सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में मरीज देवेंद्र पाठक की मौत के मामले में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही सामने आई है। जांच में पाया गया कि जिस एनेस्थीसिया इंजेक्शन का इस्तेमाल अगले दिन ऑपरेशन के दौरान मरीज को बेहोश करने के लिए किया जाना था, उसे ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने एक दिन पहले ही आईवी के जरिए लगा दिया। आरोप है कि इंजेक्शन लगाते समय नर्स ब्लूटूथ इयरफोन पर बात कर रही थी। कॉलेज प्रबंधन ने प्रारंभिक जांच के आधार पर नर्स शिखा पटले को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया है। वहीं, उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने पूरे मामले की जांच के आदेश देते हुए दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हाई-रिस्क इंजेक्शन से बिगड़ी थी हालत
देवेंद्र पाठक को गले में गांठ की शिकायत के बाद बीएमसी के ईएनटी विभाग में भर्ती कराया गया था। 13 जून को उनकी बायोप्सी होनी थी। इससे पहले 12 जून को अस्पताल स्टाफ ने परिजनों से ऑपरेशन के दौरान उपयोग होने वाला एट्राक्यूरियम बेसीलेट इंजेक्शन मंगवाया। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने यह इंजेक्शन उसी दिन मरीज को आईवी के जरिए लगा दिया। इंजेक्शन लगाते ही सांसें उखड़ने लगी परिजनों के मुताबिक, कुछ ही मिनटों में मरीज की सांसें उखड़ने लगीं और हार्टबीट रुक गई। डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिया और बाद में मरीज को वेंटिलेटर पर रखा। बीच में हालत में कुछ सुधार हुआ, लेकिन 23 जून की सुबह करीब साढ़े छह बजे उसकी मौत हो गई। पत्नी ने कहा- नर्स मोबाइल में व्यस्त थी मृतक की पत्नी रीता पाठक ने गोपालगंज थाने में शिकायत दर्ज कर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इंजेक्शन लगाते समय संबंधित नर्स मोबाइल फोन और ब्लूटूथ इयरफोन में व्यस्त थी, जिसके कारण इतनी बड़ी लापरवाही हुई। कॉलेज प्रबंधन बोला- जांच पूरी होने तक नर्स सस्पेंड
कॉलेज के मीडिया प्रभारी डॉ. विशाल भदकारिया ने बताया कि परिजनों की शिकायत और प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर नर्स शिखा पटले को निलंबित किया गया है। मृतक का पोस्टमॉर्टम कराया गया है। पुलिस और कॉलेज प्रशासन दोनों स्तर पर जांच जारी है। अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। एक्सपर्ट बोले- सिर्फ नर्स नहीं, सिस्टम की भी हो सकती है चूक
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विशेषज्ञ के अनुसार, यदि किसी दवा को लेकर नर्स को जरा भी संदेह हो तो डॉक्टर या वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी से पुष्टि किए बिना उसे मरीज को नहीं देना चाहिए। आधुनिक मरीज सुरक्षा व्यवस्था में इसे ‘स्टॉप एंड आस्क’ सिद्धांत कहा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल नर्स की गलती मान लेना पर्याप्त नहीं होगा। यह दवा वितरण, हाई-अलर्ट दवाओं के प्रबंधन, डबल वेरिफिकेशन, सुपरविजन, प्रशिक्षण और अस्पताल की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में खामियों की ओर भी संकेत करता है। ——————– मामले से जुड़ी यह भी पढ़ें… मेडिकल कॉलेज में ‘हाई-रिस्क इंजेक्शन’ से मरीज की मौत
मध्य प्रदेश के सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) में भर्ती एक मरीज की मौत हो गई। बायोप्सी की तैयारी के दौरान ईएनटी वार्ड में भर्ती मरीज को नर्स ने एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की निगरानी के बिना इंजेक्शन लग दिया। कुछ ही मिनटों बाद मरीज की हालत बिगड़ गई, हार्टबीट रुक गई और डॉक्टरों को करीब 45 मिनट तक सीपीआर देना पड़ा। करीब 11 दिनों तक वेंटिलेटर और आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 23 जून की सुबह मरीज की मौत हो गई। पढ़ें पूरी खबर…
