Homeमध्यप्रदेशग्वालियर हाईकोर्ट का OBC क्रीमीलेयर को लेकर फैसला:कोर्ट ने कहा-पति की सैलरी...

ग्वालियर हाईकोर्ट का OBC क्रीमीलेयर को लेकर फैसला:कोर्ट ने कहा-पति की सैलरी से नहीं बल्कि मां-पिता की सामाजिक-आर्थिक दशा से तय होगाी ओबीसी क्रीमीलेयर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने ओबीसी क्रीमीलेयर से जुड़ी एक याचिका पर शनिवार को बड़ा व अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने इस फैसले के जरिए स्पष्ट किया है कि किसी महिला अभ्यर्थी की क्रीमीलेयर तय करने में उसकी पति की आय को आधार नहीं माना जा सकता है। बल्कि क्रीमी लेयर तय करने में महिला अभ्यर्थी के मां-पिता की सामाजिक व आर्थिक स्थिति को आधार मानकर देखा जाएगा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला अभ्यर्थी की खुद की इनकम और पति की इनकम को उस समय तक नहीं जोड़ा जा सकता है तब तक कि पति क्लास-1 अधिकारी न हो। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया है कि महिला अभ्यर्थी के पिता क्लास थर्ड अधिकारी थे और माता गृहिणी इसलिए उसे किसी भी हालत में ओबीसी क्रीमीलेयर आरक्षक का फायदा नहीं मिल सकता है। इसके साथ ही याचिका को खारिज कर दिया गया है।
यह है पूरा मामला
शनिवार को कोर्ट ने ओबीसी क्रीमीलेयर को लेकर जो फैसला दिया है। दरअसल यह मामला सहायक प्राध्यापक (लॉ) पद पर नियुक्ति से पूरी तरह जुड़ा है। कोर्ट में दायर की गई याचिका में याचिकाकर्ता सुनीता यादव ने दावा किया था कि इस पद के लिए चयनित महिला अभ्यर्थी गरिमा राठौर क्रीमीलेयर में आती हैं, क्योंकि उनके पति सिविल जज हैं। साथ ही उनके परिवार की इनकम तय मानक मतलब निर्धारित सीमा से कहीं अधिक है। याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि उसे 2021 से वरिष्ठता का लाभ दिया जाए। पर कोर्ट ने क्रीमी लेयर को अच्छी तरह परिभाषित कर पूरे मामले को स्पष्ट करते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।
साल 2021 से वरिष्ठता का लाभ भी मांगा
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की थी कि चयनित अभ्यर्थी गरिमा राठौर के पति सिविल जज हैं और उसकी खुद की भी आय है। इस आधार पर परिवार की कुल आय क्रीमी लेयर की सीमा से अधिक हो जाती है। इसलिए वह OBC (महिला) आरक्षित पद की पात्र नहीं थी। साथ ही अपनी प्रमोशन को लेकर तर्क दिया कि यदि उस अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं दी जाती, तो उन्हें ही 2021 में नियुक्ति मिलती, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हालांकि बाद में सुनीता यादव को 2023 में नियुक्ति मिल गई, लेकिन उन्होंने कोर्ट से मांग की कि उन्हें 2021 से नियुक्ति मानी जाए। और उसी आधार पर वरिष्ठता व अन्य लाभ दिए जाएं। पर कोर्ट ने यह नहीं माना है।

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here