संपदा 2.0 सिस्टम के माध्यम से रजिस्टर्ड एक सेल डीड में कथित रूप से सुनियोजित और चरणबद्ध तरीके से छेड़छाड़ कर उसे दोबारा रजिस्टेशन से गुजारने का मामला सामने आया है। केस में रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं और शासन स्तर पर जांच की मांग की गई है। पहले जानिए क्या है मामला सेल डीड नं. MP7IGR17532025A101139378 (12 दिसंबर 2025) को संपदा 2.0 प्रणाली के माध्यम से विधिवत रजिस्ट्रेशन किया गया था। दस्तावेज में क्रेता मनीषा अग्रवाल (इंदौर) और विक्रेता ओमप्रकाश मुलानी और रेणुका मुलानी (निवासी दुबई) पक्षकार थे। रजिस्ट्रेशन के समय सभी वैधानिक औपचारिकताएं पूरी की गई। पक्षकारों का सत्यापन, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस का भुगतान, दस्तावेज परीक्षण आदि थे। इसके रजिस्ट्रेशन नंबर, तारीख और इंडेक्स भी जारी कर दिया गया, जिससे दस्तावेज पूर्ण रूप से रजिस्टर्ड माना गया। हालांकि, जब दस्तावेज की सर्टिफाइड कॉपी प्राप्त की गई तो प्रत्येक पेपर अंग्रेजी में “INCOMPLETE REGISTRATION” ( का वॉटरमार्क अंकित पाया गया। इसे लेकर विभाग में शिकायत दर्ज कराई गई। विभाग ने जताई असमर्थता, दोबारा रजिस्ट्रेशन का सुझाव शिकायत के बाद विभागीय स्तर पर यह कहा गया कि वॉटरमार्क हटाना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है और दस्तावेज का फिर से रजिस्ट्रेशन कराया जाए। विक्रेता पक्ष के दुबई में होने के कारण दोबारा उपस्थित होना संभव नहीं था। इसके बाद मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया। आरोप है कि इसके बाद संपदा प्रणाली के माध्यम से दस्तावेज को सर्विस प्रोवाइडर के पास भेजकर फिर से स्लॉट बुक किया गया और दोबारा रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया कराई गई। इस बार क्रेता डिप्टी रजिस्ट्रार के समक्ष उपस्थित हुए, जबकि विक्रेता ने दुबई से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की। बताया गया कि पूर्व में पूर्ण हो चुकी समस्त औपचारिकताएं दोबारा कराई गई। यह प्रक्रिया केवल वॉटरमार्क हटाने के उद्देश्य से की गई। तारीखों में अंतर से उठे सवाल दस्तावेज पर मूल रजिस्ट्रेशन 12.12.2025 ही अंकित है, जबकि रजिस्ट्री की प्रक्रिया 26.02.2026 की दर्शाई गई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि पहले से रजिस्टर्ड दस्तावेज को दोबारा प्रक्रिया में कैसे लिया गया। एडवोकेट प्रमोद द्विवेदी ने बताया कि रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के तहत किसी भी रजिस्ट्रेशन दस्तावेज का निरस्तीकरण बिना कोर्ट के आदेश के संभव नहीं है। केवल कोर्ट के आदेश के आधार पर ही दस्तावेज निरस्त किया जा सकता है। शासन को भेजा गया नोटिस इस मामले में एडवोकेट हितेन्द्र कुमार त्रिपाठी द्वारा मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव (वाणिज्यिक कर विभाग), आईजी रजिस्ट्रार और डीआईजी रजिस्ट्रारर को नोटिस भेजा गया है। नोटिस में मांग की गई है कि भविष्य में रजिस्टर्ड दस्तावेज सीधे डीआईजी रजिस्ट्रार द्वारा ही पक्षकारों को दिए जाएं, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। साथ ही यदि किसी प्रकार की छेड़छाड़ या धोखाधड़ी होती है तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जा सके। तकनीकी कारणों से हुई थी स्थिति समरथमल राठौर (डिप्टी रजिस्ट्रार) ने बताया कि संपदा-2 सॉफ्टवेयर के अपग्रेशन के दौरान तकनीकी कारणों से रजिस्ट्री की स्थिति ‘अपूर्ण’ (इनकंप्लीट) प्रदर्शित हो गई थी। इसके बाद क्रेता और विक्रेता, दोनों की आपसी सहमति से फिर से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी की गई। चूंकि दोनों पक्षों की पहचान और आवश्यक औपचारिकताएं पूर्व में ही पूर्ण हो चुकी थीं, इसलिए विक्रेता के दुबई में निवासरत होने के बावजूद नियमानुसार रजिस्ट्रार की सुविधा प्रदान की गई। पूरी प्रक्रिया विधिसम्मत रही है और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता या अवैधता नहीं हुई है।
