइल लॉन्च करने वाले बयान का जिक्र करते हुए ओवैसी ने उन्हें काजी कैंप आने की चुनौती दी। उन्होंने काजी कैंप से जुड़े स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले कई लोगों के नाम भी गिनाए। सागर जहरीली शराब मामले में कार्रवाई की मांग ओवैसी ने भाजपा शासित राज्यों में मस्जिदों और कब्रिस्तानों को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया। वहीं, सागर जहरीली शराब मामले में मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग की। लव जिहाद के सवाल पर उन्होंने कहा कि दो बालिग अपनी इच्छा से शादी करना चाहते हैं तो उन्हें रोकने वाले सरकार या दूसरे लोग कौन होते हैं। सभा के दौरान ओवैसी ने सोवियत यूनियन का उदाहरण देते हुए भी RSS पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा मदरसे बंद किए जाने के बावजूद मुसलमानों ने अपने बच्चों को घरों में पढ़ाया। खबर के मिनट टु मिनट अपडेट के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए।
