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‘एक मुलाकात’ में जिंदा हुई साहिर-अमृता की अधूरी प्रेम कहानी:एक्टर शेखर सुमन की प्रस्तुति ने जीता दिल; इंडीमूंस फेस्टिवल का भव्य समापन

भोपाल के रविंद्र भवन में आयोजित इंडीमूंस आर्ट्स फेस्टिवल का चौथा और अंतिम दिन मशहूर कलाकार, गायक, टीवी होस्ट और राजनीतिक नेता शेखर सुमन की भावपूर्ण प्रस्तुति के साथ संपन्न हुआ। नाटक ‘एक मुलाकात’ में शेखर सुमन ने साहिर लुधियानवी और गीतिका त्यागी ने अमृता प्रीतम का किरदार निभाया। सैफ हैदर हसन के निर्देशन में मंचित यह नाटक का 122वां शो था। उर्दू शेरो-शायरी से सजे इस नाटक ने अमृता और साहिर की अधूरी प्रेम कहानी को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक में साहिर लुधियानवी के प्रसिद्ध गीत “मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया”, “ढल गया दिन, हो गई शाम” और “ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है” के जिक्र ने उनके बॉलीवुड को दिए अमर गीतों की याद ताजा कर दी। नाटक ‘एक मुलाकात’ की तीन तस्वीरें देखिए मिडिल ईस्ट का जिक्र, जंग के खिलाफ संदेश कार्यक्रम के अंत में शेखर सुमन ने साहिर लुधियानवी की नज़्म ‘ए शरीफ़ इंसानों’ पढ़ते हुए विश्वभर में चल रहे युद्धों की निंदा की। उन्होंने मिडिल ईस्ट का जिक्र करते हुए कहा कि जंग में खून अपना हो या पराया, खून इंसान का ही होता है। इस जंग-विरोधी नज़्म के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्टूनिंग सत्र और ओपन स्टेज पर बैंड परफॉर्मेंस का तड़का नाटक से पहले मशहूर कार्टूनिस्ट हरिओम तिवारी ने कार्टूनिंग के इतिहास और वर्तमान पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत के पहले पॉलिटिकल कार्टूनिस्ट शंकर पिल्लई, आर.के. नारायण और मारियो मिरांडा जैसे चर्चित कलाकारों का उल्लेख करते हुए उनके योगदान की सराहना की। ओपन स्टेज पर ‘बैटल ऑफ बैंड्स’ के विजेता ‘परिंदे बैंड’ ने ‘सुन रहा है ना तू’, ‘सैयां’ और ‘अगर तुम साथ हो’ जैसे लोकप्रिय बॉलीवुड गीतों पर शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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