“देखो, ऐसे चोरी करना है… पुलिस या कोई आ जाए तो कैसे बचना है… सीसीटीवी से कैसे बचना है… और सबसे जरूरी, चोरी के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना है।” जबलपुर पुलिस के मुताबिक, ये बातें किसी फिल्म के डायलॉग नहीं, बल्कि चोरी करने के लिए युवाओं और नाबालिगों को दी जाने वाली ट्रेनिंग का हिस्सा थीं। इस कथित ‘चोरी की पाठशाला’ का मास्टरमाइंड था पप्पू मल्लाह उर्फ चकमा। आठवीं तक पढ़े पप्पू पर जबलपुर और दूसरे राज्यों में चोरी के 70 से ज्यादा मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। पुलिस के मुताबिक, पप्पू ने भोपाल में किराए का बड़ा मकान लेकर वहां चोरी की ट्रेनिंग शुरू कर दी थी। वह नाबालिगों और युवाओं को सूने मकानों की रैकी से लेकर ताला तोड़ने, पुलिस और मकान मालिक से बचने तथा भेष बदलने तक के तरीके सिखाता था। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ही उन्हें चोरी के लिए भेजा जाता था। पप्पू खुद मौके पर जाने के बजाय दूर रहकर निगरानी करता था। तिलवारा थाना पुलिस ने रविवार को पप्पू को पुराने भोपाल से गिरफ्तार किया। पुलिस के पहुंचने से पहले उसके साथ ट्रेनिंग लेने वाले युवक वहां से निकल चुके थे। अब पुलिस उनके साथ ही चोरी की अन्य वारदातों और नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। पुलिस ने पप्पू की पत्नी दीक्षा और उसके तीन गुर्गों को भी गिरफ्तार किया है। रोज 3-4 घंटे चलती थी ‘क्लास’, थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल भी पुलिस की जांच में सामने आया कि पप्पू के यहां रोजाना करीब 3 से 4 घंटे की क्लास लगती थी। इसमें चोरी से जुड़ी बातें समझाने के साथ प्रैक्टिकल भी कराया जाता था। पुलिस के अनुसार, पप्पू युवाओं और नाबालिगों को बताता था कि सूने मकान की पहचान कैसे करनी है, रैकी किस तरह करनी है, ताला कैसे तोड़ना है और वारदात के दौरान पुलिस या मकान मालिक पहुंच जाए तो कैसे बचना है। सीसीटीवी से बचने और मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करने जैसी बातें भी उन्हें बताई जाती थीं। पत्नी करती थी रैकी, रात 2 से 4 बजे भेजे जाते थे गुर्गे पुलिस के मुताबिक, पप्पू की पत्नी दीक्षा भी इस नेटवर्क में उसके साथ रहती थी। वह दिन में और शाम को घूमने के बहाने कॉलोनियों में जाती और ऐसे मकानों पर नजर रखती, जिन पर ताला लगा होता था। पहले दिन में रैकी की जाती और रात करीब 9 से 10 बजे दोबारा यह देखा जाता कि मकान मालिक वापस आया या नहीं। जब घर पूरी तरह खाली होने की पुष्टि हो जाती तो पप्पू को इसकी जानकारी दी जाती। इसके बाद रात करीब 2 से 4 बजे के बीच प्रशिक्षित युवक चोरी करने के लिए घर में घुसते थे। पुलिस के मुताबिक, पप्पू इस समय को इसलिए चुनता था क्योंकि इस दौरान ज्यादातर लोग गहरी नींद में होते हैं। तिलवारा में करीब 10 लाख की चोरी के बाद फरार था पप्पू पुलिस के मुताबिक, 22 मार्च 2026 की दरमियानी रात पप्पू ने पत्नी दीक्षा और तीन अन्य युवकों, जिनमें दो नाबालिग थे के साथ अर्नव विहार कॉलोनी के पास एक सूने मकान को निशाना बनाया था। यहां से जेवरात और अन्य सामान चोरी किया गया था। फरियादी की शिकायत पर तिलवारा थाने में अपराध क्रमांक 119/2026 के तहत BNS की धारा 331, 305 और 317 में केस दर्ज किया गया था। करीब 10 लाख रुपए की चोरी के इस मामले में पुलिस ने दो नाबालिगों सहित एक युवक और दीक्षा को गिरफ्तार कर लिया था। दीक्षा को बाद में कोर्ट से जमानत मिल गई। पप्पू तभी से फरार था और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। अब उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे चोरी की अन्य वारदातों के बारे में पूछताछ कर रही है। ताला तोड़ने से भेष बदलने तक की ट्रेनिंग पुलिस के मुताबिक, पप्पू की ‘पाठशाला’ में चोरी के कई स्तरों की ट्रेनिंग दी जाती थी। इसमें रैकी करना, ताला तोड़ना, पुलिस की नजर से बचना और जरूरत पड़ने पर भेष बदलना शामिल था। लगातार चोरी करने और पुलिस को चकमा देकर फरार रहने के कारण पप्पू को पुलिस रिकॉर्ड में ‘चकमा’ के नाम से भी जाना जाने लगा। पुलिस का कहना है कि चोरी में माहिर होने वाले युवकों को ही वह आगे वारदातों के लिए भेजता था। पप्पू खुद चोरी वाले मकान में जाने से बचता था। वह आसपास रहकर पुलिस और लोगों की गतिविधियों पर नजर रखता था। किसी के आने की भनक लगने पर वह अपने साथियों को संकेत देकर सावधान करता था। चोरी के बाद रकम का बंटवारा पुलिस पूछताछ में पप्पू ने चोरी के माल के बंटवारे और इस्तेमाल को लेकर भी जानकारी दी है। पुलिस के मुताबिक, चोरी के जेवर और नकदी का एक हिस्सा वह अपने साथियों को देता था, कुछ रकम पत्नी को देता था और बाकी रकम जुआ और शराब में खर्च करता था। चोरी के जेवरात वह परिचित सुनारों को बेचता था। पुलिस का कहना है कि पप्पू जबलपुर और आसपास के जिलों में होने वाले जुआ फड़ों में भी जाता था और चोरी से मिली रकम का बड़ा हिस्सा वहां गंवा देता था। एमपी के साथ दूसरे राज्यों में भी केस पुलिस के मुताबिक, पप्पू मल्लाह उर्फ चकमा के खिलाफ मध्यप्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में भी चोरी के मामले दर्ज हैं। जबलपुर जिले के अलग-अलग थानों में उसके खिलाफ 70 से ज्यादा चोरी की वारदातों के प्रकरण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब उसकी गिरफ्तारी के बाद पुराने मामलों को भी खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसके नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और किन-किन वारदातों में उसकी भूमिका रही है। पुलिस से बचने के लिए बदल लेता था हुलिया तिलवारा टीआई ब्रजेश मिश्रा के मुताबिक, पप्पू पुलिस से बचने के लिए अपना हुलिया बदल लेता था। कई बार वह पुलिस के सामने से भी निकल जाता था, लेकिन पहचान नहीं हो पाती थी। टीआई के मुताबिक, पप्पू की गिरफ्तारी के बाद अब उसके साथियों की तलाश की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि भोपाल में चल रही चोरी की कथित पाठशाला से कितने युवक और नाबालिग जुड़े थे और उन्हें किन-किन वारदातों में भेजा गया। ये खबर भी पढ़ें… कारोबारी को हनीट्रैप में फंसाया, धमकी देकर मांगे 20 लाख जबलपुर में एक रियल एस्टेट कारोबारी को हनीट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि महिला ने कारोबारी को झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर 20 लाख रुपए मांगे। पूरी खबर पढ़ें
