Homeमध्यप्रदेशइंडस्ट्रियल एरिया में अब नहीं बनेंगे रो-हाउसिंग, प्लॉट:आवासीय के लिए नए नियम,...

इंडस्ट्रियल एरिया में अब नहीं बनेंगे रो-हाउसिंग, प्लॉट:आवासीय के लिए नए नियम, सिर्फ बहुमंजिला फ्लैट बनाने की अनुमति, उसमें भी सिंगल और डबल बेडरूम

राज्य सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय परियोजनाओं के विकास और औद्योगिक भूमि के आवंटन के लिए नए नियम तय किए हैं। इनके तहत औद्योगिक क्षेत्रों में प्लॉट आधारित आवासीय विकास, रो-हाउसिंग, स्वतंत्र आवासीय भूखंड और भूखंडों के उप-विभाजन की अनुमति नहीं होगी। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। हालांकि ये नियम सिर्फ नई परियोजनाओं के लिए होंगे। पहले से चल रही योजनाएं या निर्माण इससे प्रभावित नही होंगे। यहां केवल फ्लैट या बहुमंजिला समूह आवास परियोजनाएं विकसित की जा सकेंगी। इन परियोजनाओं में सिंगल और डबल बेडरूम आवासीय इकाइयों के साथ छात्रावास तथा उनसे जुड़ी सामाजिक सुविधाएं भी बनाई जा सकेंगी। नियम अधिसूचित आवासीय भूमि पर विकसित होने वाली परियोजनाओं के साथ औद्योगिक इकाइयों को आवंटित भूमि पर बनाई जाने वाली कैप्टिव आवासीय सुविधाओं पर भी लागू होंगे। सभी परियोजनाओं के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति जरूरी होगी। विकास कार्य मास्टर प्लान, विकास योजना, भवन उपविधियों, भूमि आवंटन की शर्तों, अग्नि सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी मानकों के अनुरूप करने होंगे। जमीन की कीमत ₹250 प्रति वर्गमीटर से कम नहीं सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि के मूल्य निर्धारण का आधार भी तय किया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विकसित या विकसित किए जाने वाले औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन का मूल्य संबंधित क्षेत्र की असिंचित कृषि भूमि के लिए निर्धारित कलेक्टर गाइडलाइन को 0.6 से भाग देकर निकाला जाएगा। हालांकि, किसी भी स्थिति में भूमि का मूल्य ₹250 प्रति वर्गमीटर से कम नहीं होगा। यदि औद्योगिक क्षेत्र में तय गणना के आधार पर भूमि का मूल्य ₹250 प्रति वर्गमीटर से कम आता है, तो एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक को संचालक मंडल की अनुमति से मूल्य बढ़ाने का अधिकार होगा। अतिरिक्त क्षेत्रफल पर कोई छूट नहीं निर्धारित निवेश सीमा से अधिक भूमि के लिए आवेदन करने पर अतिरिक्त क्षेत्रफल पर छूट नहीं मिलेगी। उदाहरण के लिए, यदि कोई इकाई संयंत्र और मशीनरी में ₹200 करोड़ का निवेश करती है और उसे 25 हेक्टेयर जमीन आवंटित होती है, तो 20 हेक्टेयर पर ही छूट मिलेगी। बाकी 5 हेक्टेयर पर छूट लागू नहीं होगी। नियमों में प्रीमियम की गणना के दौरान 40 हेक्टेयर तक भूमि आवंटन पर भूमि के मूल्य में 50% छूट का भी उल्लेख है। अन्य औद्योगिक प्रयोजनों के लिए प्रीमियम की गणना में भी भूमि के मूल्य पर 50% छूट का प्रावधान दिया गया है। अनुपयोगी जमीन का हिस्सा दूसरे को हस्तांतरित कर सकेंगे औद्योगिक इकाइयों को आवंटित जमीन का पूरा उपयोग नहीं होने की स्थिति में अनुपयोगी भूमि के विभाजन और हस्तांतरण के लिए भी नियम बनाए गए हैं। इसके तहत संचालित इकाई को आवंटित भूमि में से अधिकतम 50% या कम से कम 5,000 वर्गमीटर तक की अनुपयोगी जमीन अलग सड़क मार्ग उपलब्ध होने की शर्त पर विभाजित कर हस्तांतरित की जा सकेगी। इसके लिए मूल आवंटी को हस्तांतरण की तारीख तक भू-भाटक, संधारण शुल्क और अन्य सभी बकाया राशि का भुगतान करना होगा। हस्तांतरण के लिए मूल आवंटन अभिलेख में आवश्यक संशोधन करने के साथ समर्पण अभिलेख निष्पादित और पंजीकृत कराना होगा। भूमि आवंटन के अधिकार भी तय औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि और भवन आवंटन के लिए एमपीआईडीसी के अधिकारियों के अधिकार भी निर्धारित किए गए हैं। नियमों में क्षेत्रीय कार्यालय के कार्यकारी संचालक और प्रबंध संचालक की भूमिकाएं तय की गई हैं। औद्योगिक भवनों के आवंटन का अधिकार एमपीआईडीसी के क्षेत्रीय कार्यालय के कार्यकारी संचालक को दिया गया है। औद्योगिक क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक प्रयोजन के लिए भूमि आवंटन के संबंध में भी अलग सीमा तय की गई है। इसके अनुसार, क्षेत्रीय कार्यालय के कार्यकारी संचालक 10,000 वर्गमीटर तक और प्रबंध संचालक 10,000 वर्गमीटर से अधिक भूमि आवंटित कर सकेंगे। नियमों में पीपीपी मॉडल पर औद्योगिक आवास परियोजनाएं शुरू करने का प्रावधान भी है। निजी औद्योगिक पार्कों के लिए भी दिशा-निर्देश राज्य सरकार ने निजी औद्योगिक पार्क, निर्यात पार्क, प्लग-एंड-प्ले पार्क और लॉजिस्टिक पार्क के लिए भूमि आवंटन संबंधी दिशा-निर्देश भी तय किए हैं। इनके तहत निजी डेवलपर को परियोजना का पूरा विकास अपने खर्च और जोखिम पर करना होगा। जरूरत के अनुसार डेवलपर विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) बना सकेगा और परियोजना की मान्यता, प्रोत्साहन तथा नियमों के अनुपालन के लिए एमपीआईडीसी के साथ समझौता कर सकेगा। नियम नए निर्माण के लिए एमपी सरकार द्वारा जारी यह नियम सिर्फ नए निर्माण पर लागू होंगे। इंडस्ट्रियल एरियों में रह रहे पुराने लोग व आवासीय परिसरों में यह लागू नहीं होंगे।न ही वे किसी तरह से प्रभावित होंगे। ये खबर भी पढ़ें… ₹116 करोड़ की बिल्डिंग में लिफ्ट बंद, मेंटेनेंस नहीं राजधानी के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर अब भाजपा के ही विधायक भगवानदास सबनानी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में उन्होंने कहा- मैं बुरे शब्दों में कह रहा हूं। शहर का नाश कर दिया हमने। बदले में शहर को हम कुछ नहीं दे पाए। कुछ भी नहीं। ये स्मार्ट सिटी है।पूरी खबर पढ़ें

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here