इंदौर के गांधी नगर में पंडाल लगाकर रास्ता बाधित करने के मामले में हाई कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। डीसीपी नरेंद्र रावत ने कोर्ट में उपस्थित होकर बताया कि पंडाल से 10 फीट का रास्ता खुलवा दिया गया है। साथ ही, अवैध अतिक्रमण के मामले में आयोजक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि जब रास्ता बाधित था, तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई? डीसीपी ने बताया कि आयोजक को पहले नोटिस दिया गया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शासन को निर्देश दिए कि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने, इसे लेकर दो हफ्ते में जवाब पेश किया जाए। मामले में पंडाल लगाने की अनुमति, रास्ता बाधित होने और समय रहते कार्रवाई नहीं किए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठा। जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान डीसीपी नरेंद्र रावत ने कोर्ट को बताया कि पंडाल से 10 फीट का रास्ता उपलब्ध करा दिया गया है। आयोजक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। कोर्ट ने कार्रवाई में देरी को लेकर सवाल किया। इस पर डीसीपी ने आयोजक को पहले नोटिस दिए जाने की जानकारी दी। पहले शासन ने कहा था- वैध अनुमति नहीं दी गई इससे पहले सुनवाई में शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि पंडाल लगाने की कोई वैध अनुमति जारी नहीं की गई थी। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया था कि अनुमति नहीं होने के बावजूद पंडाल कैसे लग गया और संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। इसी सिलसिले में डीसीपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए गए थे। हजारों परिवारों को परेशानी का हवाला याचिकाकर्ता एडवोकेट चर्चित शास्त्री की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पंडाल के कारण गांधी नगर क्षेत्र के हजारों परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रास्ता बाधित होने से स्थानीय व्यापार भी प्रभावित हुआ है। याचिका में कहा गया कि पंडाल के करीब 50 फीट के हिस्से में से कम से कम 8 फीट रास्ता खुला रखने के लिए शासन-प्रशासन से निवेदन किया गया था, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। याचिकाकर्ता की ओर से राजनीतिक दबाव के कारण कार्रवाई नहीं होने का आरोप भी लगाया गया था। अब कोर्ट ने शासन से दो हफ्ते में जवाब मांगा है कि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
