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मोदी बोले- अविश्वास प्रस्ताव के पीछे कुछ निजी स्वार्थ थे:बिरला को लेटर लिखा; स्पीकर ने सांसदों को लिखा- संसद में बैनर चिंता का विषय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव स्वार्थ से प्रेरित था। कुछ लोग लोकतांत्रिक संस्थाओं को अपने संकीर्ण दायरे में सीमित रखना चाहते हैं। पीएम मोदी ने स्पीकर बिरला को लिखे लेटर में ये बातें कहीं। यह पत्र कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष द्वारा स्पीकर को हटाने के लिए लाए गए प्रस्ताव के खारिज होने के कुछ दिन बाद लिखा गया है। इसमें पीएम ने कहा- प्रस्ताव गिरने के बाद आपका वक्तव्य लोकतांत्रिक मर्यादा की गहरी और सधी हुई व्याख्या था। लोकतांत्रिक विचारों में आस्था रखने वाले हर नागरिक ने यह महसूस किया कि इस अविश्वास प्रस्ताव के पीछे निजी स्वार्थ और अहंकार की भावना काम कर रही थी। विपक्ष लोकसभा में ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया था, जो 11 मार्च को ध्वनिमत से खारिज हो गया था। विपक्ष के 119 सांसदों ने आरोप लगाया था कि स्पीकर सदन चलाते समय पक्षपात कर रहे हैं और विपक्ष को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया जा रहा। स्पीकर ने कहा- कुछ सांसद सदन की गरिमा खराब कर रहे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सभी लोकसभा सांसदों को एक लेटर लिखा है। इसमें उन्होंने कहा- हमारी संसद में व्यक्त होने वाली हर आवाज 140 करोड़ लोगों की आशाओं, आकांक्षाओं और अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने लिखा- मैं यह पत्र लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति हमारी साझा जिम्मेदारी को ध्यान में रखकर लिख रहा हूं। पिछले कुछ समय से कुछ सदस्य संसद के अंदर और बाहर उसकी गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। जिस तरह के बैनर, प्लेकार्ड और तख्तियों का प्रदर्शन किया जा रहा है, जिस प्रकार के शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है, जिस तरह का आचरण और व्यवहार किया जा रहा है, यह हम सबके के लिए गहरी चिंता का विषय है। स्पीकर ने लिखा- मेरा विनम्र आग्रह है कि हमारे आचरण को पूरा देश देखता है। इसलिए लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए हमें गंभीर आत्ममंथन करना होगा। सभी दलों को उच्च नैतिक व्यवहार सुनिश्चित करना चाहिए। बिरला ने प्रस्ताव के निपटारे तक सदन नहीं जाने का फैसला लिया था ओम बिरला अविश्वास प्रस्ताव के बाद से लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता में शामिल नहीं हुए थे। प्रस्ताव लंबित रहने के दौरान ओम बिरला ने संसदीय परंपरा का हवाला देते हुए नैतिक आधार पर कार्यवाही की अध्यक्षता न करने का फैसला लिया था। इस दौरान सदन की कार्यवाही पैनल ऑफ चेयरपर्सन के सदस्य चलाते रहे। प्रस्ताव खारिज होने के बाद बिरला सदन की कार्वयाही की फिर से अध्यक्षता करने लगे। ——————————————- ये खबर भी पढ़ें… शाह बोले- आंख मारने वाले स्पीकर पर सवाल उठा रहे; विपक्ष ने माफी मांगो के नारे लगाए गृह मंत्री अमित शाह ने 56 मिनट तक प्रस्ताव पर सरकार की तरफ से जवाब दिया। शाह ने कहा कि 18वीं लोकसभा में कांग्रेस सांसदों को बोलने के लिए भाजपा से दो गुना ज्यादा समय मिला। फिर भी विपक्ष के नेता कहते हैं कि हमें बोलने नहीं दिया जाता। जब बोलने का मौका आता है तो वे जर्मनी में होते हैं, इंग्लैंड में होते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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