Homeमध्यप्रदेशएम्स की रिसर्च:अल्जाइमर का खतरा सिर्फ बुजुर्गों में नहीं, 45 से 60...

एम्स की रिसर्च:अल्जाइमर का खतरा सिर्फ बुजुर्गों में नहीं, 45 से 60 वर्ष के 20 प्रतिशत चपेट में मरीज, 1 तो सिर्फ 28 साल का

एक ही बात बार-बार पूछना, हाल की बातचीत भूलना या परिचित जगह पर रास्ता भूलना अल्जाइमर या याददाश्त से जुड़ी बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है। भोपाल एम्स की हालिया स्टडी में सामने आया है कि अल्जाइमर का खतरा सिर्फ बुजुर्गों को ही नहीं, युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। साल 2024 से 2025 तक 60 मरीजों (25 से 80 उम्र वाले) पर हुई स्टडी में 20 फीसदी मरीज ऐसे रहे जिनकी उम्र 45 से 60 के बीच है। सबसे कम आयु का मरीज महज 28 साल का है। इसके पीछे डॉक्टरों का कहना है कि दिमाग की कोशिकाओं को लंबे समय तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने पर ऐसी प्रक्रिया शुरू हो सकती है, जो अल्जाइमर से जुड़े नुकसान को बढ़ाती है। इससे याददाश्त जाने का खतरा बढ़ जाता है। महिला मरीज करीब 4 फीसदी ज्यादा अल्जाइमर एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक मप्र में 60 साल से अधिक उम्र की आबादी में करीब 6.7% लोग अल्जाइमर से प्रभावित हैं। देश में यह आंकड़ा करीब 7.4% है। प्रदेश में 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में यह दर करीब 9% और पुरुषों में 5.77% बताई गई है। संकेत… अल्जाइमर की पहचान ब्लड टेस्ट से एम्स के डॉ. सुखेश मुखर्जी ने बताया कि अल्जाइमर की पहचान के लिए खून में मौजूद कुछ खास बायोमार्कर की जांच पर अध्ययन किया है। संकेत मिले हैं कि इसकी पहचान ब्लड टेस्ट के जरिए भी हो सकेगी। इधर, सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. टीएन दुबे के अनुसार बदलती जीवनशैली, तनाव, डायबिटीज व हाई बीपी जैसी बीमारियां भी तंत्रिका तंत्र पर असर डाल सकती हैं। वक्त पर इनकी पहचान और इलाज से अल्जाइमर के खतरे से बचा जा सकता है।

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here