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अवैध खनन पर हाईकोर्ट का प्रहार:माफिया के मददगार खनन अधिकारी को कोर्ट ने हटाया, SDM जूही भी हटीं

अवैध खनन मामले में हाईकोर्ट ने गुरुवार को ग्वालियर के प्रशासनिक और खनिज अमले पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की। 17 जुलाई को प्रभारी खनिज अधिकारी घनश्याम यादव के आचरण पर गंभीर टिप्पणी के बावजूद शासन ने कोई कार्रवाई नहीं की, तो गुरुवार को कोर्ट ने स्वयं उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्य करने से रोक दिया। इससे पहले कोर्ट ने इस प्रकरण की प्रभारी अधिकारी (ओआईसी) एसडीएम जूही गर्ग को भी बदल दिया। राज्य सरकार को निर्देश दिए गए कि ग्वालियर में तत्काल ईमानदार और सक्षम खनिज अधिकारी की पदस्थापना की जाए। तब तक पूरे खनिज विभाग की जिम्मेदारी कलेक्टर संभालेंगी। हाईकोर्ट ने कलेक्टर को शपथपत्र देकर यह स्पष्ट करने का निर्देश भी दिया कि क्या वे अवैध खनन रोकने में सक्षम हैं या नहीं? यह निर्देश उस हलफनामे के बाद दिया गया, जिसमें एसडीएम जूही गर्ग ने स्वीकार किया कि बिलौआ क्षेत्र में खदानों तक पहुंचने के एक से अधिक रास्ते हैं और सभी रास्तों को पूरी तरह बंद करना व्यवहारिक नहीं है। अदालत ने इसे स्थानीय प्रशासन की असमर्थता माना और आगे से इस पूरे मामले में केवल कलेक्टर को जवाबदेह ठहरा दिया। बिलौआ: अवैध खनन से गिरने की कगार पर ट्रांसमिशन पोल मिलीभगत से अफसरों का संरक्षण पाकर खनन माफिया बिलौआ में अवैध तरीके से सिर्फ पहाड़ खत्म नहीं कर रहे, बल्कि आम रास्ता, बिजली सप्लाई इंफ्रास्ट्रक्चर का सबसे अहम पार्ट माने जाने वाले ट्रांसमिशन पोल तक मशीनें लगाकर पत्थर निकाल रहे हैं। यहां 132 केवी की ट्रांसमिशन सप्लाई टॉवर के पास तक माफिया पहुंचकर काले पत्थर का अवैध खनन कर रहे हैं‌। इस खनन के कारण टॉवर के आसपास की जगह पोली होती जा रही है। िस्थति यह है कि टॉवर कभी भी धाराशायी हो सकता है। ऐसा होने पर न सिर्फ बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा नुकसान होगा, बल्कि अंचल के कई क्षेत्रों की बिजली सप्लाई ठप हो जाएगी। इस टॉवर के आसपास की जमीन पर खनन की शिकायत प्रभारी खनिज अधिकारी घनश्याम यादव को पिछले वर्ष की जा चुकी है, लेकिन साठगांठ के कारण कोई कार्रवाई तो दूर, मौके पर टीम तक नहीं जा रही। नियम ये: ट्रांसमिशन टॉवर के चारों ओर 27-27 मीटर नहीं हो सकता खनन केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के विद्युत सुरक्षा व सप्लाई सुरक्षा अधिनियम 2023 के नियम 63(I) अनुसार 132 केवी लाइनों/टॉवर के पास से 27-27 मीटर दूर तक कोई खनन या निर्माण प्रतिबंधित है। सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रकरण नंबर 10951/2016 में स्पष्ट किया है कि ट्रांसमिशन लाइन की सुरक्षा व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाए। इसके आसपास किसी प्रकार की कोई गतिविधि नहीं हो।
{कंपनी को चिंता नहीं: बिलौआ में ट्रांसमिशन टॉवर की स्थिति को लेकर मप्र ट्रांसमिशन पावर कंपनी को कोई चिंता नहीं है। शिकायत भोपाल-जबलपुर तक अधिकारियों तक पहुंच चुकी, पर कोई कार्यवाही नहीं की। अब आप और हम नहीं मिलेंगे सुनवाई के दौरान कोर्ट ने घनश्याम यादव से कहा ‘अब आप और हम शायद नहीं मिलेंगे, लेकिन यदि भूतकाल में कोई पाप किया है तो एफआईआर जरूर होगी।’ -शेष पेज 9 पर दलील- बिजली काटी, कोर्ट- खनन में क्या काम? सुनवाई के दौरान घनश्याम यादव ने दलील दी कि जिन खदानों पर रोक लगी है, उनके बिजली कनेक्शन काट दिए हैं। इस पर कोर्ट ने पूछा कि माइनिंग में बिजली का क्या काम है? खनन किस मशीन से होता है? वे स्पष्ट रूप से मशीन का नाम तक नहीं बता सके। उन्होंने स्वीकारा खुदाई और पत्थरों की लोडिंग की मशीनें तथा क्रशर भी डीजल से चल सकते हैं।

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