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एमपी के किसान ₹14,563 करोड़ के कर्जदार:अकेले खरगोन में ₹2,655 करोड़ बकाया, 5 साल में 67% बढ़ा ऋण असंतुलन

एमपी की मोहन सरकार इस साल को कृषक कल्याण वर्ष के तौर पर मना रही है। वहीं दूसरी तरफ मध्यप्रदेश में किसानों और सहकारी संस्थाओं के बीच वित्तीय सेहत का गणित पूरी तरह बिगड़ चुका है। विधानसभा के बजट सत्र में विधायक जयवर्धन सिंह के एक सवाल के जवाब में सहकारिता विभाग ने जो आंकड़े पेश किए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। प्रदेश के किसानों पर प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) का हजारों करोड़ रुपया बकाया है। पिछले 5 वर्षों में जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में ‘ऋण असंतुलन’ (Loan Imbalance) की स्थिति 67% तक बिगड़ गई है। विधानसभा में प्रस्तुत सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में जो असंतुलन ₹4,125.20 करोड़ था, वह वित्तीय वर्ष 2025 तक बढ़कर ₹6,890.10 करोड़ के पार पहुंच गया है। प्रदेश का सबसे बड़ा ‘कर्जदार’ जिला: खरगोन आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक खरगोन जिला प्रदेश में कर्ज के मामले में नंबर वन पर है। यहां के किसानों पर पैक्स समितियों का कुल ₹2,655.80 करोड़ का ऋण बकाया है। इतना ही नहीं, जिला सहकारी बैंक का इन समितियों पर भी ₹2,855.66 करोड़ का कृषि ऋण बकाया है। टॉप-5 जिले: जहां किसानों पर है सबसे ज्यादा बकाया (आंकड़े करोड़ रुपए में, 30 जून 2025 की स्थिति) 5 साल में 67% बढ़ा ऋण असंतुलन, कॉपरेटिव ढांचे पर खतरा सरकार ने स्वीकार किया है कि प्रदेश के जिला सहकारी बैंकों में ‘ऋण असंतुलन’ (Loan Imbalance) की स्थिति भयावह हो गई है। वर्ष 2021 में जो असंतुलन ₹4,125.20 करोड़ था, वह 2025 में बढ़कर ₹6,890.10 करोड़ हो गया है। यह वृद्धि बताती है कि बैंकों से समितियों और समितियों से किसानों तक पैसा तो गया, लेकिन उसकी रिकवरी उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई। ऋण असंतुलन में सबसे खराब स्थिति वाले बैंक (करोड़ में): होशंगाबाद (नर्मदापुरम): ₹508.44 करोड़ राजगढ़: ₹508.16 करोड़ उज्जैन: ₹444.42 करोड़ छिंदवाड़ा: ₹295.82 करोड़ राजधानी भोपाल का हाल: सोसाइटियों पर ₹336 करोड़ बाकी भोपाल जिले की 34 समितियों पर जिला बैंक का ₹336.43 करोड़ बकाया है, जबकि जिले के किसानों पर इन समितियों का ₹409.23 करोड़ का कर्ज है। नजीराबाद (₹25.77 करोड़) और बागसी (₹24.29 करोड़) जिले की सबसे बड़ी कर्जदार समितियां हैं। पूरे प्रदेश में ऋण असंतुलन (Loan Imbalance) की स्थिति सरकार द्वारा प्रस्तुत अंकेक्षण प्रतिवेदन के आधार पर विगत 5 वर्षों में प्रदेश का कुल ऋण असंतुलन तेजी से बढ़ा है… ऋण असंतुलन (Loan Imbalance) क्या है इसे भी समझिए.. ऋण असंतुलन का अर्थ है वह अंतर जो तब पैदा होता है जब जिला सहकारी बैंक द्वारा समितियों (PACS) को दिया गया कर्ज, उन समितियों द्वारा किसानों को दिए गए कर्ज से अधिक हो जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें: यदि बैंक ने समिति को ₹100 दिए, लेकिन समिति ने किसानों को केवल ₹80 ही बांटे, तो वह ₹20 का अंतर ‘ऋण असंतुलन’ कहलाता है। यह स्थिति दर्शाती है कि बैंक से निकला पैसा या तो सोसायटियों के पास अटक गया है या उसका हिसाब सही नहीं है

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