मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु दर की चिंताजनक स्थिति को देखते हुए सरकारी अस्पतालों में नई पहल की जा रही है। इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एमटीएच में डिलीवरी के बाद महिलाओं में होने वाले ब्लीडिंग को सटीक रूप से मापने के लिए कैलिब्रेटेड ब्लड कलेक्शन ड्रेप का उपयोग शुरू किया है। संभाग के सरकारी अस्पतालों में यह तकनीक पहली बार लागू की गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तकनीक से मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिलेगी। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में पहले से इसका उपयोग किया जा रहा है, जहां सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अस्पताल में ब्लड कलेक्शन ड्रेप सामाजिक संस्था और डॉ. सुमित्रा यादव की पहल पर उपलब्ध कराए गए हैं। हाल ही में इंदौर में आयोजित गायनोकोलॉजी की कॉन्फ्रेंस में इसके उपयोग को लेकर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को ट्रेनिंग भी दी गई। इस ट्रेनिंग में इंदौर सहित पूरे संभाग के एक्सपर्ट, शामिल हुए। दरअसल, अब तक डिलीवरी के दौरान डॉक्टर्स ब्लीडिंग की मात्रा का आकलन अपने अनुभव के आधार पर करते थे। नई तकनीक के माध्यम से को मिलीलीटर में मापा जा सकेगा। इससे डिलीवरी के बाद होने वाली ब्लीडिंग (PPH) की स्थिति का सटीक आंकलन संभव होगा। एक्सपर्ट्स के अनुसार ज्यादा ब्लीडिंग मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। ऐसे में यह तकनीक डॉक्टरों को तुरंत और सटीक निर्णय लेने में मदद करेगी तथा मरीजों की सुरक्षा बढ़ाएगी। प्रदेशभर से आते हैं मरीज एमटीएच अस्पताल प्रदेश का प्रमुख प्रसूति केंद्र है, जहां दूर-दराज के जिलों से बड़ी संख्या में महिलाएं इलाज के लिए पहुंचती हैं। अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि यह पहल हजारों गर्भवती महिलाओं के लिए राहतभरी साबित होगी और भविष्य में इसे अन्य शासकीय अस्पतालों में भी लागू किया जा सकता है। मातृ मृत्यु के ये हैं खास कारण मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से अधिक बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर लगभग 173 मातृ मृत्यु दर्ज की गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति अपेक्षाकृत अधिक गंभीर है। इसके कारण समय पर उपचार की कमी, पोषण की कमी और एनीमिया हैं। इन कारणों के चलते मध्य प्रदेश में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
