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एमपी के नवोदय और केंद्रीय विद्यालय निजी स्कूलों से आगें:CBSE 12वीं रिजल्ट में भोपाल रीजन की बेटियों का दबदबा, प्राइवेट स्कूलों ने बिगाड़ा राज्य का रिजल्ट

सीबीएसई कक्षा 12वीं परीक्षा 2026 के मध्यप्रदेश के आंकड़ों ने स्कूल शिक्षा की तस्वीर को साफ कर दिया है। जहां जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) और केंद्रीय विद्यालय (KV) ने शानदार परिणाम देकर सरकारी शिक्षा मॉडल की ताकत दिखाई, वहीं बड़ी संख्या में छात्रों वाले प्राइवेट यानी इंडिपेंडेंट स्कूलों का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा। जबकि इन स्कूलों की फीस JNV और KV जैसे स्कूलों की तुलना में आमतौर पर अधिक होती है। खास बात यह रही कि हर श्रेणी में छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया। भोपाल रीजन के आंकड़ों में भी लड़कियों ने करीब पांच प्रतिशत अंकों की बढ़त बनाई। दूसरी ओर, 12.14 प्रतिशत छात्र सभी विषयों में फेल रहे। एक्सपर्ट के अनुसार, सीबीएसई बोर्ड के निजी स्कूलों के खराब प्रदर्शन के कारण ही भोपाल रीजन (मध्यप्रदेश) देश के कुल 22 रीजन में से 19वे स्थान पर है। नवोदय विद्यालय का रिजल्ट सबसे बेहतर सीबीएसई के जारी आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश में सबसे बेहतर प्रदर्शन जवाहर नवोदय विद्यालयों का रहा। JNV का कुल पास प्रतिशत 98.16 प्रतिशत दर्ज किया गया। इनमें लड़कों का परिणाम 97.81 प्रतिशत और लड़कियों का 98.73 प्रतिशत रहा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नवोदय विद्यालयों का रेजिडेंशियल मॉडल, अनुशासित दिनचर्या और नियमित अकादमिक मॉनिटरिंग छात्रों के बेहतर प्रदर्शन की बड़ी वजह है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाला यह मॉडल लगातार सफल साबित हो रहा है। केंद्रीय विद्यालयों ने भी सेट किए ऊंचे मानक केंद्रीय विद्यालयों ने भी शानदार परिणाम देकर अपनी मजबूत शैक्षणिक व्यवस्था का प्रदर्शन किया। KV का कुल पास प्रतिशत 97.90 प्रतिशत रहा। लड़कों का रिजल्ट 97.66 प्रतिशत और लड़कियों का 98.11 प्रतिशत दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार केंद्रीय विद्यालयों में राष्ट्रीय स्तर का पाठ्यक्रम, प्रशिक्षित शिक्षक, नियमित मूल्यांकन और पढ़ाई का संतुलित माहौल छात्रों की सफलता का प्रमुख कारण है। यही वजह है कि हर वर्ष KV के परिणाम राष्ट्रीय औसत से बेहतर रहते हैं। आदिवासी छात्रों के स्कूलों का प्रदर्शन भी निजी से बेहतर एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल यानी EMRS का कुल पास प्रतिशत 85.47 प्रतिशत रहा। आदिवासी विद्यार्थियों के लिए संचालित इन स्कूलों में लड़कों का परिणाम 83.46 प्रतिशत और लड़कियों का 86.89 प्रतिशत दर्ज किया गया। हालांकि JNV और KV की तुलना में यह आंकड़ा कम है, लेकिन सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बीच यह प्रदर्शन सकारात्मक माना जा रहा है। यहां भी छात्राओं ने लड़कों से बेहतर परिणाम देकर अपनी बढ़ती शैक्षणिक जागरूकता दिखाई। सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी बनी चुनौती सरकारी स्कूलों का कुल पास प्रतिशत 80.60 प्रतिशत रहा। इनमें लड़कों का रिजल्ट 79.86 प्रतिशत और लड़कियों का 80.88 प्रतिशत दर्ज किया गया। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि शिक्षकों की कमी, सीमित संसाधन और बुनियादी सुविधाओं की चुनौतियों के बावजूद सरकारी स्कूलों का यह परिणाम संतोषजनक माना जा सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल संसाधनों को बेहतर किया जाए तो सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन और सुधर सकता है। सबसे ज्यादा छात्र, लेकिन सबसे कमजोर रिजल्ट सबसे चिंताजनक स्थिति इंडिपेंडेंट यानी निजी स्कूलों की रही। सीबीएसई से संबद्ध इन स्कूलों में सबसे अधिक 61,419 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 61,242 परीक्षा में शामिल हुए। इसके बावजूद इन स्कूलों का कुल पास प्रतिशत केवल 76.85 प्रतिशत रहा, जो सभी श्रेणियों में सबसे कम है। लड़कों का परिणाम 74.12 प्रतिशत और लड़कियों का 80.02 प्रतिशत दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि निजी स्कूलों में अत्यधिक व्यावसायिक दबाव, परीक्षा आधारित तैयारी की कमी और छात्रों पर बढ़ते मानसिक तनाव जैसे कारण परिणामों को प्रभावित कर रहे हैं। कमजोर परिणामों ने निजी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े किए हैं। हर कैटेगरी में लड़कियां रहीं आगे पूरे आंकड़ों में सबसे बड़ा और समान ट्रेंड यह देखने को मिला कि हर श्रेणी में छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया। भोपाल रीजन में लड़कों का पास प्रतिशत 76.87 प्रतिशत रहा, जबकि लड़कियों का रिजल्ट 82.19 प्रतिशत दर्ज किया गया। यानी लड़कियां करीब पांच प्रतिशत अंकों से आगे रहीं। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार छात्राओं में नियमित अध्ययन की आदत, बोर्ड परीक्षा के प्रति गंभीरता और करियर को लेकर बढ़ती जागरूकता इसके प्रमुख कारण हैं। 12.14% स्टूडेंट्स सभी विषयों में फेल भोपाल रीजन के परिणाम में एक गंभीर तथ्य भी सामने आया है। कुल परीक्षार्थियों में से 12.14 प्रतिशत छात्र ऐसे रहे, जो सभी विषयों में असफल हो गए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल छात्रों की तैयारी का मुद्दा नहीं, बल्कि स्कूलों की अकादमिक निगरानी और सीखने की गुणवत्ता से जुड़ा बड़ा संकेत है। कोविड के बाद सीखने के स्तर में आई गिरावट, डिजिटल डिस्ट्रैक्शन और नियमित अध्ययन में कमी को भी इसकी वजह माना जा रहा है। देश का दूसरा सबसे बड़ा सीबीएसई रीजन है भोपाल भोपाल रीजन देश के सबसे बड़े सीबीएसई रीजन में शामिल है। यहां सीबीएसई से संबद्ध कुल 1291 स्कूल संचालित हो रहे हैं। स्कूलों की संख्या के लिहाज से भोपाल, 1483 स्कूलों वाले लुधियाना रीजन के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा रीजन है। इतने बड़े दायरे में परीक्षा संचालन और परिणाम प्रबंधन को बड़ी प्रशासनिक चुनौती माना जाता है। यह खबर भी पढ़ें… CBSE 12वीं रिजल्ट, भोपाल रीजन के 79.43% स्टूडेंट्स पास:लड़कियों ने फिर बाजी मारी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने बुधवार दोपहर 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया। भोपाल के 9,399 समेत मध्य प्रदेश के 80,454 छात्रों के साथ देशभर के लाखों स्टूडेंट्स का इंतजार खत्म हो गया। इस बार भोपाल रीजन का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से कमजोर रहा। भोपाल रीजन में 79.43 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए, जबकि देशभर का औसत पास प्रतिशत 85.20 प्रतिशत दर्ज किया गया, यानी भोपाल रीजन राष्ट्रीय औसत से 5.77 प्रतिशत पीछे रहा। भोपाल का प्रदर्शन रायपुर, लखनऊ और रांची जैसे कई रीजन से भी कमजोर रहा। पढ़ें पूरी खबर…

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