इंदौर में स्वाइन फ्लू (H1N1) संक्रमण से उज्जैन की 60 वर्षीय महिला की मौत हो चुकी है। भोपाल में भी अब तक 6 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन राजधानी में H1N1 की जांच ही शुरू नहीं हो सकी है। गांधी मेडिकल कॉलेज में जांच किट उपलब्ध नहीं होने से मरीजों की जांच के लिए अब भी किट का इंतजार किया जा रहा है। आंकड़ों की माने तो जेपी, हमीदिया और एम्स की ओपीडी में रोज करीब 10 हजार मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें लगभग 50% मरीजों में गले में खराश, खांसी, बुखार, नाक बहना और थकान जैसे लक्षण बताए जा रहे हैं। यानी रोज करीब 6 हजार मरीज वायरल या रेस्पिरेटरी संक्रमण जैसे लक्षणों से पीड़ित हैं। दैनिक भास्कर ने डॉक्टर से बात की। उन्होंने बताया- कब सिर्फ दवा से संक्रमण ठीक होगा और कब भर्ती होने की जरूरत पड़ेगी? एक मौत के बाद भी जांच का इंतजार इंदौर में 16 दिन इलाज के बाद उज्जैन की 60 वर्षीय महिला की मौत हुई है। जांच में एच1एन1 संक्रमण की पुष्टि हुई थी। भोपाल में भी अब तक छह मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब संक्रमण के पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं, तब भी सरकारी स्तर पर एच1एन1 की जांच व्यवस्था नियमित रूप से क्यों शुरू नहीं हुई है। जीएमसी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की एचओडी डॉ. दीप्ति चौरसिया के अनुसार फिलहाल एच1एन1 की जांच नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि जांच के लिए किट आने की सूचना है और किट उपलब्ध होते ही जांच शुरू की जाएगी। वहीं, सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने इस मामले में चर्चा नहीं की। एम्स भोपाल में लक्षण वाले मरीजों की जांच
एम्स भोपाल के अधिकारियों के मुताबिक- अस्पताल में हर मरीज की रूटीन जांच नहीं की जा रही, बल्कि जिन मरीजों में H1N1 जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, उनकी स्थिति के आधार पर सैंपल जांच के लिए भेजे जाते हैं। पिछले करीब एक सप्ताह में ऐसे लगभग 10 सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। फिलहाल एम्स की ओर से इनमें किसी मरीज के H1N1 पॉजिटिव पाए जाने की सूचना नहीं दी गई है। डॉक्टर बोले- हर मरीज की जांच जरूरी नहीं
पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. लोकेंद्र दवे का कहना है कि मौसम में अचानक बदलाव, नमी और ठंडक के कारण वायरल रेस्पिरेटरी बीमारियां बढ़ती हैं। इनमें एच1एन1 भी एक प्रमुख कारण है। पिछले करीब तीन महीने से इस तरह के लक्षण वाले मरीज लगातार आ रहे हैं। हालांकि, उनके अनुसार अभी मरीजों की संख्या असामान्य या महामारी जैसी स्थिति में नहीं है। डॉ. दवे ने बताया कि इंफ्लूएंजा के करीब 95% मामले सेल्फ रिकवरिंग होते हैं। मरीजों को लक्षणों की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में देखा जाता है। डॉ. दवे के मुताबिक गंभीर मरीजों की संख्या कम होती है, लेकिन फ्लू से निमोनिया जैसी जटिलता हो सकती है। इसलिए लक्षण बिगड़ने पर इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। ऑक्सीजन की कमी यानी हाइपोक्सिया वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर आईसीयू सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है।
एक घर में एक मरीज, दो-तीन दिन में दूसरे सदस्य भी बीमार
डॉक्टरों के अनुसार कई परिवारों में ऐसा भी देखने को मिल रहा है कि घर के एक सदस्य को गले में खराश, खांसी और बुखार होने के दो-तीन दिन बाद दूसरे सदस्यों में भी इसी तरह के लक्षण शुरू हो जाते हैं। फिलहाल इंफ्लूएंजा ए (एच1एन1), इंफ्लूएंजा बी के साथ एडिनोवायरस और रेस्पिरेटरी सिंसिशियल वायरस जैसे संक्रमण सक्रिय हो सकते हैं। इन सभी के शुरुआती लक्षण काफी हद तक एक जैसे होते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर सामान्य वायरल, फ्लू, एच1एन1 और कोविड में अंतर करना मुश्किल है। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटी वायरल न लें
डॉ. दवे ने बताया कि सर्दी-खांसी और बुखार होने पर सीधे मेडिकल स्टोर से दवा लेना उचित नहीं है। मरीज को चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। जिन मरीजों को डॉक्टर एंटीवायरल दवा देते हैं, उन्हें उसका पूरा कोर्स करना चाहिए। लक्षण बढ़ने पर तुरंत दोबारा डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। बीमार व्यक्ति को खुद को आइसोलेट करना, मास्क लगाना, पर्याप्त आराम करना, गुनगुना पानी पीना और तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाना चाहिए। हाथों को साबुन-पानी से धोने और बार-बार आंख, नाक और मुंह को छूने से बचने की भी सलाह दी गई है। वैक्सीन उपलब्ध, हाई रिस्क वालों को सलाह
डॉ. दवे के अनुसार एच1एन1 से बचाव के लिए इंफ्लूएंजा वैक्सीन उपलब्ध है। इसका सुरक्षा प्रभाव करीब 60 से 70% तक बताया जाता है। हालांकि इसका असर आने में समय लगता है। सामान्य मरीजों के बजाय उन लोगों को वैक्सीन की सलाह दी जाती है, जिनमें संक्रमण की जटिलता का खतरा अधिक रहता है। एग एलर्जी वाले लोगों को वैक्सीन से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। दुर्ग में बढ़ा स्वाइन फ्लू का खतरा…13 मरीज मिले
छत्तीसगढ़ में स्थित दुर्ग जिले में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अब तक 13 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से 4 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौट चुके हैं। 2 मरीजों का इलाज घर पर चल रहा है, जबकि 7 संक्रमित मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। स्वास्थ्य विभाग इन सभी मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। क्या है स्वाइन फ्लू? स्वाइन फ्लू को H1N1 वायरस भी कहते हैं। यह इंफ्लुएंजा के एक नए स्ट्रेन जैसा है, क्योंकि इसके लक्षण भी सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं। स्वाइन फ्लू मूल रूप से सूअरों में होने वाली बीमारी है, जो इंसानों में भी फैल गई। इंसानों में इसका संक्रमण रेट यानी एक व्यक्ति से दूसरे में फैलने की गति काफी तेज है। इसके H1N2 और H1N3 वैरिएंट भी हैं। हालांकि, इंफ्लुएंजा के ये वैरिएंट इंसानों में उतनी तेजी से नहीं फैलते हैं। इनके केस भी बहुत कम ही देखने को मिलते हैं। स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण क्या हैं स्वाइन फ्लू एक तरह की रेस्पिरेटरी डिजीज है, जो हमारे श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है। कैसे फैलता है स्वाइन फ्लू ? स्वाइन फ्लू एक प्रकार के इंफ्लुएंजा वायरस के कारण होता है। यह वायरस सूअरों के शरीर में होता है। इंसानों में यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से और तेजी से फैलती है। साल 2009 के करीब स्वाइन फ्लू का डर इस कदर बढ़ गया था कि लोग सूअरों को मारकर जमीन में दफना रहे थे, जबकि क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, सूअर का मांस खाने से इंसानों में स्वाइन फ्लू फैलने के चांस न के बराबर होते हैं, क्योंकि खाने से पहले इसे अच्छे से पकाया जाता है। गर्मी से सभी बैक्टीरिया और वायरस खत्म हो जाते हैं। स्वाइन फ्लू से डर की सबसे बड़ी वजह यह है कि यह बेहद संक्रामक बीमारी है। यह लार और बलगम के छोटे कणों के जरिए फैलती है। —————– यह खबर भी पढ़ें… इंदौर में स्वाइन फ्लू से महिला की मौत मध्य प्रदेश के इंदौर में बुधवार शाम स्वाइन फ्लू से एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। महिला का कोकिलाबेन अस्पताल में इलाज चल रहा था। मेडिकल रिपोर्ट में स्वाइन फ्लू संक्रमण की पुष्टि हुई है। महिला को कोई दूसरी बीमारी नहीं थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
