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आठ साल से पड़ी गैस, इसके लीकेज से 49 बीमार:मास्क और रुमाल बांधकर पहुंचे  फायर फाइटर, बोले– उल्टियां और घबराहट होने लगी

झाबुआ में पद्मावती नदी किनारे बने वाटर फिल्टर प्लांट में क्लोरीन गैस लीक होने से 49 लोग बीमार हुए। घटना के बाद नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर पहुंची। पड़ताल में सामने आया कि घटना नगर परिषद प्रशासन की लापरवाही से हुई थी। पिछले आठ साल से टैंक में गैस पड़ी थी, जिस पर ध्यान ही नहीं दिया गया। दूसरी लापरवाही ये थी कि रेस्क्यू के समय फायर फाइटर के पास सेफ्टी उपकरण भी नहीं थे। बता दें, कि शुक्रवार (3 अप्रैल) को हुए हादसे में नगर परिषद के सात कर्मचारी और आसपास के 42 लोगों को थांदला के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ज्यादातर लोग दूसरे दिन दोपहर तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखे गए थे। फिलहाल सभी की हालत खतरे से बाहर है। टैंक को पानी में डाला, जिससे असर कम हो थांदला में पद्मावती नदी के किनारे नगर परिषद का वॉटर फिल्टर प्लांट स्थित है। यहीं से पानी फिल्टर होकर क्षेत्र के लोगों को सप्लाई किया जाता है। शनिवार को यहां प्लांट की सफाई की जा रही थी। वहां परिषद के कर्मचारी भी मौजूद थे। क्लोरीन से भरे टैंक को पानी में डाल दिया गया है, जिससे गैस बेअसर हो गई। गैस की चपेट में आते ही होने लगी घबराहट फायर ब्रिगेड ड्राइवर मेहबूब छिपा सूचना के बाद सबसे पहले फिल्टर प्लांट पर पहुंचे थे। मेहबूब बताते हैं कि शाम करीब 5:30 बजे का वक्त था। सूचना मिली कि वॉटर फिल्टर प्लांट पर क्लोरीन गैस लीकेज हो गई है। टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वहां गैस लीक हो रही थी। गैस पर पानी डाला, तो गैस ऊपर की ओर आई। मुझे घबराहट होने लगी, तो मैं गाड़ी से उतर गया। उल्टी होने लगी। मुझे बचाने के लिए भांजा सन्नी और राजेश निनामा आए। वह भी गैस की चपेट में आ गए। सूचना पर प्रशासन के अफसर भी पहुंच गए। वहां अफरा–तफरी मच गई। पुरानी मंडी के इलाके में करीब 400 घर हैं। हवा उसी तरफ बह रही थी। एक के बाद एक 49 लोगों को सांस लेने में दिक्कत, उल्टी और घबराहट होने लगी। लोगों को नगर परिषद क्षेत्र से बाहर आने के लिए बोलकर इलाके को खाली करवा दिया गया। परिषद को पता ही नहीं, टैंक में गैस है परिषद के इंजीनियर पप्पू बारिया ने बताया कि साल 2017-18 में नल–जल योजना के तहत जल शुद्धिकरण के लिए इस प्लांट को बनाया गया था। उस वक्त 600 किलो का टैंक क्लोरीन गैस का भरवाया था। इसका उपयोग कुछ समय तक पानी को फिल्टर करने में किया गया। करीब आठ महीने बाद ठेकेदार पानी फिल्टर करने के लिए क्लोरीन के बजाय ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग करने लगा। बारिया ने बताया कि प्लांट को 2024 – 25 में टेंडर पूरा होने पर ठेकेदार ने नगर परिषद को इसे हैंडओवर कर दिया। इससे पहले, देखरेख का जिम्मा ठेकेदार के पास था। बड़ी बात ये है कि टैंक में करीब 50 किलो से ज्यादा गैस बची रही। इस पर न तो ठेकेदार ने ध्यान दिया और न ही हैंडओवर के बाद नगर परिषद के अफसरों ने देखा। नतीजा, अचानक गैस लीकेज हो गई। सेफ्टी उपकरण भी मौजूद नहीं फायर ब्रिगेड ड्राइवर मेहबूब और कर्मचारी राजेश निनामा का कहना है कि रेस्क्यू के दौरान उनके पास सेफ्टी उपकरण के नाम पर साधारण मास्क था। कुछ लोग ने तो मुंह से रुमाल बांध रखा था। इस कारण चक्कर आने लगे, जबकि नियमानुसार स्पेशल मास्क, गॉगल्स, बूट, दस्ताने और रेजिडेंट सूट हाेना चाहिए। दरअसल, थांदला में फायर ब्रिगेड कर्मचारियों के पास सेफ्टी उपकरण के नाम पर कुछ नहीं है। विधायक वीरसिंह भूरिया ने बताया कि बचाव कार्य के दौरान इस तरह की लापरवाही दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं, नगर परिषद की नेता प्रतिपक्ष वंदना भाभर के प्रतिनिधि सुधीर भाभर ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी। सीएमओ कमलेश जायसवाल ने कहा कि बॉल्व में लीकेज होने से रिसाव हुआ था। उन्होंने दावा किया कि सभी प्रभावितों हैंको समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई है। स्थिति नियंत्रण में है। पीड़ितों को दो लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए शनिवार को महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष रीना बोरासी झाबुआ दौरे पर आईं। उन्होंने कहा कि घटना गंभीर है। वाॅटर फिल्टर प्लांट पर सुरक्षा के प्रबंध नहीं हैं। कर्मचारियों को सुरक्षा किट भी उपलब्ध नहीं कराई गई थी। नतीजा, गैस लीक होने लगी। इसका फेफड़ों पर होता है। प्लांट पर केमिकल, रेजिडेंट सूट, दस्ताने, गॉगल्स और अलार्म सिस्टम होना जरूरी है, जो कि नहीं पाया गया। प्रदेश सरकार घटना की अनदेखी करते हुए दबाने की कोशिश की जा रही है। मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाना चाहिए। साथ ही, प्लांट पर सुरक्षा के प्रबंध नहीं करने के लिए जिम्मेदारों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जाए। पीड़ितों का इलाज इंदौर के बड़े अस्पताल में कराया जाए। यह भी पढ़ें- वाटर फिल्टर प्लांट में गैस लीक, 49 बीमार मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के पद्मावती नदी किनारे बने वाटर फिल्टर प्लांट में शुक्रवार शाम क्लोरीन गैस लीक हो गई। 7 कर्मचारियों समेत करीब 49 लोग बीमार हो गए हैं, जिनमें से कई लोगों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। मामला थांदला इलाके की पुरानी मंडी का है। पढ़ें पूरी खबर

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