मुरैना में वन रक्षक को कुचलने और मप्र-राजस्थान को जोड़ने वाले चंबल पुल के पिलर की नींव तक खुदाई पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किए कि क्या राज्य सरकार के पास हथियार नहीं हैं? सरकार कहां है? इन दोनों घटनाओं को कोर्ट ने राज्य सरकार की विफलता करार दिया। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने मप्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि यह दोनों ही घटनाएं बताती हैं कि राज्य सरकार चंबल नदी पर अवैध खनन को रोकने में विफल रही है या यह राज्य के अफसरों की मिलीभगत से किया जा रहा है। कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा कि “वे (रेत माफिया) पुल की खुदाई कर रहे हैं और अगर पुल गिर जाता है, तो कौन जिम्मेदार होगा? तस्वीरें खुद ही सब कुछ बयां करती हैं। वन अधिकारियों को रेत माफियाओं द्वारा कुचला जा रहा है और एक पुल की नींव खोदी जा रही है। यह बिल्कुल चौंकाने वाली स्थिति है। यह सब आपकी (राज्य सरकार) नाक के नीचे हो रहा है। यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि एक पुल की नींव खोदी जा सकती है और राज्य सरकार आंखें बंद किए बैठी है। ये है वह पुल… जिसे माफिया 15 फीट तक खोद डाला है कई राज्यों में वन अफसरों को रेत माफिया पर गोली चलाने का अधिकार…मप्र ने भी मांग की है केस में एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) के रूप में सीनियर एडवोकेट निखिल गोयल ने साक्ष्य पेश किया। बताया, पुल के स्तंभों की नींव माफिया खोद रहे हैं। ओडिशा, असम और महाराष्ट्र ने एक अधिसूचना जारी कर वन अधिकारियों को रेत माफियाओं पर गोली चलाने का अधिकार दिया है और इसी तरह मप्र, राजस्थान और यूपी ने केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) को पत्र लिखकर इन अवैध रेत खननकर्ताओं पर गोली चलाने के अधिकार की अनुमति मांगी है। कोर्ट इसलिए चिंतित राजस्थान-मप्र को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे 44 का पुल मुरैना के राजघाट पर स्थित है। इस के दो समानांतर स्ट्रकचर हैं। एक से वाहन आते हैं, दूसरे से जाते हैं। दोनों के 12-12 पिलर मध्य प्रदेश की सीमा में है। इनमें से 8-8 पिलर नदी के बीच में हैं। इनमें से 5-5 पिलर के नीचे 15 फीट तक माफिया ने खोद डाला है। वनरक्षक की हत्या पर रिपोर्ट मांगी… 17 को आएगा निर्णय सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित कर दिया है। निर्णय 17 अप्रैल को आएगा। सुप्रीम कोर्ट ने रेत माफिया द्वारा ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचले गए वन रक्षक की हत्या के मामले में अब तक की गई जांच की स्थिति रिपोर्ट और सीसीटीवी कैमरों की फुटेज पेश करने को कहा है। 9 अप्रैल को कोर्ट ने इस घटना पर संज्ञान लेकर स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग पर एक सप्ताह के भीतर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी।
