इंदौर में टाटा मोटर्स फाइनेंस के नाम पर फर्जी एनओसी बनाकर ठगी करने के चर्चित मामले में कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने रबर स्टैम्प (सील) बनाने वाले दुकान संचालक को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है, जबकि मुख्य आरोपी रवि कुमार झा, संदीप और राजेंद्र के खिलाफ मामला जारी रखने के आदेश दिए हैं। मामला लसूड़िया थाना क्षेत्र का है, जहां फरियादी लक्ष्मीनारायण ने 2024 में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनकी टाटा टियागो कार की किस्तें बकाया थीं। इसी दौरान रवि कुमार झा और संदीप ने उनसे संपर्क कर कम रकम में लोन सेटलमेंट कराने का झांसा दिया। आरोपियों ने कहा कि वे 80 हजार रुपए में पूरा मामला निपटा देंगे और फाइनेंस कंपनी से NOC दिलवा देंगे। भरोसे में आकर फरियादी ने आरोपियों को 80 हजार रुपए दे दिए। फर्जी लेटरपैड और NOC देकर किया गुमराह कुछ दिनों बाद आरोपियों ने टाटा मोटर्स फाइनेंस के नाम का फर्जी लेटरपैड, फर्जी NOC और फॉर्म-35 तैयार कर फरियादी को दे दिया। दस्तावेज इतने वास्तविक लगे कि फरियादी ने आरटीओ में आवेदन कर कार अपने नाम ट्रांसफर भी करवा ली। फाइनेंस कंपनी ने खोली पोल बाद में जब फरियादी कार लेकर बाहर निकला, तो फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने उसे रोककर बताया कि कार की किश्तें अभी भी बकाया हैं और NOC पूरी तरह फर्जी है। इसके बाद पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने फर्जी सील और लेटरपैड तैयार कर पूरा खेल रचा था। इस दौरान एक रबर स्टैम्प दुकान संचालक से बिना किसी अधिकृत दस्तावेज के कंपनी की सील बनवाई गई थी। इसी आधार पर पुलिस ने दुकान संचालक को भी आरोपी बनाया था। एक ग्राहक के कहने पर सील बनाई मामले की सुनवाई के दौरान रबर स्टैम्प दुकान संचालक की ओर से दलील दी गई कि उसने लंबे समय से ग्राहक रहे व्यक्ति के कहने पर सामान्य प्रक्रिया में सील बनाई थी और उसे किसी फर्जीवाड़े की जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने पाया कि दुकान संचालक के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है और केवल सह-आरोपी के बयान के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर उसे बरी कर दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले के मुख्य आरोपी रवि कुमार झा, संदीप और राजेंद्र के खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा। पहले ही आरोपियों को गिरफ्तार कर चालान पेश किया जा चुका है।
