4 साल पहले पंचायत की बिल्डिंग बनाने की पहल शुरू हुई, लाखों रुपए भी निकल गए लेकिन न भवन बना न पंचायत बैठी। पंचायत के नाम पर बस एक कमरा है, जिसमें भूसा भरा रहता है। यह तो सिर्फ एक उदाहरण है। भिंड की लालपुरा पंचायत पंचायत में लाखों रुपए के ऐसे कई खेल हुए। खुलासा हुआ सरकारी पड़ताल के बाद, पता चला 56 लाख निकालने के बाद कुछ काम ही नहीं हुआ। सरपंच और सचिव दोषी निकले। कलेक्टर ने उनसे रिकवरी करने आदेश दिए। सचिव की सैलरी से रुपए भी कटने शुरू हो गए लेकिन सरपंच पर अब तक मेहरबानी बनी हुई है। सचिव कहते हैं कि मुझे तो राजनीतिक षड्यंत्र के तहत फंसाया गया। हाल ही में सरपंच को वसूली नोटिस फिर से भेजा गया। इसके बाद दैनिक भास्कर ने इस पूरे मामले में पड़ताल की। पंचायत के पूरे दस्तावेज खंगाले। सरपंच सचिव से बात करने की कोशिश की। पढ़िए रिपोर्ट… पहले पूरा मामला समझिए
साल 2022। भिंड के लहार विधानसभा क्षेत्र की लालपुरा पंचायत में लाखों रुपए का भ्रष्टाचार हुआ। सरकारी आंकड़ों में 28 लाख रुपए निकाले गए। आरोप सिद्ध हुआ कि तत्कालीन सरपंच कीर्ति पवन जाटव और सचिव राजेश गुनकर ने काम नहीं कराया। पंचायत भवन, सड़क, आंगनबाड़ी व मरघट जैसे कामों की राशि को नब्बे फीसदी नियम विरुद्ध निकालकर हड़प लिया। मामला सामने आने पर तत्कालीन कलेक्टर सतीश कुमार एस ने आरोप पत्र के आधार पर राशि रिकवरी के आदेश दिए गए। आदेश के मुताबिक आधी राशि सचिव के वेतन से काटे जाना और आधी राशि सरपंच से वसूले जाना था, लेकिन चार साल बाद भी सरपंच पर कोई शिकंजा जिला प्रशासन के अधिकारी नहीं कस सके। आरोप हैं कि राजनीतिक दबाव में सरपंच को रियायत दी जा रही है। पंचायत भवन में होने वाले काम ठप
पंचायत भवन नहीं होने से सबसे ज्यादा परेशान आम जन को हो रही है। पंचायत संबंधी योजनाओं की मूल रूप से ग्रामीणों के बीच बैठक नहीं की जाती है। पंचायतों में होने वाले कार्यक्रम ठप पड़े हैं। जब आगे पड़ताल की तो जानकारी मिली कि ग्राम पंचायत लालपुरा में श्यामपुरा और कटघरा ग्राम जुड़े हैं। इन तीनों गांवों में भारी भ्रष्टाचार पूर्व सरपंच कीर्ति देवी के कार्यकाल में किया गया। बिल्डिंग बनाने निकाले रुपए, कमरे में भूसा भरा
लालपुरा में पंचायत भवन के नाम पर पुराना कमरा मिला, जिसमें भूसा भरा हुआ था। वहीं करीब आठ से दस साल पुरानी एक अधूरी बिल्डिंग मिली। इस बिल्डिंग की छत के लिए पिछले सालों में चार लाख से ज्यादा की राशि स्वीकृत की गई थी। राशि स्वीकृत होने के बाद पूर्व सरपंच द्वारा निकाल ली गई, लेकिन उसका सदुपयोग नहीं किया गया और सरपंच कीर्ति देवी व सचिव राजेश गुनकर के बीच बंदरबांट हो गया। 90 प्रतिशत राशि निकाली, काम कुछ भी नहीं
इसी तरह अन्य कार्य भी अधूरे पाए गए, जिसमें सीसी नाली निर्माण कार्य रामनारायण के मकान से शासकीय प्राथमिक विद्यालय तक कटघरा ग्राम में होना था। यह विकास कार्य पंच परमेश्वर योजना के तहत कराया जाना था। शासन की ओर से इसके लिए स्वीकृत राशि 8 लाख 5000 थी, लेकिन नब्बे फीसदी राशि निकाल ली गई। इसी तरह पंच परमेश्वर योजना के तहत लालसपुरा ग्राम में नाथू प्रजापति के भवन तक सीसी नाली का निर्माण होना था। श्यामपुरा ग्राम में नैसाई दोहरे के घर से मेन रोड अजनार मार्ग तक नाली निर्माण होना था। इसके अलावा श्यामपुरा में सामुदायिक भवन और लालपुरा में पंचायत भवन का निर्माण कराया जाना था। इन सभी कार्यों की नब्बे फीसदी राशि निकाल ली गई, लेकिन धरातल पर कार्य नहीं हुए। अब तक बताए गए ये सभी कार्य सचिव राजेश गुनकर के कार्यकाल के थे। राजेश गुनकर के पहले भी दो सचिव इस पंचायत में रहे हैं, लेकिन वर्ष 2017 से 2022 तक के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार की परतें पूरी तरह नहीं खुल सकी हैं। अब जानिए कहां-कब क्या हुआ तत्कालीन कलेक्टर ने वसूली करने दिए थे आदेश विकास कार्यों की स्वीकृति ऐसे होती है
हमने ग्रामीण पंचायत के विकास कार्यों में स्वीकृत राशि को लेकर जानकारों से बात की। उन्होंने बताया- जब कोई कार्य स्वीकृत होता है तो पहले ग्राम सभा की बैठक बुलाई जाती है। उसमें प्रस्ताव रखे जाते हैं। सरपंच, सचिव, ग्राम पंचायत सदस्य और गांव के गणमान्य लोग शामिल होते हैं। चर्चा के बाद प्रस्ताव जनपद पंचायत में भेजा जाता है। यहां जनपद अध्यक्ष, सीईओ और सदस्यों की बैठक में सहमति दी जाती है। इसके बाद उपयंत्री और सहायक यंत्री द्वारा मौके पर निरीक्षण कर तकनीकी स्वीकृति (टीएस) दी जाती है, जिसमें निर्माण की पूरी लागत, सामग्री, मजदूरी और समय-सीमा का विवरण होता है। इसके बाद राशि स्वीकृत होती है। उपयंत्री और सहायक यंत्री की भूमिका पर सवाल
कार्य शुरू होने की रिपोर्ट उपयंत्री व सहायक यंत्री जनपद व जिला पंचायत को भेजते हैं। इसके बाद सरपंच व सचिव सिर्फ 40 फीसदी राशि निकाल सकते हैं। शेष राशि कार्य पूर्ण होने पर निकाली जाती है। इसमें 10 फीसदी राशि शर्तों के पूरा होने तक रोकी जाती है। लोग बोले- 56 लाख का घोटाला हुआ
हालांकि लालपुरा पंचायत में काम शुरू हुए बिना ही 90 फीसदी राशि निकाल ली गई। पंचायत से जुड़े लोगों का कहना है कि पंचायत में 56 लाख से अधिक का घोटाला हुआ है। 28 लाख रुपए तो कागजों में दर्ज हुआ भी है। घोटाले में सरपंच और सचिव दोषी हैं। इतनी बड़ी राशि निकाले जाने में तत्कालीन उपयंत्री और सहायक यंत्री की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं, बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। सचिव के वेतन से राशि काटे जाने की कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन सरपंच कीर्ति देवी से अब तक कोई वसूली नहीं हो सकी और न ही एफआईआर दर्ज की गई। वर्तमान सरपंच बोले- रुपए निकाले काम नहीं हुआ
लालपुरा पंचायत के सरपंच रवि प्रजापति का कहना है कि पंचायत भवन के लिए पहले राशि स्वीकृत हुई थी। कुछ पैसा भी निकला, लेकिन आज तक भवन नहीं बन सका। इस संबंध में लिखित शिकायत की है। यह भी पता चला है कि पूर्व के कार्यकाल में 50-60 लाख के कार्य नहीं हुए। गांव के आदित्य पचौरी का कहना है कि 12 साल पहले पंचायत भवन का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन छत नहीं डल सकी। सड़क का पैसा निकल गया, लेकिन सड़क नहीं बनी। नाली निर्माण की राशि भी गायब हो गई। नाली नहीं बनने से मेरे घर के सामने बारिश में पानी जमा हो जाता है। गांव के मुन्नालाल चौरसिया का कहना है कि गांव में मरघट की समस्या लंबे समय तक बनी रही, जिसे वर्तमान सरपंच ने हल कराया। पूर्व सरपंच ने कोई काम नहीं किया था। सचिव बोले- राजनीतिक षड्यंत्र में फंसाया
सचिव राजेश गुनकर कहना है कि मुझे राजनीतिक षड्यंत्र के तहत फंसाया गया है। उन्होंने यह कहकर फोन काट दिया। वहीं पूर्व सरपंच कीर्ति देवी से संपर्क करना चाहा तो फोन उनके पति पवन ने रिसीव किया। उन्होंने कहा मैडम की तबीयत खराब है। उनसे जब रुपए के रिकवरी के बारे में पूछा तो बोले कि मैं भर रहा हूं। कितना भर रहे इसका कोई जवाब नही दिया। इधर, जिला पंचायत सीईओ वीरसिंह का कहना है कि लालपुरा पंचायत में पूर्व सरपंच कीर्ति पवन जाटव और सचिव राजेश गुनकर पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। इस मामले की फाइल देखी जा रही हैं और यह प्रकरण तहसीलदार के पास है। जल्द ही उचित कार्रवाई की जाएगी।
