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इंदौर के जंगलों में बाघों की लौटती दहाड़:चोरल-महू क्षेत्र बन रहा नया टाइगर कॉरिडोर, कई जगहों पर मिले हैं पंजों के निशान

इंदौर वनमंडल के घने जंगल इन दिनों बाघों और तेंदुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे हैं। घने वन क्षेत्र, पर्याप्त जल स्रोतों की उपलब्धता और शिकार (प्रेय) प्राणियों की बढ़ती संख्या ने इस इलाके को बड़े मांसाहारी वन्यजीवों के लिए अनुकूल बना दिया है। जनवरी-फरवरी के बीच चोरल क्षेत्र में तेंदुए के साथ ही बाघ की मौजूदगी के ठोस प्रमाण मिले हैं, जहां कई जगहों पर पंजों के निशान (पगमार्क) और विष्ठा पाई गई। तेंदुओं की गतिविधियां तो रोजाना देखी जा रही हैं। दिसंबर के तीसरे सप्ताह में हुई बाघ गणना (ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन) के दौरान इंदौर वनमंडल में बाघ की काफी हलचल दर्ज की गई। इंदौर-चोरल-महू का जंगल पहले से ही बाघों के लिए संभावित क्षेत्र माना जाता रहा है। गणना में नाहरझाबुआ-भड़किया, उमठ-वेका (चोरल) और मलेंडी-मांगलिया (महू) जैसे इलाकों में पंजों के निशान और अन्य प्रमाण मिले। वन अधिकारियों का कहना है कि बाघ अब उदयनगर से बड़वाह तक अपना नया टेरिटरी (क्षेत्र) बना रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, खिवनी अभयारण्य से उदयनगर-बड़वाह तक का जंगल क्षेत्र बाघों के लिए सुरक्षित और अनुकूल है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (देहरादून) भी इसे संभावित टाइगर कॉरिडोर मानता है। पिछले कुछ वर्षों में बाघों ने अपना दायरा बढ़ाया है। सड़क, रेलवे और अन्य विकास परियोजनाओं से जंगलों पर असर पड़ा, जिससे वन्यजीव नए सुरक्षित इलाकों की तलाश में निकले। यही वजह है कि 2022 से अब तक चोरल, महू और मानपुर क्षेत्रों में बाघ की गतिविधियां बढ़ी हैं। कैमरा ट्रैप से निगरानी
बाघ और तेंदुए की मूवमेंट पर नजर रखने के लिए चोरल के सेंटल-मेंटल, उमठ, बेका, राजपुरा, कुलथाना; महू के आशापुर, बड़िया, मांगलिया; इंदौर के नाहरझाबुआ, खुडैल और सिवनी जैसे कई स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। इन कैमरों से मिली तस्वीरें और डेटा विशेषज्ञों के अध्ययन के लिए वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून भेजा जा रहा है, जिससे बाघों की संख्या, मूवमेंट और नए कारिडोर की पुष्टि हो रही है। बाघों की बढ़ती गतिविधि के कारण चुनौतियां और संरक्षण की जरूरत
विशेषज्ञ अभय जैन का मानना है कि इस नए बन रहे कॉरिडोर को संरक्षित करने से बाघों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सकती है। इसके लिए जंगलों की सुरक्षा, विकास कार्यों में संतुलन और नई संरक्षण गाइडलाइंस जरूरी हैं। इंदौर-चोरल-महू क्षेत्र में बाघ की बढ़ती मौजूदगी वन्यजीव संरक्षण की सफलता का संकेत है, लेकिन मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचाव भी अहम है। वन विभाग गंभीर
तेंदुओं की संख्या बाघों से तेजी से बढ़ रही है। हाल ही में भी कई प्रमाण और कैमरा ट्रैप तस्वीरें मिली हैं। डीएफओ इंदौर वनमंडल लाल सुधाकर सिंह ने कहा कि वन विभाग इनकी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है। सूचना तंत्र मजबूत किया जाएगा। गर्मियों में आग, अतिक्रमण और अवैध कटाई रोकने के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे, क्योंकि जंगल में डिस्टर्बेंस का असर वन्यप्राणियों पर सीधा पड़ता है।” यह विकास न सिर्फ संरक्षण की जीत है, बल्कि इंदौर के आसपास के जंगलों को एक नया वाइल्डलाइफ हब बनाने की ओर इशारा भी करता है। एमपी में बाघ और तेंदुए की संख्या ये खबर भी पढ़ें… BTR से 3.5 साल की बाघिन मुकुंदरा भेजी गई उमरिया के विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से साढ़े तीन साल की एक बाघिन को राजस्थान के मुकुंदरा टाइगर रिजर्व भेजा गया है। यह पहली बार है जब बांधवगढ़ से किसी बाघिन को मुकुंदरा शिफ्ट किया गया है। बाघिन ने लगभग 700 किलोमीटर की यात्रा अधिकारियों और डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में पूरी की।पूरी खबर पढ़ें

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