मानसूनी सीजन के इस सबसे स्ट्रॉन्ग सिस्टम की वजह से पूरा मध्य प्रदेश तरबतर हो गया है। भोपाल-उज्जैन संभाग में बाढ़ आ गई। नदियां उफान पर हैं, जबकि डैम-तालाब में पानी आ गया है। यह सिस्टम बुधवार को भी एक्टिव रहेगा। जिसका सबसे ज्यादा असर इंदौर संभाग में देखने को मिलेगा। भोपाल और गुना में बारिश के चलते बुधवार को स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। मौसम केंद्र (IMD) ने इंदौर-उज्जैन संभाग के 5 जिले रतलाम, झाबुआ, धार, बड़वानी और इंदौर में भारी बारिश की चेतावनी दी है। अगले 24 घंटे में यहां 4 इंच या इससे ज्यादा पानी गिर सकता है। वहीं, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, आलीराजपुर, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होगी। 527 बाढ़ प्रभावितों का किया रेस्क्यू प्रदेश में पिछले 3 दिन से बारिश हो रही है। मंगलवार को भोपाल समेत आधे प्रदेश में तेज बारिश का दौर रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य आपदा प्रबंधन के सिचुएशन रूम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बाढ़ प्रभावित इलाकों को देखा। प्रभावित लोगों का हाल भी जाना। अधिकारियों ने बताया कि अभी तक प्रदेश में 527 बाढ़ प्रभावितों का रेस्क्यू किया है। भोपाल में 2 दिन में 8 इंच पानी गिर चुका है। यहां सोमवार-मंगलवार को सभी स्कूल बंद रहे। करीब 200 मकानों में ढाई फीट तक पानी घुस गया। रास्ते घंटों बंद रहे। कई जगह ट्रांसफार्मर और डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स तक पानी पहुंचने पर सुरक्षा के लिए सप्लाई बंद करनी पड़ी। 24 घंटे की बात करें तो राजगढ़ के ब्यावरा में 9 इंच, खिलचीपुर में 8 इंच, जीरापुर में 7.7 इंच, राजगढ़ शहर में 4.4 इंच, नरसिंहपुर में 3.7 इंच, पचोर में 3.7 इंच, सारंगपुर में 3.6 इंच बारिश हुई है। इसी तरह आगर-मालवा के सोयतकलां में 7.7 इंच, आगर शहर में 3.6 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। शाजापुर के गुलाना में 3.8 इंच, गुना के कुंभराज में 3.7 इंच, शाजापुर शहर में 3.4 इंच, मंदसौर के गरोठ में 2.7 इंच, उज्जैन के महिदपुर और माकड़ोन में ढाई इंच पानी गिरा है। मंगलवार को हुई बारिश की तस्वीरें…
यह सिस्टम एक्टिव
इंदौर क्षेत्र में लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) और मानसून ट्रफ एक्टिव है। वहीं, दक्षिणी हिस्से से एक ट्रफ गुजर रही है। इस वजह से प्रदेश में पिछले 72 घंटे से बारिश हो रही है। बुधवार को भी असर रहेगा। आगे ऐसा रहेगा मौसम?
मौसम एक्सपर्ट शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में एक नया चक्रवात एक्टिव हुआ है। जिसके प्रभाव से लगभग 12 अगस्त के आसपास नया लो प्रेशर एरिया बनने की संभावना है। ऐसे में प्रदेश के लिए अगले चार दिन महत्वपूर्ण रहेंगे। 45 जिलों में कम बारिश
प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 18% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में 4% से 52% तक कम बारिश हुई है। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन, बड़वानी और विदिशा में औसत से 5% से 46% कम पानी गिरा है। 10 जिलों में ज्यादा बारिश
IMD की माने तो भोपाल, गुना, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, अनूपपुर, भिंड, बुरहानपुर, देवास और खरगोन में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। मैप से समझें, 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम जून के बाद जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई। आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, जुलाई का कोटा तो फुल हो गया, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच
प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है। अब जानिए, एमपी के 5 बड़े शहरों में बारिश का रिकॉर्ड… भोपाल में 2006 में अगस्त में 35 इंच बारिश का रिकॉर्ड
भोपाल में अगस्त में मानसून जमकर बरसता है। इस महीने राजधानी में औसत साढ़े 35 इंच तक बारिश हो चुकी है, जो साल 2006 में हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश करीब 12 इंच 14 अगस्त 2006 को हुई थी। पिछले सालों की बात करें तो 2015 और 2022 में 30 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल में इस महीने औसत 14 दिन बारिश होती है। इस दौरान 13 दिन तक पानी गिर जाता है। जुलाई जैसे ही सिस्टम एक्टिव होते हैं। इंदौर में 1944 में गिरा था 28 इंच पानी
इंदौर में अगस्त महीने में औसत 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड है, जो साल 1944 में दर्ज किया गया था। 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 22 अगस्त 2020 को बनाया था। इस दिन साढ़े 10 इंच पानी गिरा था। पिछले 10 साल में दो बार 17 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इंदौर में अगस्त महीने की औसत बारिश 10 से 11 इंच है। महीने में 12 से 13 दिन तक बारिश होती है। ग्वालियर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड
ग्वालियर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड है, जो 10 अगस्त 1927 को बना था। सर्वाधिक मासिक बारिश वर्ष 1916 में 28 इंच हुई थी। इस महीने की औसत बारिश साढ़े 9 इंच है। एवरेज 12 दिन बारिश होती है। जबलपुर में 102 साल पहले गिरा था 44 इंच पानी
जबलपुर में एक महीने में 44 इंच बारिश का रिकॉर्ड है। 102 साल पहले यानी, वर्ष 1923 में अगस्त महीने में बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिया था। इसी साल 20 अगस्त को 24 घंटे में ही 13 इंच बारिश हुई थी। यहां बादल फटने जैसी स्थिति बनी थी। जबलपुर में इस महीने की औसत बारिश 18 इंच है। करीब 16 दिन तक पानी गिरता है। पिछले 10 साल की बात करें तो साल 2019 में यहां 30.61 इंच बारिश हुई थी। उज्जैन में अगस्त में जमकर होती है बारिश
उज्जैन में साल 2006 में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड बना था। इस साल अगस्त महीने में करीब 35 इंच बारिश हुई थी। इसी साल 24 घंटे में सर्वाधिक 12 इंच बारिश का रिकॉर्ड 10 अगस्त को बना था। उज्जैन में अगस्त की औसत बारिश 10 इंच है। 10 से 11 दिन यहां बारिश होती है।
