सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण का दायरा अब प्राचीन मंदिरों और धर्मस्थलों तक पहुंच गया है। अंकपात से खाकचौक की ओर जाने वाले मार्ग पर उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने चौड़ीकरण के लिए मंदिरों और धर्मस्थलों पर लाल निशान लगाए हैं। करीब 45 फीट चौड़े वर्तमान मार्ग को लगभग 100 फीट यानी 30 मीटर तक चौड़ा करने की तैयारी है। प्रस्तावित चौड़ीकरण की जद में दोनों ओर स्थित दो दर्जन से अधिक प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल बताए जा रहे हैं। इनमें शहर के महत्वपूर्ण उत्तरामुखी हनुमान मंदिर, षट् विनायक में शामिल अविघ्न विनायक गणेश मंदिर और हांडीफोड़ भैरव मंदिर भी शामिल हैं। मंदिरों पर निशान लगाए जाने के बाद पुजारियों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सिंहस्थ के लिए विकास जरूरी है, लेकिन प्राचीन धार्मिक विरासत को नुकसान पहुंचाए बिना चौड़ीकरण का विकल्प तलाशा जाना चाहिए। उत्तरामुखी हनुमान मंदिर पर 25 फीट तक निशान उत्तरामुखी हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित अमित पाठक के मुताबिक, मंदिर पर 7.64 मीटर यानी करीब 25 फीट तक लाल निशान लगाया गया है। इससे मंदिर का प्राचीन सभामंडप पूरी तरह प्रभावित होने और केवल गर्भगृह बचने की स्थिति बन सकती है। मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन बृहस्पतेश्वर महादेव और अन्नपूर्णा माता मंदिर भी चौड़ीकरण की जद में बताए जा रहे हैं। क्षेत्र के अन्य मंदिरों में भी करीब 6 से 7 मीटर तक हिस्सा प्रभावित होने की बात सामने आई है। हालांकि, अंतिम रूप से कितने हिस्से हटाए जाएंगे, यह प्रशासन की नपती और प्रस्तावित सीमांकन के बाद ही स्पष्ट होगा। 2004 के सिंहस्थ में भी हुआ था चौड़ीकरण पुजारियों का कहना है कि अंकपात क्षेत्र उज्जैन के पुराने धार्मिक क्षेत्रों में शामिल है। यहां सांदीपनि आश्रम सहित बड़ी संख्या में प्राचीन मंदिर हैं। पंडित हरिनारायण शास्त्री के मुताबिक, 2004 के सिंहस्थ में भी इस मार्ग का चौड़ीकरण किया गया था। उस समय कई मंदिरों के ओटले और हिस्से सड़क में चले गए थे। पुजारियों का कहना है कि वर्तमान सड़क भी पर्याप्त चौड़ी है। इसे और चौड़ा करने से प्राचीन मंदिरों के स्वरूप पर असर पड़ेगा। वे विकास का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि चाहते हैं कि धार्मिक स्थलों को सुरक्षित रखते हुए रास्ते का विकल्प निकाला जाए। पुजारियों की मांग- 100 फीट की जगह कम हो चौड़ाई उत्तरामुखी हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित अमित पाठक ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर पर लगाए गए करीब 25 फीट के निशान को 10 से 15 फीट तक कम किया जाए, ताकि मंदिर का मूल स्वरूप बच सके। उनका कहना है कि यूडीए और प्रशासन के अधिकारियों को मौके पर आकर पुजारियों और संतों के साथ बैठक करनी चाहिए। बातचीत के बाद सर्वसम्मति से जो निर्णय होगा, उसमें वे सहयोग करेंगे। नोटिस के बाद बैठक, समाधान नहीं तो आंदोलन पंडित अमित पाठक के मुताबिक, अभी तक यूडीए या प्रशासन की ओर से मंदिर प्रबंधन के साथ औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। फिलहाल नपती कर लाल निशान लगाए गए हैं। पुजारी अब नोटिस मिलने का इंतजार कर रहे हैं। पंडित हरिनारायण शास्त्री ने भी कहा कि नोटिस मिलने के बाद बैठक की जाएगी। पंडित अमित पाठक ने चेतावनी दी कि यदि बातचीत से समाधान नहीं निकला और मंदिरों को हटाने की कार्रवाई हुई तो आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि हर बार सिंहस्थ के नाम पर प्राचीन मंदिरों का नुकसान स्वीकार नहीं किया जा सकता। कई मंदिरों का धार्मिक महत्व पुजारियों के मुताबिक, हांडीफोड़ भैरव मंदिर नवरात्रि में होने वाली नगर पूजा से जुड़ा महत्वपूर्ण धर्मस्थल है। अविघ्न विनायक गणेश और नौ नारायण के मंदिर धार्मिक यात्राओं और परंपराओं में विशेष महत्व रखते हैं। वहीं, उत्तरामुखी हनुमान मंदिर को शहर का विशिष्ट मंदिर बताते हुए पुजारियों ने इसके प्राचीन स्वरूप को सुरक्षित रखने की मांग की है।
