एमपी के कर्मचारियों के 15 हजार 345 करोड़ रुपए का महंगाई भत्ता कांग्रेस की दिग्विजय और कमलनाथ तथा बीजेपी की उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान ने नहीं चुकाए हैं। 23 सालों में इतनी बड़ी रकम प्रदेश में काबिज रही सरकारों के मुखिया ने कर्मचारियों को समय पर महंगाई भत्ता न देकर बचाई है और कर्मचारी हितों का नुकसान किया है। इस लेटलतीफी के चलते हर कर्मचारी को लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है। केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली तारीख से महंगाई भत्ता न देकर देर से भत्ते का लाभ देने और एरियर्स नहीं दिए जाने के कारण कर्मचारियों को यह नुकसान उठाना पड़ा है। इसमें से पांचवें और छठवें वेतनमान में 11970 करोड़ रुपए कांग्रेस और भाजपा की सरकारों द्वारा महंगाई भत्ता समय पर न देकर बचाए गए हैं। इसी तरह सातवें वेतनमान में भी जुलाई 2019 से सितंबर 2021 तक 27 महीने का 5% महंगाई भत्ता नहीं दिया गया। इससे कुल 3375 करोड़ रुपए का नुकसान सातवें वेतनमान में नियमित कर्मचारियों को हुआ है। बताया जाता है कि केंद्र सरकार द्वारा जुलाई 2019 से 12% से 17% महंगाई भत्ता कर दिया था। उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी और तब के सीएम कमलनाथ ने पांच प्रतिशत महंगाई भत्ता रोक दिया था। इसके बाद मार्च 2020 में बीजेपी की सरकार बनी तो भी भत्ता नहीं दिया गया। इसके बाद राज्य सरकार ने नवंबर 2021 से 20% महंगाई भत्ता देना शुरू किया। इस बीच कुल 27 महीने का नुकसान कर्मचारियों को महंगाई भत्ते के रूप में मिलने वाले लाभ में उठाना पड़ा था। कांग्रेस द्वारा जनवरी 2002 से 7 दिसंबर 2003 तक दो साल का महंगाई भत्ता नहीं दिया गया था। उस समय दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे। इस दौरान लगभग 24 महीने में 1260 करोड़ रुपए का महंगाई भत्ता पूरी तरीके से रोककर कर्मचारियों को नुकसान पहुंचाया गया था। 8 दिसंबर 2003 को उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद जनवरी 2004 से अक्टूबर 2012 तक कुल 106 महीने होते हैं। भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री रहे उमा भारती, बाबूलाल गौर, शिवराज सिंह चौहान द्वारा महंगाई भत्ता तो दिया गया लेकिन केंद्रीय दर और केंद्र की तिथि से नहीं दिया गया। इसके चलते प्रदेश के कर्मचारियों को 10710 करोड़ रुपए का नुकसान कर्मचारियों को छठवें वेतनमान में नुकसान हुआ। पेंशनर्स को अलग नुकसान, हजारों करोड़ उनके भी नहीं दिए प्रदेश के पेंशनर्स के भी हजारों करोड़ रुपए राज्य सरकारें नहीं देती रही हैं। मोहन यादव सरकार में भी पेंशनर्स और परिवार पेंशन के रूप में केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली तारीख से महंगाई राहत नहीं दी जा रही है। इस बार भी मोहन सरकार ने पेंशनर्स और परिवार पेंशनर्स को एक जनवरी से महंगाई राहत दी है जबकि इन्हें भी जुलाई 2025 से यह राहत दी जानी थी। इस तरह पेंशनर्स को जमकर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। मप्र तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही सरकारों के कार्यकाल में कर्मचारियों को केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता समय समय पर नहीं दिया गया है। इसका असर यह हुआ है कि कर्मचारियों को लाखों का नुकसान हुआ है। 23 साल में कर्मचारियों को 15345 करोड़ रुपए का महंगाई भत्ता सरकार ने नहीं दिया है और यह राशि बचा ली गई है। ऐसी ही स्थिति पेंशनर्स के मामले में भी है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
छठे वेतनमान पर केंद्र सरकार द्वारा दिया गया महंगाई भत्ता एक जनवरी 2006- निरंक एक जुलाई 2006- 2 प्रतिशत एक जनवरी 2007- 6 प्रतिशत एक जुलाई 2007-9 प्रतिशत एक जनवरी 2008- 12 प्रतिशत एक जुलाई 2008-16 प्रतिशत एक जनवरी 2009 – 22 प्रतिशत एक जुलाई 2009-27 प्रतिशत एक जनवरी 2010-35 प्रतिशत एक जुलाई 2010-35 प्रतिशत एक जनवरी 2011-51 प्रतिशत एक जुलाई 2011-58 प्रतिशत एक जनवरी 2012- 65 प्रतिशत एक जुलाई 2012 -72 प्रतिशत एक जनवरी 2013-80 प्रतिशत एक जुलाई 2013-90 प्रतिशत एक जनवरी 2014-100 प्रतिशत छठे वेतनमान पर राज्य सरकार द्वारा दिया गया महंगाई भत्ता एक जनवरी 2006- 0 एक जुलाई 2006-0 एक जनवरी 2007-0 एक जुलाई 2007-0 एक जनवरी 2008-0 एक सितम्बर 2008-12 प्रतिशत एक जुलाई 2009-16 प्रतिशत एक नवम्बर 2009-19 प्रतिशत एक जनवरी 2010-22 प्रतिशत एक अप्रेल 2010- 25 प्रतिशत एक जुलाई 2020 -27 प्रतिशत एक नवम्बर 2010-35 प्रतिशत एक अप्रेल 2011-45 प्रतिशत एक अक्टूबर 2011-51 प्रतिशत एक अप्रेल 2012-58 प्रतिशत एक अगस्त 2012-65 प्रतिशत एक नवम्बर 2012-72 प्रतिशत एक जनवरी 2013-80 प्रतिशत एक जुलाई 2013-90 प्रतिशत एक जनवरी 2014 -100 प्रतिशत एक जुलाई 2014-107 प्रतिशत एक जनवरी 2015-113 प्रतिशत एक जुलाई 2015-119 प्रतिशत एक जनवरी 2016 -125 प्रतिशत एक जुलाई 2016-132 प्रतिशत एक जनवरी 2017-136 प्रतिशत सातवें वेतनमान पर केंद्र सरकार द्वारा दिया गया महंगाई भत्ता एक जुलाई 2016 -2 प्रतिशत एक जनवरी 2017-4 प्रतिशत एक जुलाई 2017 -5 प्रतिशत एक जनवरी 2018-7 प्रतिशत एक जुलाई 2018- 9 प्रतिशत एक जनवरी 2019- 12 प्रतिशत एक जुलाई 2019- निल एक जनवरी 2020– निल एक जुलाई 2020-निल एक जनवरी 2021- निल एक जुलाई 2021-15 प्रतिशत एक जनवरी 2022-18 प्रतिशत एक जुलाई 2022–22 प्रतिशत एक जनवरी 2023-42 प्रतिशत एक जुलाई 2023-46 प्रतिशत एक जनवरी 2024 -50 प्रतिशत एक जुलाई 2024-53 प्रतिशत एक जनवरी 2025-55 प्रतिशत एक जुलाई 2025 -58 प्रतिशत सातवें वेतनमान पर राज्य सरकार द्वारा दिया गया महंगाई भत्ता एक जुलाई 2016-2 प्रतिशत एक जनवरी 2017-4 प्रतिशत एक जुलाई 2017 -5 प्रतिशत एक जनवरी 2018-7 प्रतिशत एक जुलाई 2018-9 प्रतिशत एक जनवरी 2019- 12 प्रतिशत एक जुलाई 2019-निल एक जनवरी 2020– निल एक जुलाई 2020-निल एक अक्टूबर 2021- 20 प्रतिशत एक मार्च 2022-31 प्रतिशत एक अगस्त 2022– 34 प्रतिशत एक अक्टूबर 2022-38 एक जनवरी 2023-42 प्रतिशत एक जुलाई 2023-46 प्रतिशत एक जनवरी 2024 -50 प्रतिशत एक जुलाई 2024-53 प्रतिशत एक जनवरी 2025-55 प्रतिशत एक जुलाई 2025 -58 प्रतिशत
