इंदौर के कर्बला मैदान पर मेले के आयोजन को लेकर चल रहे विवाद में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने नगर निगम की मेयर इन काउंसिल (MIC) द्वारा मेले की अनुमति निरस्त करने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद कर्बला मैदान पर तीन दिनों तक मेले के आयोजन का रास्ता साफ हो गया है। दरअसल, नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने पहले कर्बला मैदान पर मेले के आयोजन की अनुमति जारी की थी। इसके बाद सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से मामला चर्चा में आने पर मेय पुष्यमित्र भार्गव गुरुवार को वर्चुअल एमआईसी की आपात बैठक बुलाई थी। बैठक में पिछले वर्षों के अनुभवों और अनुमति की शर्तों के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए मेले की अनुमति निरस्त करने का निर्णय लिया गया था। एमआईसी के इस निर्णय के बाद मेले के आयोजकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और निगम के फैसले को चुनौती दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अवकाश के दिन विशेष सुनवाई की गई। इसमें याचिकाकर्ता कर्बला कमेटी की ओर से सीनियर एडवोकेट अशहर वारसी ने कोर्ट को बताया कि निगम कमिश्नर ने इस मामले में पहले अनुमति दी है। एमआईसी को इसे रद्द करने का अधिकार नहीं है। यह भी तर्क दिया कि एमआईसी ने जब इसे रद्द किया तो संबंधित पक्ष को विश्वास में नहीं लिया। इसके सहित अन्य ठोस तर्क दिए। इंदौर बेंच के जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एमआईसी के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने माना कि पहले से जारी अनुमति को इस तरह रद्द किए जाने के निर्णय पर न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब कर्बला मैदान पर निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तीन दिन तक मेले का आयोजन किया जा सकेगा। फैसले के बाद आयोजकों और संबंधित पक्षों में उत्साह का माहौल है, वहीं नगर निगम प्रशासन की ओर से भी न्यायालय के आदेश का पालन करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। कर्बला मैदान पर मेले को लेकर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चाएं तेज थीं।
