भोपाल के काजी कैंप से गिरफ्तार मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह से पूछताछ में जांच एजेंसियों को चौंकाने वाले इनपुट मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक खालिद को पाकिस्तानी हैंडलर्स ने MP में नेटवर्क खड़ा करने, गरीब और बैचलर युवकों का ब्रेन वॉश करने और सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी सोच फैलाने का टास्क सौंप रखा था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि टेलीग्राम-वॉट्सएप ग्रुप्स के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। फराज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को जोड़ने और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े वीडियो साझा करने के लिए ग्रुप बनाता था। अब एटीएस डिजिटल गतिविधियों, विदेशी फंडिंग और पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही है। इधर, फराज की निशानदेही पर उसके साथी नईम अब्दुल्ला को यूपी के देवबंद से शनिवार को गिरफ्तार किया गया। कोर्ट में पेशी के बाद दोनों को 16 जून तक रिमांड पर भेजा गया है। नईम ने ही फराज को पाकिस्तान में बैठे हैंडलर से जोड़ने में भूमिका निभाई थी। काजी कैंप में फराज को घर से उठाया था एटीएस की टीम ने गुरुवार तड़के करीब 3:30 बजे काजी कैंप स्थित फराज के घर दबिश दी थी। कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया। करीब 12 अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम में तीन महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं। टीम ने पहले घर को चारों तरफ से घेर लिया, इसके बाद छत के रास्ते अंदर पहुंचकर फराज को हिरासत में लिया। बैटरी रिपेयरिंग भी करता था फराज जांच एजेंसियों के मुताबिक, फराज मोहल्ले में ही एक डॉक्टर के क्लीनिक पर काम करता था। इसके अलावा वह बैटरी रिपेयरिंग का काम भी करता था। उसकी अभी शादी नहीं हुई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसने देवबंद में रहकर धार्मिक शिक्षा ली थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात सहारनपुर निवासी नईम अब्दुल्ला से हुई थी। नईम के जरिए फराज का संपर्क कथित रूप से विदेशी हैंडलरों से हुआ। जांच एजेंसी को आशंका है कि दोनों के माध्यम से एक नेटवर्क तैयार करने की कोशिश की जा रही थी। अब एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि इस नेटवर्क से प्रदेश में कितने लोग जुड़े थे। शरिया कानून लागू करने की विचारधारा से प्रभावित एटीएस ने भोपाल कोर्ट को बताया कि फराज का मोबाइल जब्त कर लिया गया है और उसकी फोरेंसिक जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि मोबाइल डेटा से फराज के संपर्कों, गतिविधियों और कथित फंडिंग नेटवर्क से जुड़े लोगों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। एटीएस के अनुसार, फराज और नईम अब्दुल्ला साल 2047 तक देश में शरिया कानून लागू करने की विचारधारा से प्रभावित थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि कुछ कट्टरपंथी संगठन यह प्रचार करते हैं कि आजादी के बाद से विभिन्न सरकारों द्वारा एक विशेष समुदाय के साथ अन्याय किया गया है। जांच एजेंसियां इन दावों और आरोपियों के नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं। सोशल मीडिया पर सक्रियता की जांच पूछताछ में सामने आया है कि फराज चार वर्षों से टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर कई ग्रुप्स से जुड़ा हुआ था। एजेंसियां उसके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, चैट रिकॉर्ड और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि फराज किन ग्रुपों में सक्रिय था और किस तरह की सामग्री साझा करता था। एजेंसियां उसके संपर्कों की सूची तैयार कर रही हैं, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके। उसके मोबाइल की सीडीआर भी खंगाली जा रही है। गरीब तबके के युवा निशाने पर सूत्रों की मानें तो फराज ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि उसके पिता बेट्री रिपेयरिंग का काम करते हैं। परिवार में उसके अलावा तीन भाई और बहन हैं। पाकिस्तानी हैंडलर्स उसे गरीब तबके के युवाओं को जोड़ने की और मिशन को आगे ले जाने की सलाह देते थे। एटीएस आरोपी के बैंकिंग रिकार्डस भी खंगाल रही है, जिससे विदेशी फंडिंग का भी खुलासा हो सके। क्लीनिक और घर पर लटके मिले ताले शनिवार को फराज के घर और जिस खुशबू क्लीनिक में वह काम करता था, दोनों जगह ताले लटके मिले। कांग्रेस नगर स्थित उसके दो मंजिला मकान पर परिवार ताला लगाकर चला गया है। फराज खुशबू क्लीनिक में करीब 15 साल से कंपाउंडर के रूप में काम कर रहा था। शनिवार को क्लीनिक के शटर पर भी ताला लगा रहा। दैनिक भास्कर ने शनिवार को उसके मोहल्ले में जाकर पड़ताल की तो सामने आया कि इलाके में वह बेहद धार्मिक व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। वह और उसकी पत्नी घर पर कोचिंग चलाने के साथ हर मंगलवार सुबह कुरआन की कक्षाएं भी संचालित करते थे। घर पर देता था ट्यूशन, मंगलवार को होती थी कुरआन क्लास फराज कांग्रेस नगर की गली नंबर-2 में ऑक्सफोर्ड स्कूल के सामने अपने माता-पिता, पत्नी और तीन साल की बेटी के साथ रहता था। स्थानीय लोगों के अनुसार, वह और उसकी पत्नी पहली से दसवीं तक के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे। घर के बाहर लगे बोर्ड पर हर मंगलवार सुबह 10 से 12 बजे तक कुरआन क्लास संचालित होने का भी उल्लेख मिला। शुरुआत से यहीं काम कर रहा था फराज पड़ोसियों के अनुसार, फराज पिछले 15 साल से कांग्रेस नगर स्थित खुशबू क्लीनिक में कंपाउंडर के तौर पर कार्यरत था। क्लीनिक संचालक डॉ. परवेज अली का पंजीकरण ‘मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक, यूनानी चिकित्सा पद्धति एवं प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड’ में 26 सितंबर 2011 को दर्ज हुआ था। क्लीनिक शुरू होने के समय से ही फराज वहां काम कर रहा था। कार्रवाई के बाद से डॉ. परवेज अली भी क्लीनिक नहीं आए शुक्रवार सुबह काजी कैंप इलाके से फराज की गिरफ्तारी के बाद से खुशबू क्लीनिक पर ताला लगा हुआ है। कार्रवाई के बाद से डॉ. परवेज अली भी क्लीनिक नहीं पहुंचे हैं। उनका पंजीकरण 13 अगस्त 2029 तक वैध है। भास्कर ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका। जांच एजेंसियों के रडार पर संपर्क, परिचितों से भी होगी पूछताछ जांच एजेंसियां फराज के संपर्कों, गतिविधियों और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटा रही हैं। जांच में उसके कार्यस्थल, परिचितों और सामाजिक दायरे से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारी यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि वह किन-किन लोगों के संपर्क में था और उसकी गतिविधियों का दायरा कितना व्यापक था। ये खबर भी पढ़ें… भोपाल ATS ने संदिग्ध स्लीपर सेल फराज को पकड़ा भोपाल में एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के संदेह में एक युवक (स्लीपर सेल) को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान मोहम्मद फराज के रूप में हुई है। ATS ने शुक्रवार सुबह भोपाल के काजी कैंप इलाके में नन्हें बी की मस्जिद के पास से अरेस्ट किया। जिला कोर्ट में पेश किया।पूरी खबर पढ़ें
