MP के एक पूर्व अफसर की लग्जरी लाइफ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने अपने कृषि फार्म को न सिर्फ लग्जरी बना दिया बल्कि उसमें ऐशो आराम की हर एक चीज मौजूद रखी। इस अफसर के फार्म हाउस पर कॉटेज और स्वीमिंग पूल तो थे ही, इसने खुद के यूज के लिए एक तालाब भी बनवा रखा था। अब इस अफसर पर ईडी का शिकंजा कस चुका है। ईडी ने मप्र पीडब्ल्यू के पूर्व इंजीनियर इन चीफ(ईएनसी) गोविंद प्रसाद मेहरा की उस लग्जरी लाइफ स्टाइल वाली 67 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति को मंगलवार को अटैच कर लिया है। तलाशी में 3.51 करोड़ के जेवर, 8.79 लाख नकद मिले थे ईएनसी रहे मेहरा और उनके परिवार ने नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर तहसील स्थित ग्राम सैनी में 72 एकड़ भूमि पर विकसित ‘कस्तूरी कृषि फार्म’ बनाकर वहां स्विमिंग पूल और अन्य सुविधाएं बनाई थीं। ईडी ने जांच की शुरुआत लोकायुक्त पुलिस भोपाल द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की। एफआईआर में गोविंद प्रसाद मेहरा पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप था। जांच में सामने आया कि 4 मार्च 1985 से 29 फरवरी 2024 के बीच पीडब्ल्यूडी में सेवा के दौरान मेहरा ने अपनी वैध आय की तुलना में काफी अधिक संपत्ति अर्जित की। 6 करोड़ की अनुपातहीन संपत्ति भी सामने आई लोकायुक्त की जांच में लगभग 4 करोड़ रुपए की वैध आय के मुकाबले 10 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति और खर्च का पता चला, जिससे करीब 6 करोड़ रुपए की अनुपातहीन संपत्ति सामने आई। जांच के बाद ईडी ने मेहरा के ठिकानों पर सर्चिंग की थी। मेहरा और उनके परिजनों से जुड़े परिसरों से 8.79 लाख रुपए नकद, लगभग 3.51 करोड़ रुपए मूल्य के सोने के आभूषण, चांदी के सामान तथा अन्य कीमती वस्तुएं बरामद की गईं। जांच एजेंसी के अनुसार इन संपत्तियों के स्रोत के संबंध में संतोषजनक और प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। कृषि फार्म को बनाया आलीशॉन फार्म रिसार्ट ईडी की जांच में खुलासा हुआ था कि मेहरा और उनके परिवार ने ग्राम सैनी में 70-72 एकड़ भूमि पर विकसित “कस्तूरी कृषि फार्म” को एक आलीशान फार्म-रिसॉर्ट का स्वरूप दिया। इसमें कॉटेज, आवासीय इकाइयां, आंतरिक सड़कें, कृत्रिम जलाशय, खेती के लिए फार्म और अन्य सुविधाएं विकसित की गईं। ईडी की मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार इस संपत्ति का बाजार मूल्य लगभग 49.44 करोड़ रुपए तथा विकास कार्यों की लागत करीब 16 करोड़ रुपए आंकी गई। ईडी के अनुसार पीएमएलए जांच में कुल 67.25 करोड़ रुपए की अनुपातहीन संपत्तियों का पता चला है। इसके बाद एजेंसी ने पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत चल-अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। कुर्क संपत्ति में आवासीय भवन, कस्तूरी कृषि फार्म, नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य परिसंपत्तियां शामिल हैं। पूर्व जिला आबकारी अधिकारी भदौरिया की भी 18.20 करोड़ की संपत्ति कुर्क एक अन्य मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भोपाल नेमनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के अंतर्गत पूर्व जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया और उनके परिजनों की लगभग 18.20 करोड़ रुपए मूल्य की चल एवं अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की। ईडी ने यह कार्रवाई लोकायुक्त पुलिस इंदौर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की। जांच में सामने आया कि धर्मेंद्र सिंह भदौरिया ने वर्ष 1987 से 31 अगस्त 2025 के बीच अपनी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में काफी संपत्ति बनाई है। जांच के अनुसार, भदौरिया और उनके परिवार की वैध आय लगभग 2 करोड़ रुपए थी, जबकि इस अवधि में उन्होंने करीब 11.18 करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित की। इस प्रकार उनके पास लगभग 9.18 करोड़ रुपए की अनुपातहीन संपत्ति पाई गई, जो उनकी वैध आय से करीब 459 प्रतिशत अधिक है। वहीं पूर्व आबकारी अधिकारी भदौरिया ने वैध आय से 459 प्रतिशत अधिक आय अर्जित की थी। सोने-चांदी की खरीदी मानी, आय का स्त्रोत नहीं बता पाए ईडी की छापेमारी के दौरान विभिन्न परिसरों और बैंक लॉकरों से भारी मात्रा में नकदी, सोने-चांदी के आभूषण, बुलियन तथा अन्य कीमती वस्तुएं बरामद की गईं। जांच में धर्मेंद्र सिंह भदौरिया ने जब्त नकदी और आभूषणों पर अपना स्वामित्व स्वीकार किया, लेकिन उनके स्रोत और खरीद से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। भदौरिया और उनके परिवार के नाम पर जांच अवधि के दौरान कई उच्च मूल्य की चल एवं अचल संपत्तियां खरीदी गईं, जिनके लिए उपयोग की गई धनराशि के स्रोत का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला। ये खबर भी पढ़ें… करीब 35 लाख रुपए कैश…3 करोड़ का सोना मिला भोपाल में लोकायुक्त पुलिस ने गुरुवार को लोक निर्माण विभाग (PWD) के पूर्व चीफ इंजीनियर गोविंद प्रसाद (जी.पी.) मेहरा के भोपाल स्थित आवास समेत 4 ठिकानों पर छापा मारा। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के तहत की गई।पूरी खबर पढ़ें
