प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर में 10 आईपीएस अधिकारियों की तैनाती के बावजूद अपराधों पर लगाम नहीं लग पा रहा है। अप्रैल महीने में हत्या के 8 मामले सामने आए। औसतन हर दूसरे दिन एक मर्डर हुआ। इसके अलावा हत्या के प्रयास के दो से ज्यादा गंभीर मामले भी दर्ज किए गए हैं। इंदौर में पुलिस महकमे में एक साथ 10 आईपीएस अधिकारियों की तैनाती है, जिनमें कमिश्नर से लेकर एडिशनल कमिश्नर और डीसीपी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इतनी बड़ी फोर्स होने के बावजूद अपराधों का लगातार होना सिस्टम की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है। काम्बिंग गश्त में अपराधियों की धरपकड़ पुलिस हर हफ्ते कॉम्बिंग गश्त के नाम पर बड़ी संख्या में अपराधियों की धर पकड़ करती है। इसके बावजूद क्राइम का ग्राफ कम नहीं हो रहा है। सूत्रों की मानें तो पुलिस हर हफ्ते गश्त के दौरान 500 से ज्यादा अपराधियों की जांच करती है ओर उन्हें पकड़ती है। इतने अपराधियों को पकड़ने के बाद भी लूटमार, चेन स्नेचिंग, चोरी और चाकूबाजी जैसी घटनाए कम नहीं हो रही है। इंटेलिजेंस और क्राइम ब्रांच पर सवाल इंदौर में अधिकांश अपराध आदतन अपराधियों द्वारा ही अंजाम दिए जा रहे हैं। जेल से छुटने के बाद अपराधी हत्या जैसे क्राइम कर रहे हैं, जबकि पुलिस कमिश्नरी के तहत जेल से छूटने वाले अपराधियों की जिम्मेदारी क्राइम ब्रांच की है। दूसरी तरफ इंटेलिजेंस की टीम भी फैल नजर आ रही है। इंटेलिजेंस के अधिकारी सीधे पुलिस आयुक्त को रिपोर्ट करते हैं, लेकिन इंदौर में बढ़ते अपराधों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है।
