कैंसर मरीजों के इलाज के लिए बड़ी राहत की खबर है। इंदौर में 30 साल से जिस अत्याधुनिक लीनियर एक्सीलेटर मशीन का इंतजार था, वह अब शासकीय कैंसर अस्पताल पहुंच गई है। 33 लकड़ी के बॉक्स में मशीन के पार्टस पहुंचे हैं। एमजीएम मेडिकल कॉलेज में नए कैंसर अस्पताल का निर्माण हो रहा है, यहां मशीन की स्थापना के लिए बंकर तैयार हो गए है। करीब 47 करोड़ रुपए की लागत वाली इस मशीन के शुरू होने के बाद कैंसर मरीजों को अत्याधुनिक रेडिएशन ट्रीटमेंट की सुविधा शासकीय अस्पताल में ही मिल सकेगी। अभी तक लीनियर एक्सीलेटर से रेडिएशन थेरेपी कराने के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था। आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज तो योजना के तहत हो जाता था, लेकिन अन्य मरीजों को करीब 50 हजार से 2 लाख रुपए तक खर्च करने पड़ते थे। सरकारी अस्पताल में मशीन लगने के बाद निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी। अभी शासकीय अस्पताल में इस मशीन से इलाज का लाभ लेने के लिए मरीजों को एम्स भोपाल जाना पड़ रहा था, यहां मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण लंबा इंतजार भी करना पड़ता था। नई इमारत में तैयार किया गया है विशेष बंकर
लीनियर एक्सीलेटर मशीन को स्थापित करने के लिए कैंसर अस्पताल की नई इमारत में विशेष बंकर तैयार किया गया है। रेडिएशन से सुरक्षा के लिहाज से इस तरह का बंकर जरूरी होता है। मशीन के अस्पताल पहुंचने के बाद अब इसकी स्थापना और जरूरी तकनीकी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद मरीजों को इसका लाभ मिल सकेगा। करीब दो माह में मशीन इंस्टाल हो जाएगी, जिसके बाद मरीजों को लाभ मिलने लगेगा। इंदौर के साथ ही भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और रीवा के मेडिकल कॉलेजों को भी लीनियर एक्सीलेटर मशीन मिलने की योजना है। हर साल हजारों मरीज आते हैं, पुरानी मशीनों से हो रहा था इलाज
शासकीय कैंसर अस्पताल में हर साल बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में फिलहाल पुरानी मशीनों से रेडिएशन थेरेपी दी जा रही है। पुरानी मशीनों में तकनीकी खराबी आने पर मरीजों के उपचार में भी बाधा आती है। नई मशीन के शुरू होने के बाद रेडियोथेरेपी की क्षमता और उपचार की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है। मशीन की इंस्टॉलेशन प्रोसेस शुरू अधीक्षक डॉ. रमेश आर्य ने बताया कि अस्पताल में दो बंकर बनाए गए हैं। इनमें से एक बंकर में लीनियर एक्सेलरेटर मशीन की इंस्टॉलेशन प्रक्रिया शुरू हो गई है। अभी बेस प्लेट लगाई जाएगी। इसके साथ इलेक्ट्रिफिकेशन वर्क, इंटीरियर और कुछ फाइनल फिनिशिंग का काम भी किया जाना है। ये सभी काम पूरे होने के बाद मशीन को मरीजों के इलाज के लिए शुरू किया जा सकेगा। लीनियर एक्सेलरेटर की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहुत अधिक प्रिसाइज यानी सटीक रेडिएशन देने की क्षमता है। इसमें हम ट्यूमर के आसपास निर्धारित जगह पर रेडिएशन दे सकते हैं। अस्पताल में हर वर्ष 20 हजार मरीज इलाज के लिए भर्ती हो रहे हैं। अस्पताल में आसपास के क्षेत्रों के अलावा राजस्थान के झालावाड़, कोटा, गुजरात के मरीज भी इलाज के लिए आ रहे हैं। 45 करोड़ की लागत से नए कैंसर अस्पताल का निर्माण
नए कैंसर अस्पताल का निर्माण करीब 45 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है। 321 बेड की क्षमता वाले इस अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी हैं, जिनमें लीनियर एक्सलरेटर के लिए बंकर, एचडीआर ब्रेकीथेरेपी मशीन और रेडियोथेरेपी के लिए समर्पित सीटी मशीन शामिल हैं। ये सभी सुविधाएं कैंसर मरीजों के लिए आवश्यक हैं। लेकिन निर्माण कार्य की गति बेहद धीमी बनी हुई है। अक्टूबर 2023 में दावा करते हुए प्रोजेक्ट को दो साल में पूरा कर पांच मंजिला अस्पताल तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन ढाई साल बीत जाने के बाद भी निर्माण पुरा नहीं हुआ है।
