भोपाल के एम्स में एक ऐसा खास हेलमेट विकसित किया जा रहा है, जिसे पहनते ही दांत और जबड़े की 3D जांच संभव होगी। यह प्रोजेक्ट न केवल भारत बल्कि दुनिया के लिए भी अनोखा माना जा रहा है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के “फर्स्ट इन वर्ल्ड” चैलेंज के तहत इस तकनीक पर काम चल रहा है। इस हेलमेट आधारित एक्स-रे डिवाइस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तेज और सटीक डायग्नोसिस किया जाएगा। इससे डेंटल और जबड़े से जुड़ी बीमारियों की जांच में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। यह प्रोजेक्ट ICMR के “फर्स्ट इन वर्ल्ड चैलेंज” के तहत स्वीकृत किया गया है, जो अपने आप में इसकी अहमियत को दर्शाता है। AI से होगी सटीक जांच, मिलेगी विस्तृत रिपोर्ट इस हेलमेट डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क (Artificial Neural Network) का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक के जरिए मरीज के दांत और जबड़े की संरचना का 3D इमेज तैयार होगा, जिससे डॉक्टरों को बीमारी की सटीक जानकारी मिल सकेगी। इससे पारंपरिक एक्स-रे की तुलना में अधिक स्पष्ट और विस्तृत रिपोर्ट मिल पाएगी। इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व डॉ. बाबू लाल सोनी कर रहे हैं, जो एम्स भोपाल के ट्रॉमा और इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। वे इस प्रोजेक्ट में प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर (Principal Investigator) की भूमिका निभा रहे हैं और पूरी टीम के साथ इस नई तकनीक को विकसित करने में जुटे हैं। डेंटल और मैक्सिलोफेशियल जांच में करेगा मदद यह प्रोजेक्ट “फर्स्ट इन वर्ल्ड” कैटेगरी में आता है, यानी इस तरह का हेलमेट आधारित 3D एक्स-रे डिवाइस पहली बार विकसित किया जा रहा है। यदि यह सफल होता है, तो डेंटल और मैक्सिलोफेशियल जांच के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ सकता है। मरीजों को तेज, सुरक्षित और सटीक जांच की सुविधा मिलेगी, जिससे इलाज में भी तेजी आएगी। इस तकनीक के विकसित होने के बाद अस्पतालों में जांच प्रक्रिया आसान और समय बचाने वाली हो जाएगी। मरीज को केवल हेलमेट पहनना होगा और कुछ ही समय में पूरी 3D रिपोर्ट तैयार हो जाएगी। इससे खासकर जटिल मामलों में डॉक्टरों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
